script1567 farmer do natural farming with cow doung | इंदौर जिले में 1567 किसान गाय के गोबर-गौमूत्र व पत्तों से बने कीटनाशक से करेंगे खेती | Patrika News

इंदौर जिले में 1567 किसान गाय के गोबर-गौमूत्र व पत्तों से बने कीटनाशक से करेंगे खेती

- जिला खरीफ सीजन में प्राकृतिक खेती के लिए तैयार, 3276 एकड़ का पंजीयन, प्रदेश के कुल 4,68,576 एकड़

- झाबुआ में 9025 एकड़ में होगी खेती

इंदौर

Published: June 02, 2022 01:09:30 pm

इंदौर. natural farming. फर्टिलाइजर आधारित हरित क्रांति से खराब हो रही मिट्टी को सुधारने के लिए सरकार किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित कर रही है। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री की पहल पर तैयार डाटाबेस से पता चला कि शहरों के आसपास के किसान फर्टिलाइजर आधारित खेती कर रहे हैं तो ग्रामीण अंचल में पारंपरिक खेती के प्रति रूचि ज्यादा है। खरीफ की फसल के लिए चलाए गए अभियान की िस्थति देखें तो इंदौर जिले में अब तक 1567 किसान प्राकृतिक खेती के लिए तैयार हुए हैं। इनका रकबा 3276 एकड़ है। वहीं, झाबुआ में किसानों की संख्या कम है, लेकिन रकबा 9025 एकड़ है। इंदौर के लिए तय किया गया है कि प्रत्येक गांव में 5 किसान इस खेती को अपनाकर प्रेरक का काम करें, ताकि रबी के लिए रकबा बढ़ाया जा सके।
इंदौर जिले में 1567 किसान गाय के गोबर-गौमूत्र व पत्तों से बने कीटनाशक से करेंगे खेती
इंदौर जिले में 1567 किसान गाय के गोबर-गौमूत्र व पत्तों से बने कीटनाशक से करेंगे खेती
आय बढ़ाने के लिए किसान उत्पादन और रकबा दोनों बढ़ा रहे हैं, लेकिन अंधाधुंध कीटनाशक व खाद का उपयोग मिट्टी को सख्त बनाकर बंजर कर रहा है। वैज्ञानिकों की सिफारिश पर सरकारों ने जैविक खेती पर जोर देना शुरू किया है। हालांकि ज्यादा उत्पादन लागत के कारण यह मॉडल लोकप्रिय नहीं हो सका। अब सरकार ने प्राकृतिक खेती पर फोकस किया है। यह कम लागत वाली पारंपरिक खेती है। इस संबंध में किसानों द्वारा कराए गए रजिस्ट्रेशन में प्रदेश में इंदौर का स्थान 10वां है।
प्राकृतिक खेती इंदौर संभाग में

- आठ जिलों में 40288 एकड़ जमीन खेती के लिए तैयार है।

- झाबुआ में सबसे ज्यादा 9025 एकड़ है। किसानों की संख्या 958 है।

- बड़वानी व खरगोन में किसानों की संख्या ज्यादा, लेकिन रकबा कम।
प्रदेश में

- उज्जैन संभाग में किसान कम हैं, लेकिन रकबा प्रदेश के कुल रकबे 4,68,576 एकड़ में से 50 फीसदी से ज्यादा है।

- 59,073 किसानों ने रजिस्ट्रेशन करवाया, सबसे ज्यादा मंडला में 4612 किसान करीब 13000 एकड़ में खेती करेंगे।
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जैविक-प्राकृतिक में अंतर

विशेषज्ञों के अनुसार, जैविक खेती की उत्पादन लागत ज्यादा है। खाद महंगी होती है। प्राकृतिक खेती घरेलू संसाधनों से की जा सकती है। इसके लिए देसी गाय जरूरी है, क्योंकि इसमें गाय के गोबर, गोमूत्र व पत्तियों से बनने वाली खाद व दवाइयों का उपयोग किया जाता है।
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प्राकृतिक खेती का फायदा

- रसायन फ्री अनाज व उत्पाद मिलते हैं। - खेती की लागत कम होती है। - फर्टिलाइजर में कमी से विदेशी मुद्रा की बचत होगी। किसानों को ज्यादा सुविधाएं दी जा सकेंगी। - फसल की गुणवत्ता बढ़ने से लोगों का स्वास्थ्य बेहतर होगा।
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संभाग के हाल

जिला किसान रकबा (एकड़ में)

बड़वानी 2130 5094

खरगोन 2052 7768

इंदौर 1567 3276

आलीराजपुर 1389 3312

खंडवा 1277 7184

झाबुआ 959 9025
धार 836 2729

बुरहानपुर 684 1899

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