MP की जेलों में बदली सुरक्षा व्यवस्था, जानिए क्या है अहम फैसले

MP की जेलों में बदली सुरक्षा व्यवस्था, जानिए क्या है अहम फैसले
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भोपाल जेल कांड के बाद हो रहा बदलाव, अंग्रेजों के जमाने से लग रहे थे ताले


मनीष यादव @ इंदौर.
अंग्रेजों के जमाने से जेलों में इस्तेमाल हो रहे अलीगढ़ के ताले अब दिखाई नहीं देंगे। जेल मुख्यालय के एक आदेश के बाद इनकी खरीदी पर रोक लगने जा रही है।
बताया जाता है कि तालों की खरीदारी के अधिकार अब स्थानीय  स्तर पर दे दिए हैं। भोपाल जेल में सिमी के आतंकियों ने टूथब्रश से बैरक का ताला खोल लिया था और दीवार फांदकर भाग गए थे। इस वारदात के बाद जेल में इस्तेमाल हो रहे तालों को बदलने की मांग उठ रही थी।

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जेल के लिए अभी तक अलीगढ़ से ही ताले मंगवाए जाते हैं। इन तालों की विश्वसनीयता को लेकर अफसरों ने सवाल उठाए थे। वीडियो कॉन्फे्रंसिंग के दौरान हुई इस चर्चा के बाद डीजी संजय चौधरी ने इन तालों की खरीदी भोपाल मुख्यालय द्वारा नहीं करवाने का निर्णय लिया है। उन्होंने इसे लोकल परचेसिंग के माध्यम से खरीदने के लिए निर्देश दिए हैं। इसके तहत हर जेल अधीक्षक अपने हिसाब से ताला खरीदने के लिए स्वतंत्र रहेगा। डीजी संजय चौधरी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि तालों सहित बहुत सारे मामलों में हम स्थानीय स्तर पर खरीदी के अधिकार दे रहे हैं।

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एडवांस दिया जाता था ऑर्डर
अलीगढ़ से आने वाले तालों का ऑर्डर जेल मुख्यालय द्वारा दिया जाता था। इस ताले के खराब होने पर इसे सुधारने का नियम नहीं है। खराब ताले को नष्ट ही करना पड़ता था। संबंधित जेल अपने यहां पर खराब तालों की जानकारी जेल मुख्यालय को देता था और वह ऑर्डर देकर बुलाते थे। इसके बाद भोपाल जेल के माध्यम से इन तालों को दूसरी जेलों में भेजा जाता था।

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समय के साथ बदलते रहे
अलीगढ़ के ताले अंग्रेजों के जमाने से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। पहले यह ताले पीतल के बनाए जाते थे,  लेकिन साठ के दशक में पीतल के ताले आना बंद हो गए थे। इसके बाद 18 और 24 लीवर के ताले आते थे, जिन्हें दो से तीन बार चाबी घुमाकर बंद किया जाता था, लेकिन कुछ साल पहले यह भी आना बंद हो गए और एक बार में ही बंद होने वाले इस्तेमाल किए जा रहे हैं, लेकिन यह यह भी बंद हो जाएंगे।

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