सालाना 25 करोड़ रुपए स्कूलों की बेहतरी के लिए निगम को देती है जनता

शिक्षा उपकर के लिए मिलती है बड़ी राशि, फिर भी स्कूल जर्जर

By: नितेश pal

Published: 20 Jul 2018, 06:00 AM IST

इंदौर.
शहर के गरीब विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा मिल सके, उन्हें पढऩे के लिए अच्छे स्कूल मिल सकें इसके लिए शहर की जनता हर साल 25 करोड़ रुपए नगर निगम को देती है। ये राशि जनता नगर निगम को बतौर शिक्षा उपकर, संपंत्तिकर के साथ देती है, इतनी राशि आने के बाद भी शहर में स्कूलों की हालत बदतर है। शहर के 22 सरकारी स्कूल जहां पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं, वहीं 22 स्कूल ऐसे हैं जिनकी हालत खराब है।
शहर में 423 सरकारी स्कूलों की बिल्ंिडग और उसकी देखरेख के साथ ही उसमें बिजली, पानी और सफाई की व्यवस्था का जिम्मा नगर निगम के पास है। इसके लिए आवश्यक राशि नगर निगम शिक्षा उपकर के जरिए जनता से जुटाती है। निगम सीमा में आने वाली संपंत्तियों पर जो मूल संपंत्तिकर होता है, उसका 50 फिसदी निगम संपंत्तिकर वसूलता है। निगम को हर साल 25 करोड़ की राशि शिक्षा उपकर के तौर पर मिलती है, उसके बाद भी शहर में मौजूद स्कूलों के 10 फिसदी स्कूल बूरी हालत में है।
शिक्षा का पैसा शिक्षा में नहीं होता खर्चा
शिक्षा उपकर का पैसा वैसे तो नियमों के हिसाब से शैक्षणिक संस्थाओं को सही करने में खर्चा होना चाहिए। लेकिन हालत ये है कि इसका अलग से अकाउंट नहीं है, जिसके कारण निगम के अफसर इस मद में आने वाले पैसों को अपने हिसाब से ही खर्चा कर देते हैं। जिसके कारण स्कूलों का सही तरीके से रखरखाव नहीं होता है। पिछले दो सालों में अभी तक एक दर्जन स्कूलों को पूरी तरह से नया बनाया गया है।
पैसों के अभाव में नहीं शुरू हो पाए 10 करोड़ के काम
हालत ये है कि नगर निगम ने पिछले दिनों शहर के विभिन्न स्कूलों जिनमें पंचशीलनगर स्कूल, संगमनगर स्कूल, अहिरखेड़ी स्कूल, नंदानगर स्कूल के टेंडर तो जारी कर दिए, लेकिन इनके ठेकेदारों को निगम से पैसा जारी नहीं होने के कारण इनका काम अटका हुआ है।
पहले था अलग विभाग
नगर निगम में पहले शिक्षा समिति का विभाग अलग था, उसमें स्कूलों से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं की जाती थी। लेकिन उस समय भी इसे खर्चा जनकार्य विभाग के जरिए ही किया जाता था। उस समय से ही ये मांग उठती रही थी कि इस विभाग के जरिए ही टेंडर जारी कर निर्माण काम करवाए जाएं। लेकिन इसके उल्ट सरकार ने 2016 में एमआईसी के जो नए विभाग बनाए उसमें शिक्षा समिति को जनकार्य समिति में ही शामिल कर दिया। अब इसका बजट भी इसी विभाग में शामिल कर दिया गया है। जिसके कारण अब स्कूलों के लिए अलग से कोई व्यवस्था ही नहीं बची है।
स्वच्छ भारत मिशन में बनाए शौचालय
नगर निगम ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत ही पिछले दो सालों में लगभग 250 स्कूलों में शौचालय, कचरा निपटान, पेयजल आदि की व्यवस्था की थी। इसके साथ ही इन स्कूलों की रंगाई-पुताई भी स्वच्छ भारत मिशन के तहत की गई थी।
0 हमारे द्वारा स्कूलों पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। कई स्कूलों को पूरी तरह से बनाया गया है। वहीं कई स्कूलों में अतिरिक्त कक्षाओं सहित अन्य निर्माण काम करवाए जा रहे हैं। जिन स्कूलों में आवश्यक्ता लगती है, हम उन स्कूलों पर समय-समय पर काम करवाते रहते हैं।
- देवेंद्रसिंह, अपर आयुक्त,नगर निगम

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