425 बिल्डिंगें खतरनाक, छह माह में एक पर भी कार्रवाई नहीं

सूरत में कोचिंग क्लास में आग के बाद हुई थी जांच

By: Kamlesh Pandey

Updated: 08 Dec 2019, 11:17 PM IST

नहीं मिले थे आग से बचाव के साधन

इंदौर.
छह माह पहले सूरत में कोचिंग क्लासेस में लगी आग में छात्रों की मौत के बाद इंदौर में भी नगर निगम ने 12 मीटर से ऊंची सभी बिल्डिंगों में जांच शुरू की थी। 425 से ज्यादा बिल्डिंगों को अग्नि सुरक्षा के साधनों से विहीन पाया था, लेकिन इनमें से एक पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

निगम को पहले जांच में 124 कोचिंग क्लासेस और शैक्षणिक संस्थान में अग्नि सुरक्षा के साधन नहीं मिले थे। इन पर कार्रवाई शुरू होते ही मंत्री जीतू पटवारी की मध्यस्ता के चलते रुक गई थी। इसके बाद निगम ने शहर में लगातार बिल्डिंगों में आग की घटनाओं के बाद 12 मीटर से ऊंची (चार मंजिला) बिल्डिंगों मे अग्निरोधक साधनों और अग्निकांड में बचाव की स्थिति का निरीक्षण किया था। इसमें लगभग 425 से ज्यादा बिल्डिंगों में सुरक्षा व्यवस्था नहीं मिली। एक माह पहले निगम ने इन बिल्डिंगों को 45 दिनों में फायर एनओसी लेने के निर्देश देने के साथ शहर के 14 फायर कंसल्टेंट के नंबर जारी किए थे। इनके द्वारा अग्नि सुरक्षा प्लान बनाकर उसके हिसाब से फायर एनओसी के लिए आवेदन किया जाना था। ये समयसीमा 20 दिसंबर को पूरी हो रही है। इसके बावजूद निगम ने अभी तक ऐसी बिल्डिंगों की पड़ताल शुरू नहीं की।
हर बार केवल जांच

नगर निगम आग के हिसाब से बिल्डिंगों को सुरक्षित करने के लिए कई बार जांच पर ही आकर अटक जाता है। दरअसल इंदौर में अधिकांश बिल्डिंग मालिकों के सीधे संबंध सत्ताधारी और विपक्षी पार्टी दोनों के नेताओं से हैं। अफसरों से भी ये सीधे संपर्क में रहते हैं। इसके कारण फायर सेफ्टी नियमों का पालन करवाने के बजाय मामला दबाने में सभी जुट जाते हैं। जनता की सुरक्षा का ये अहम मुद्दा बगैर कार्रवाई खत्म हो जाता है।
निगम की बिल्डिंग भी थी खतरनाक

निगम ने अपनी बिल्डिंग की फायर सेफ्टी के हिसाब से जांच करवाई थी। इसमें कई विभागों में फायर सेफ्टी के साधन नहीं मिले थे। फिर निगम ने यहां 100 से ज्यादा अग्निशमन यंत्र लगाए थे। हालांकि अभी तक निगम की बिल्डिंग को भी एनओसी नहीं मिली है।
तंग गलियों में भी मार्केट, अतिक्रमण

इंदौर के मध्य क्षेत्र में तंग आवासीय गलियों में बड़ी बिल्डिंगों के साथ मार्केट भी बन गए हैं। इनमें सराफा, कुंवर मंडली, लोधी मोहल्ला, सुतार गली, नई बागड़ रानीपुरा, पुरानी बागड़ नयापुरा, दौलतगंज, इमली बाजार, पीर गली, कोयला बाखल जैसे इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों में एमओएस की जगह कब्जे के साथ बाहर की ओर निकाली गई हैंगिंग के कारण सडक़ें संकरी होती जा रही हैं। छोटे वाहन ही बमुश्किल आ पाते हैं, फायर ब्रिगेड के वाहन नहीं आ पाते। ऐसे में किसी भी दिन बड़ी घटना हो सकती है।
मारोठिया में हुए हादसे से भी नहीं ले रहे सबक

तीन साल पहले मारोठिया बाजार में ऋषभचंद जैन एंड कंपनी में आग लग गई थी। इसे बुझाने में फायर ब्रिगेड को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा था। आसपास लकड़ी के घरों के साथ ही गाडिय़ों के आने-जाने के लिए जगह नहीं होने से निगम के टैंकर समय पर फायर ब्रिगेड की गाडिय़ों को पानी भी नहीं सप्लाय कर पाए थे। हालांकि आग रात में लगने से कोई जनहानि नहीं हुई थी, लेकिन बड़ा हादसा हो सकता था।
वर्जन...

सभी बिल्डिंगों को 20 दिसंबर तक फायर एनओसी लेने के निर्देश दिए हैं। उसके बाद भी यदि कोई आवेदन नहीं करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।
-ओपी गोयल, भवन अधिकारी मुख्यालय, नगर निगम

Kamlesh Pandey
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