दोहरे वायरस की मार झेल रहा उत्तर कन्नड़ जिला

दोहरे वायरस की मार झेल रहा उत्तर कन्नड़ जिला
-पृथक जिला कार्यालय खोलकर नियुक्त किया चिकित्सा अधिकारी
हुब्बल्ली

By: Zakir Pattankudi

Published: 19 Mar 2020, 08:44 PM IST

दोहरे वायरस की मार झेल रहा उत्तर कन्नड़ जिला
हुब्बल्ली
उत्तर कन्नड़ जिले को कोरोना तथा केएफडी वायरस ने स्तब्ध किया है। जिले को स्थाई तौर पर प्रतडि़त करने वाले मंकी फीवर को गम्भीरता से लेने की जरूरत है। चार दशकों से परेशान कर रही मंकी फीवर बीमारी ने फिर से पैर पसारा है। सरकार ने मंकी फीवर बीमारी के लिए पृथक जिला कार्यालय खोलकर डॉ. सतीश शेट को चिकित्सा अधिकारी नियुक्त किया है।
केएफडी जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. सतीश शेट ने बताया कि सर्दियों का मौसम आरम्भ होते ही मंकी फीवर के संभावित क्षेत्रों की जनता को देने के लिए एक लाख 17 हजार 89 डोज खराक लाया गया था। कुल लक्ष्य के 28 प्रतिशत को मात्र हासिल करना संभव हुआ है। तीन डोज खुराक प्राप्त करने वाले इलाके के लोगों को मंकी फीवर नहीं आया है। आने पर भी तुरन्त स्वस्थ हुए हैं। केवल एक डोज प्राप्त, डोज प्राप्त नहीं किए इलाके में मंकी फीवर नजर आया है। 2019 की गर्मी में तीन जोनों की मृत्यु हुई थी। मौजूदा वर्ष 20 जनों के खून की जांच की गई है। सिध्दापुर में दस, कुमटा में एक, होन्नावर में दो जनों में पुष्टि हुई। सिध्दापुर के दो जनों की मृत्यु हुई। मंकी फीवर के नाम से घबराकर अस्पताल नहीं जाकर आखरी पल में मणिपाल लेजाते समय दम तोड़ा है। बकाया मरीज विभिन्न अस्पतालों में इलाज प्राप्त कर रहे हैं। 141 बंदरों के खून की जांच करने पर 13 बंदरों में बीमारी की पुष्टि हुई है। कुमटा, होन्नावर, सिध्दापुर तीन तालुकों में मंकी फीवर चुनौती बना हुआ है। तीन बार खुराक प्राप्त करने पर मंकी फीवर प्रतिरोधक शक्ति हासल करने के लिए तीन माह चाहिए। अब खुराक प्राप्त करने पर भी कोई फायदा नहीं है। अब सतर्कता बरतना ही एक मात्र मार्ग है। गर्मियों में वन में जाकर लकड़ी, घांसफूस लाना बंद करना चाहिए। वनों में रहने वालों को डीएमपी तेल लगाकर घूमना चाहिए। घर लौटने पर कपड़ों, पैर को गर्म पानी में धोना चाहिए। बंदर के मरने पर तुरन्त समीप के स्वास्थ्य केंद्र को जानकारी देनी चाहिए।

सरकार मदद को नहीं आएगी तो मुश्किल होगी

होन्नावर तालुक पंचायत अध्यक्ष उल्लास नायक ने कहा कि और तीन माह गर्मी है। गर्मी बढ़ते ही एक बंदर से दूसरे बंदर को बुखार फैलकर पूरे गांव में खटमल गिराते घूमने से पूरे गांव में बीमारी फैलने का खतरा है। बुखार आते ही तुरन्त सरकारी अस्पताल में भर्ती करने पर कम किया जा सकता है। मंकी फीवर के लिए आयुष्मान भारत, आरोग्य कर्नाटक में इलाज प्राप्त करने का मौका नहीं है। गरीब, मध्यम वर्ग के लोगों को मंकी फीवर का भय सता रहा है। लोग आखरी पल में अस्पताल आते हैं। वहां से बड़े अस्पतालों में रेफर करने पर कम से कम दो-तीन लाख रुपए खर्च होते हैं। अस्पताल के पूरे खर्च का भुगतान सरकार को ही करना चाहिए। जिले के विधायकों, मंत्रियों तथा सांसद को अपने रसूक का इस्तेमाल कर इसका स्थाई समाधान तलाशना चाहिए।

Zakir Pattankudi Incharge
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