scriptVillagers longing for government schemes for 13 years | 13 वर्षों से सरकारी योजनाओं को तरस रहे ग्रामीण | Patrika News

13 वर्षों से सरकारी योजनाओं को तरस रहे ग्रामीण

13 वर्षों से सरकारी योजनाओं को तरस रहे ग्रामीण
-समस्या पूछने वाला कोई नहीं
कोप्पल

हुबली

Published: October 29, 2021 07:17:46 pm

13 वर्षों से सरकारी योजनाओं को तरस रहे ग्रामीण
कोप्पल
जिले के एक गांव में पिछले 13 वर्षों से सरकार से कोई भी नई योजना मंजूर नहीं हुई है। इस गांव को स्थानांतरित करने की मांग करने के बाद भी स्थानांतरित नहीं किया है। स्थानांतरित होने वाली जगह पर मूलभूत सुविधाएं ही नहीं हैं। केवल स्थानांतरण करने का आश्वासन देते हुए जिला प्रशासन समय बर्बाद कर रहा है। इसके चलते मुदलापुर ग्रामीण आरोप लगा रहे हैं कि उनकी पीढ़ा सुनने वाला कोई नहीं है।
तुंगभद्रा बांध में जमा गाद को हटाने के उद्देश्य से 1.92 टीएमसी क्षमता के हिरेहल्ला जलाशय को मुदलापुर के पास निर्माण कर वर्ष 2001 में लोकार्पण किया गया। हिरेहल्ला जलाशय में डूबे चार गांवों तथा जलाशय से लगे कोप्पल तालुक के मुदलापुर गांव को स्थानांतरित करने के लिए उसी दौरान योजना तैयार की गई परन्तु वर्ष 2021 में अभी तक इन गांवों को स्थानांतरित नहीं किया। यलबुर्गा तालुक के मुत्ताल, शिरूर, वीरापुर तथा कोप्पल तालुक के मुदलापुर गांवों को स्थानांतरित करना है।
13 वर्षों से सरकारी योजनाओं को तरस रहे ग्रामीण
13 वर्षों से सरकारी योजनाओं को तरस रहे ग्रामीण
अदालत में चल रही है सुनवाई

इसी बीच वर्ष 2010 में कोप्पल तालुक के मुदलापुर को सुरक्षित जगह स्थानांतरित करने के लिए सरकार की ओर से राशि मंजूर हुई। इस दौरान गांव में मकानों के लिए मुआवजा दिया गया है। इसी दौरान मूल्यह्रास राशि देने, मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग को लेकर गांव के 182 परिवारों ने अदालत की शरण में गए हैं, मामले की अभी भी सुनवाई चल रही है।
ठोस जमीन नहीं मिल रही

ग्रामीणों का कहना है कि मुदलापुर गांव को स्थानांतरित करने के लिए जमीन खरीदकर वहां सरकारी भवनों का निर्माण किया गया है परन्तु वहां पेयजल, सड़क, बिजली कनेक्शन नहीं दिया। इस कारण ग्रामीण वहां स्थानांतरित नहीं हुए हैं। इसी बीच अब निर्माणाधीन नए गांव की जमीन पर मकानों की मजबूती के लिए बुनियाद मजबूत होनी चाहिए, परन्तु यहां आठ-दस फीट गहराई में भी ठोस जमीन नहीं मिल रही है। यहां मकानों का निर्माण करने पर चार-पांच वर्ष में ही गिर जाएंगे। इसके अलावा सरकार की ओर से पुराने मकानों के लिए दी गई मुआवजा राशि बुनियाद पर ही खर्च हो रही है। इन सभा कारणों से ग्रामीण स्थनांतरित होने से पीछे हट रहे हैं। इसके चलते वहां निर्मित सरकारी भवन अब पूरी तरह गिर रहे हैं। इसी बीच मुदलापुर गांव के स्थानांतरित होने के कारण पुराने गांव को सरकार की ओर से किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। कम से कम एक मकान तक मंजूर नहीं कर रही है।

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