एम्स से मिलेगी मजदूर की बेटी उर्मिला को रोशनी

एम्स से मिलेगी मजदूर की बेटी उर्मिला को रोशनी

Amit S. Mandloi | Publish: Nov, 15 2017 06:02:25 PM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

जन्म से नहीं देखी मां की सूरत, सरकार मुफ्त कराएगी इलाज, प्राथमिक उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती

इंदौर.धार. जिसने जन्म लेने के बाद से आज तक जन्म देने वाली अपनी मां की सूरत नहीं देखी वह चार साल बाद सरकार की मदद से दुनिया का नजारा देख सकेगी। दरअसल, जामंदा गांव के दिलीप राठौड़ के घर ४ साल पहले जन्मी मासूम उर्मिला का उपचार अब दिल्ली के एम्स अस्पताल में होगा, जिसे कार्नियर ऑपेसिटी की बीमारी है। एक ऑपरेशन के बाद उसके आंखों की रोशनी लौट आने की उम्मीद है। फिलहाल बच्ची को प्राथमिक उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जो आंखों के साथ बुखार और पेट की बीमारी से ग्रसित है।

मंगलवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय पहुंचे दिलीप ने जब सीएमएचओ डॉ. आरसी पनिका से बच्ची के इलाज की गुहार लगाई तो उन्होंने तत्काल उसकी जांच कर दिल्ली के एम्स में ऑपरेशन का आश्वासन दिया। हालांकि मासूम पिछले ४-५ दिनों से बीमार है, जो केवल दूध पर जिंदा है के प्राथमिक उपचार के लिए उसे फिलहाल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां से ठीक होने के बाद उसे जांच के लिए एम्स भेजा जाएगा, जिसके आने-जाने का खर्च भी सरकार वहन करेगी। इसके अलावा जांच रिपोर्ट व ऑपरेशन पर होने वाले खर्च का इस्टिमेट मिलने पर मुख्यमंत्री राज्य बीमारी योजना से इसका उपचार कराया जाएगा। दिलीप काफी गरीब हैं और मजूदरी कर वह परिवार को पालता हैं, लेकिन उसे अपनी बेटी से इतना प्यार हैं कि वह इसके लिए कुछ भी करने को तैयार हैं।

सफल होते हैं ऐसे ऑपरेशन
सीएमएचओ डॉ. पनिका की मानें तो आंखों के उपचार के लिए दिल्ली का एम्स अस्पताल सबसे उम्दा है। पनिका का कहना है कि इसे कार्नियर ऑपेसिटी कहते हैं, जिसमें जन्म के बाद या उसके साथ ही आंखों की रोशनी चली जाती है। इसके लिए एक ऑपरेशन होता है, देशभर में अब तक जिसकी सफलता के परिणाम ९५ फीसदी से अधिक बताए जा रहे हैं। वैसे यह बीमारी महज ०.५ प्रतिशत मरीजों में ही देखी गई है, जो दुर्लभ प्रकरणों में गिनी जाती है।

पहले जांच होगी
बच्ची को उसके पिता आए लेकर थे, जिन्हें जांच के लिए दिल्ली ले जाने को कहा है। हालांकि अभी बच्ची बुखार ग्रस्त है, जिसे जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है। इसके बाद दिल्ली के एम्स अस्पताल में इसकी जांच होगी और सरकारी खर्च पर इसका ऑपरेशन कराया जाएगा। -डॉ. आरसी पनिका, सीएमएचओ, धार

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