Air Pollution - हवा में घुल रहा जहर, विभाग का दावा सिर्फ दोगुना प्रदूषण

air pollution in indore - देश के सबसे स्वच्छ शहर की हवा के दो सच, जनता लैब ने पाया 5 गुना तक ‘जहर’, विभाग का दावा सिर्फ दोगुना प्रदूषण

इंदौर. देश के सबसे स्वच्छ शहर की हवा को लेकर गुरुवार को दो सच सामने आए। विकास मित्र-2050 के साथ भोपाल की जनता लैब ने 22 से ज्यादा स्थानों पर हवा की गुणवत्ता जांची, जिसमें धूल कण पीएम-10 मानक स्तर से तीन से पांच गुना तक और खतरनाक पीएम-2.5 दोगुने पाए गए। जांचकर्ता ने इसके लिए वाहनों की बढ़ती संख्या को जिम्मेदार ठहराया।

दूसरी ओर प्रदूषण विभाग ने सघन ट्रैफिक क्षेत्र रीगल तिराहे पर मिले आंकड़ों को देखा तो पीएम-10 डेढ़ गुना और गुरुवार सुबह 9 बजे से भोपाल जनता लैब की टीम के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. सुभाष पांडे, विकास मित्र 2050 के किशोर कोडवानी के साथ शहर की आबोहवा जांचने निकले। टीम सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे के बीच 22 स्थानों पर पहुंची और डिजिटल एयर क्लालिटी मीटर से हवा की गुणवत्ता मापी। टीम का आरोप है, विभागीय प्रदूषण डिस्प्ले बोर्ड बंद मिले, जबकि विभाग का कहना है, चार स्थान पर बोर्ड चालू हैं।

 

सांवेर रोड पर सबसे ज्यादा प्रदूषण 

सांवेर रोड औद्योगिक क्षेत्र में पांच गुना तक प्रदूषण मिला। पश्चिम क्षेत्र में कालानी नगर और चंदन नगर के भी यही हाल रहे। मध्य क्षेत्र में दोपहर में तीन गुना जबकि शाम को राजबाड़ा क्षेत्र में मानक से दोगुना प्रदूषण रहा। यहां पीएम-2.5 का बढऩा खतरनाक है।

बीमारियों की बढ़ेगी आशंका

पांडे का कहना है, जनता लैब की अवधारणा लोकोपयोगी क्षेत्रों में प्रदूषण और मिलावट का पता लगाना है। यदि यह स्थिति लगातार बनी रहेगी तो श्वसन संबंधी बीमारी और बाद में कैंसर की आशंका बढ़ती जाएगी। धूल के कण के साथ कार्बन-सल्फर के कण भी बढेंगे।

22 में से एक स्थान पर भी मानक स्तर नहीं

पांडे ने कहा, यह बहुत खतरनाक है कि देश के सबसे स्वच्छ शहर के 22 में से एक भी स्थान पर आबोहवा की गुणवत्ता मानक स्तर की नहीं मिली। पीएम-2.5 की अधिकता खतरे का संकेत दे रही है। हालांकि सडक़ों पर सफाई का असर दिखा लेकिन वाहनों की अधिकता से धूल और धुआं शहर की हवा बिगाड़ रही है। वाहनों में जलने वाले अवांछनीय आर्गेनिक तत्व हवा को ज्यादा खराब कर रहे हैं। आकलन की सबसे खतरनाक बात यह रही कि कई स्थानों पर नाइट्रोजन, सल्फर व कॉर्बन गैसों का असर दिखा है।

आवासीय क्षेत्रों में प्रदूषण बढऩा अच्छे संकेत नहीं हैं। मंत्रियों के कहने के बावजूद प्रशासन ने प्रदूषण विभाग से शहर की आबोहवा की गुणवत्ता का मापन नहीं कराया तो भोपाल से जनता लैब को बुलाना पड़ा। टीम के साथ टेक्निशियन अभय वर्मा, महेश वर्मा, मुकेश अग्रवाल, राजवीर सिंह होरा पूरे समय साथ रहे।
- किशोर कोडवानी, विकास मित्र-2050

जनता लैब के आंकड़े

समय__________क्षेत्र__________पीएम-10__________पीएम-2.5
09.05__________नौलखा__________198__________87
09.15__________भंवरकुआं__________215 __________133
9.30__________राजीव प्रतिमा __________130__________80
09.50__________फूटी कोठी__________234__________114
10.15__________महू नाका__________109__________73
10.30__________गंगवाल__________137__________76
10.50__________चंदन नगर__________404__________193
11.05__________कालानी नगर__________503__________102
12.05__________बड़ा गणपति__________306__________93
12.30__________सांवेर रोड__________365__________79
12.40__________इंडस्ट्री एरिया__________569__________94
01.00__________भागीरथपुरा__________210__________64
01.20__________पाटनीपुरा__________138__________63
01.35__________रसोमा चौराहा__________137__________99
01.50__________गीता भवन__________140__________75
02.00__________नेहरू प्रतिमा__________179__________76
02.40__________छावनी__________148__________107
02.52__________अग्रसेन__________113__________82
04.20__________गांधी प्रतिमा__________284__________114
04.05__________हाथी पाला__________145__________122
04.50__________एमजी रोड__________80__________60
04.55__________राजबाड़ा__________168__________120
(यशवंत रोड, आड़ा बाजार)
अधिकतम सीमा
पीएम-10 : 100 माइक्रो घन मीटर
पीएम-2.5 : 60 माइक्रो घन मीटर

बढ़ते प्रदूषण से आंखों में रूखापन और सांस की तकलीफ बढ़ी

श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. सलील भार्गव ने बताया कि शहर में प्रदूषण के कारण लगातार मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इनमें आंखों की ड्रायनेस, सांस लेने में तकलीफ आदि परेशानी लेकर मरीज आ रहे हैं। सबसे ज्यादा असर अस्थमा के मरीजों पर हो रहा है। वाहन से निकलने वाले धुए में कॉर्बन मोनो आक्साइड निकलता है, जिससे फेफड़ों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है।

प्रदूषण से बचाव का एक ही तरीका है या तो ऐसे वाहनों को शहर की जद से बाहर कर दिया जाए, जो प्रदूषण फैला रहे हैं या फिर मास्क लगाना शुरू कर दें। डॉक्टरों के अनुसार जो लोग ज्यादा प्रदूषण वाले इलाके में रहते हैं, उनकी आंखें अक्सर लाल रहती हैं। आंखों मेंं जलन, पानी आने और खुजली के साथ ही ड्रायनेस की शिकायत रहती है। शहर में ऐसी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

प्रदूषण के कारण

जानकारी के अनुसर सिर के बाल से लेकर पैरों के नाखून तक पर प्रदूषण अपना असर छोड़ता है। वायु प्रदूषण के चलते जहरीले तत्व सांस में घुल कर शरीर में पहुंच रहे हैं। सांस लेने में तकलीफ होने लगे, सांस खींचने में जोर लगाना पड़े तो समझ जाएं कि आप प्रदूषण की गिरफ्त में हैं। आंखों से पानी आना, आंख में जलन और खुजली भी प्रदूषण के कारण ही होती है। गले में जलन महसूस होने लगे तो इसकी वजह प्रदूषण ही है।

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