14 साल की मानसी दुबे ने एकसाथ प्रेजेंट की 8 तरह की डांस फॉर्म

मानसी जब 6 साल की तब से भरतनाट्यम की शिक्षा ले रही है और उसकी अरंगेत्रम सेरेमनी हमने इंदौर में की।

By: amit mandloi

Updated: 18 Aug 2017, 12:15 PM IST

इंदौर. ठुमक चलत रामचंद्र बाजे पैजनियां, किलकि किलकि उठत धाय गिरत भूमि लटपटाय, धाय मात गोद लेत दशरथ की रानियां, भगवान राम के बचपन में चलना सीखने की क हानी कहते हैं, इस गीत में अपने आंखों और चेहरे के अद्भुत भाव से मन मोह लेने वाली प्रस्तुति रवींद्र नाट्यगृह में प्रस्तुत की गई। रवींद्र नाट्य ग्रह में मानसी दुबे की भरतनाट्यम अरंगेत्रम सेरेमनी का आयोजन किया था, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में क्लासिकल डांसर रागिनी मक्खर और विशेष अतिथि के रूप में वैशाली कशिकर बाकोरे उपस्थित रहीं।

6 साल से सीख रही हैं भरतनाट्यम
मानसी दुबे के पापा विनय दुबे ने बताया, मानसी ने न्यूजर्सी में अपनी टीचर लावण्या महादेवन अय्यर से भरतनाट्यम सीखा। मानसी जब 6 साल की तब से भरतनाट्यम की शिक्षा ले रही है और उसकी अरंगेत्रम सेरेमनी हमने इंदौर में की।

अरंगेत्रम सेरेमनी के बारें में बात करते हुए वे कहते है, यूएसए में जब स्टूडेंट जब डांस को पूरी तरह सीख लेता है तो उसके बाद उसे अपने गुरु के सामने अपनी शिक्षा को प्रदर्शित करता है, जिसे देखने के बाद गुरु उन्हें बताता है, आपने सब कुछ सीख लिया है और अब कला को प्रदर्शित कर सकते हैं।

भरतनाट्यम की 8 अलग-अलग विधा की प्रस्तुत
इस कार्यक्रम में मानसी ने शोकम मल्हारी, शक्ति कौतूम, जतिस्वरम, शब्दम, वर्णनम, पदम, थिलाना जैसे अलग-अलग तरह के नृत्य प्रस्तुत किए और कार्यक्रम के अंत में शोभा मुद्गल के गीत वंदे मातरम पर भी भरतनाट्यम में प्रस्तुति दी। पदम नृत्य में भगवान राम के चलने सिखाने के दौरान किस तरह वे ठुमक-ठुमक कर चलते हैं, पैरों की बजती पाजेब और माता कौशल्या के प्रेम को बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया है। वे बताते हैं, मानसी को अपने शहर और अपने लोगों के बीच डांस परफॉरमेंस देकर बहुत अच्छा लगा। न्यूजर्सी में मानसी अपने स्कूल में कोरियोग्राफर है और उसका ड्रीम है, वो एक सक्सेस फुल डायरेक्टर बनने का है।

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