scriptAfter spending 13 years and 4 months in jail, the youth acquitted | 13 साल 4 महीने जेल में गुजारने के बाद युवक बाइज्जत बरी | Patrika News

13 साल 4 महीने जेल में गुजारने के बाद युवक बाइज्जत बरी

हाई कोर्ट ने पलटा निचली अदालत का फैसला...

जेल जाने से पहले हुई थी सगाई, लड़की अब तक कर रही इंतजार, अब होगी शादी

 

इंदौर

Updated: January 19, 2022 09:17:31 pm

- उज्जैन में 2006 में हुई हत्या के मामले में फंसे युवक को मिला न्याय

इंदौर. जीवन के 13 साल चार महीने जेल में काटने को मजबूर उज्जैन के युवक को आखिरकार हाई कोर्ट से न्याय मिला। हाई कोर्ट ने निचली अदालत से मिली आजीवन कारावास की सजा को गलत माना। 12 सितंबर 2008 के फैसले को निरस्त कर हाई कोर्ट ने युवक को बाइज्जत बरी करने का आदेश दिया। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस सत्येंद्र कुमार सिंह की युगल पीठ ने उनके साथ दो अन्य आरोपी मनीष पिता रामप्रसाद और सुभाष वाडिया को भी बरी किया। दोनों जमानत पर थे। उज्जैन निवासी संजय मेहर जब जेल गए थे तब उनकी उम्र 28 साल थी। अब उम्र के 42वें पड़ाव पर हैं, तब जेल की चारदीवारी से बाहर आ रहे हैं। 2006 से 2008 के बीच संजय कुछ समय के लिए जेल में रहे। करीब 6 महीने जमानत पर बाहर रहने के बाद सिंतबर 2008 में आजीवन कैद की सजा के बाद से जेल में हे। उनके वकील धर्मेंद्र चेलावत ने बताया कि दिसंबर 2006 में हुए हत्याकांड से तीन महीने पहले संजय की सगाई हुई थी। जिस लड़की से सगाई हुई, वह आज भी अपने मंगेतर के जेल से बाहर आने का इंतजार कर रही है। संजय के जेल से बाहर आने के बाद दोनों शादी रचाएंगे। नया जीवन शुरू करेंगे।
13 साल 4 महीने जेल में गुजारने के बाद युवक बाइज्जत बरी
13 साल 4 महीने जेल में गुजारने के बाद युवक बाइज्जत बरी
यह है मामला

17 दिसंबर 2006 को उज्जैन के अशोक नगर रेलवे क्रॉसिंग के पास पान की दुकान पर राम उर्फ नीरज की हत्या हुई थी। उसके साथी महेंद्र और राहुल घायल हुए थे। हत्या के लिए पुलिस ने पहले संजय मेहर, मनीष और सुभाष को आरोपी बनाया। बाद में सात अन्य को भी आरोपी बनाया गया। 12 सितंबर 2008 को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने तीन आरोपियों को धारा 302 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सात लोगों को बरी कर दिया गया।
पलटा निचली अदालत का फैसला

हत्याकांड के बाद पुलिस द्वारा गवाहों के धारा 161 के बयान तीन महीने बाद लिए थे, जिससे जांच में संदेह साबित हुआ।पुलिस द्वारा दर्ज एफआइआर में शामिल कई बिंदु अव्यावहारिक थे।गवाहों के बयानों में भारी विरोधाभास। घटना में मृतक के अलावा दो अन्य घायल ही निचली कोर्ट में पक्षद्रोही हो गए थे। पांच प्रत्यक्षदर्शियों ने भी पुलिस की कहानी का कोर्ट में समर्थन नहीं किया था।

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