9 माह के बच्चे की सांस नली से निकाला एलईडी बल्ब का टुकड़ा

एमवायएच के डॉक्टरों ने डेढ़ घंटे में ऑपरेशन कर निकाला, फिलहाल बच्चा स्वस्थ

By: Hitendra Sharma

Published: 12 Feb 2021, 11:10 AM IST

इंदौर. एमवाय अस्पताल के डॉक्टरों ने जटिल ऑपरेशन कर 9 माह के बच्चे की जान बचाई है। करीब डेढ़ घंटे का ऑपरेशन कर बच्चे की श्वांस नली से एलईडी बल्ब का टुकड़ा निकाला गया। इसके फंसे होने से बच्चे का एक फेफड़ा काम करना बंद कर चुका था। चार दिन तक बच्चे को निजी अस्पताल में भर्ती किया हुआ था, जहां बीमारी समझ नहीं आने पर परिजन एमवाय में लेकर आए। यहां डॉक्टरों ने बच्चे का ऑपरेशन कर उसे नया जीवन दिया।

जानकारी के मुताबिक 9 माह के कार्तिक पिता जितेंद्र पाटिल निवासी भागीरथपुरा को अचानक अधिक खांसी और सांस लेने में थोड़ी तकलीफ होने लगी, जिसके लिए परिजन उसे पास के निजी क्लीनिक ले गए। 4 दिन उपचार के बाद ही मरीज को कोई आराम नहीं हुआ। स्थिति बिगड़ती देख गंभीर हालत में अस्पताल के नाक, कान, गला विभाग लेकर आए, जिसे तुरंत भर्ती कर के मरीज को ऑक्सीजन पर रखा गया एवं सिटी स्कैन कराया, जिसमें पता चला कि बच्चे के बाएं तरफ के फेफड़े के ऊपर सांस नली में कुछ सेफ्टीपिन जैसा फंसा हुआ है और बाया फेफड़ा पूरी तरह से बंद पड़ा है। गंभीर हालत देख बच्चे को तुरंत ऑपरेशन थिएटर ले गए। नाक, कान, गला विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आरके मूंदड़ा और डॉ. यामिनी गुप्ता के मार्गदर्शन में डॉ. जगराम वर्मा, डॉ. रश्मि पाल, डॉ. दीपाली सहित अन्य ने दूरबीन पद्धति द्वारा यह जटिल ऑपरेशन कर एलईडी बल्ब उसके तार सहित सफलता पूर्वक निकालने में कामयाब हुए।

पहली बार इतने छोटे बच्चे का ऑपरेशन
डॉ. जगराम वर्मा ने बताया एमवायएच में इतने छोटे बच्चे का इस तरह का ऑपरेशन पहली बार किया है क्योंकि 1 और 2 वर्ष के बच्चे सीताफल के बीज, (कॉइन) पैसे, ऑल पिन यह तो निगल लेते हैं लेकिन 9 माह के बच्चे के शरीर के अंदर इस तरहसे एलईडी बल्ब निकालने का पहली बार अनुभव हुआ।

 

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सिटी स्कैन में दिखे तार
9 माह के कार्तिक को अस्पताल लेकर आए थे, उस वक्त सीटी स्कैन करने पर एक बार में स्थिति क्लीयर नहीं हुई क्योंकि एलईडी बल्ब के ऊपर कांच लगा होता है और सिटी स्कैन में केवल तार दिखाई दे रहा था जिसके बाद दो या तीन बार सीटी स्कैन करने पर वह स्थिति साफ हुई। पहले डॉक्टर को लग रहा था कि यह ऑल पिन है लेकिन ऑल पिन के दोनों तरफ का हिस्सा इस तरह का नहीं हो सकता है। ऑपरेशन करने के बाद डॉक्टर भी खुद चकित रह गए। लगभग डेढ़ घंटे में 9 माह के बच्चे के शरीर से इस एलईडी बल्ब को निकाला गया है और बच्चे इस वक्त सुरक्षित और स्वस्थ है।

Hitendra Sharma
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