लड़कियां फुटबाल में दे रही लडक़ों को मात

लड़कियां फुटबाल में दे रही लडक़ों को मात

Shailedra Shirsath | Publish: Aug, 12 2018 10:18:34 PM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

डे-बोर्डिंग योजना में होंगी शामिल
-हाई स्कूल स्टेडियम में बालिकाओं को भी फुटबॉल के प्रशिक्षण की तैयारी

डॉ. आंबेडकर नगर(महू). हाई स्कूल स्टेडियम में फुटबॉल के ट्रायल में रविवार सुबह इंदौर सहित शहर से २७ बालिकाएं पहुंचीं। जिन्होंने मैदान पर फुटबॉल के हुनर दिखाए। जिन्हें भविष्य में फुटबॉल प्रशिक्षण की डे-बोर्डिंग स्कीम में शामिल कर ट्रेनिंग दी जाएगी।
यहां फुटबॉल के ट्रायल के लिए आई बालिकाओं से जब चर्चा की तो उन्होंने बताया, हम में फुटबॉल के प्रति जुनून है और इस खेल में अलग मुकाम बनाने की तमन्ना है। यहां अंडर १४, १७ व १९ का बालिकाओं ने ट्रॉयल दिए, जिन्हें कोच द्वारा फुटबॉल के गुर सिखाए। इंदौर से ६ बालिकाएं यहां आईं। खेल अधिकारी जोसेफ बाकला ने बताया, दो अगस्त को खेल एवं युवक कल्याण विभाग के डायरेक्टर ने यहां निरीक्षण किया था। उनकी मंशा थी कि यहां बालकों के साथ बालिकाओं को भी फुटबॉल का प्रशिक्षण दिया जाए। जिसके लिए ट्रायल रखे गए। जो आगे भी जारी रहेंगे। इसके बाद भोपाल में डे-बोर्डिंग योजना में बालिकाओं को भी शामिल करने का प्रपोजल भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद अलग-अलग आयु वर्ग में करीब ४० बालिकाओं को भी डे-बोर्डिंग योजना में शामिल किया जाएगा। खास बात है कि दो साल पहले यहां फुटबॉल प्रशिक्षण की डे-बोर्डिंग योजना के तहत सिर्फ चुने हुए बालकों को ही प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

मैं फुटबॉल में कॅरियर बनाना चाहती हूं-
मैं मूल रूप से मिजोरम की रहने वाली हूं और पापा यहां आर्मी में पदस्थ हैं। मैंने स्कूल में ही फुटबॉल खेलना शुरू किया था। जिसके बाद मेरी हॉबी ही फुटबॉल हो गई। मैं फुटबॉल में अपना कॅरियर बनाना चाहती हूं।

-मिमि लालमानपुई
फुटबॉल में पहचान बनाना चाहती हूं-

स्कूल में फुटबॉल खेलना शुरू किया था, तब मुझे पता भी नहीं था कि लड़कियां भी फुटबॉल खेल सकती हैं। लेकिन दूसरी लड़कियों को देखकर खुद में भी यह हुनर आया। मैं अब अपने हुनर से ही अपनी पहचान बनाना चाहती हूं। -पूर्णिमा कुसरे
फुटबॉल के अलावा अब कुछ दिखाई नहीं देता

मुझे फुटबॉल के अलावा अब कुछ दिखाई ही नहीं देता है। जब मुझे पता चला कि महू में इसके लिए प्रशिक्षण शिविर लगाया तो मैं इंदौर से यहां चली आई। मैं पिछले तीन सालों से फुटबॉल खेल रही हूं।
-अनाया

फुटबॉल का जुनून सवार हुआ
फुटबॉल से मुझे अनुशासन सीखने को मिला है। मैं मप्र की अंडर-१४ टीम में भी खेल चुकी हूं। जब पहली बार फुटबॉल खेला था, तभी से मेरे अंदर फुटबॉल का जूनून सवार हो गया। मैं इंदौर से यहां प्रशिक्षण के लिए आई हूं। -यशस्वी शर्मा

फोटो-१३०७: टॉयल के दौरान मैदान पर फुटबॉल खेलती बालिकाएं।
फोटो- पासपोर्ट साइज फोटो नाम से भेजे हैं, कृपया लगाएं।

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