script82 thousand are being spent every day on sterilization of dogs | कुत्तों की नसबंदी पर रोज खर्च हो रहे 82 हजार रुपए ज्यादा फिर भी तीन साल में बढ़े तीन गुना | Patrika News

कुत्तों की नसबंदी पर रोज खर्च हो रहे 82 हजार रुपए ज्यादा फिर भी तीन साल में बढ़े तीन गुना

- हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका में जानकारी की गई पेश

- एक कुत्ते की नसबंदी पर निगम चुकाता है 925 रुपए

- 2019 में थे 60 हजार आवारा कुत्ते, आज बढ़कर हो गई 1.75 लाख

इंदौर

Updated: January 05, 2022 03:32:14 pm

इंदौर. भोपाल में आवारा कुत्तों द्वारा एक मासूम को घायल करने के बाद इन्हें नियंत्रित करने को लेकर सख्ती पर चर्चा हो रही है। इंदौर में भी पिछले कुछ वर्षों में आवारा कुत्तों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। सात वर्षों में आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए नसबंदी पर 21 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। प्रतिवर्ष औसतन 3 करोड़ रुपए और रोज 82 हजार रुपए से ज्यादा खर्च कुत्तों की नसबंदी पर किया जा रहा है लेकिन कुत्तों की संख्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ रही है। कोरोना काल के दौरान भी इनकी संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। 2019 में करीब 60 हजार आवारा कुत्ते थे, जो अब बढ़कर 1.75 लाख हो गए हैं।कुत्तों की नसबंदी को लेकर पिछले सात साल में किए खर्च की जानकारी हाई कोर्ट में पेश की गई है। जनहित याचिका में पेश जानकारी सूचना के अधिकार में हासिल की गई है। कोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट भी पेश करने के आदेश दिए हैं। इस माह के अंत में याचिका पर सुनवाई होगी।
कुत्तों की नसबंदी पर रोज खर्च हो रहे 82 हजार रुपए ज्यादा फिर भी तीन साल में बढ़े तीन गुना
कुत्तों की नसबंदी पर रोज खर्च हो रहे 82 हजार रुपए ज्यादा फिर भी तीन साल में बढ़े तीन गुना
शेल्टर होम बनाने की मांग

नगर निगम की पूर्व नेता प्रतिपक्ष फौजिया शेख अलीम ने जनहित याचिका दायर कर आवारा कुत्तों की संख्या और हर दिन दर्जनों लोगों को शिकार बनाने की घटनाओं को नियंत्रित करने की मांग की है। कुत्तों की नसबंदी व्यवस्था पुख्ता करने सहित खुले स्थान पर शेल्टर होम्स (डॉक हाउस) बनाने की भी मांग है। शहर पांच साल से स्वच्छता में नंबर वन आ रहा है। जैसे शहर से आवारा गायों को हटाने के लिए सरकार ने गोशालाएं बनाईं, वैसे ही आवारा कुत्तों के लिए व्यवस्था हो। स्वच्छता के कारण आवारा कुत्तों को खाने को नहीं मिल रहा है। भूख के कारण उग्र हो रहे हैं और राह चलते लोगों को काट रहे हैं। डॉग लवर्स की कमेटी बने, जो व्यवस्था की निगरानी करे ताकि कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण किया जा सके।
एक कुत्ते पर 925 रुपए का खर्च

शहर में दो एनजीओ को छावनी और ट्रेंचिंग ग्राउंड पर नसबंदी करने की जिम्मेदारी दी है। कुत्ते की नसबंदी पर 925 रुपए का भुगतान संस्था को किया जा रहा है। सात साल में 21 करोड़ का भुगतान हो चुका है।

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