सुबह दिखाई क्रिएटिविटी, शाम को देवलालीकर परिसर बचाने का संकल्प

प्रीतमलाल दुआ सभागृह के बगीचे में सुबह हरी घास पर बैठे कलाकार अपनी कलाकृति बनाने में तल्लीन थे।

इंदौर. कोई पेंटिंग कर रहा था, कोई स्कैचिंग तो कोई मिट्टी से मूर्तिशिल्प बना रहा था। कोई काष्ठ शिल्प ? बनाने में लगा था। ये सारे कलाकार फाइन आर्ट कॉलेज के पूर्व विद्यार्थी थे जो एलुमिनी मीट के दूसरे दिन कला शिविर मे अपनी रचनात्मकता में कुछ नया जोडऩे में जुटे थे। शाम को इन्होंने प्रीतमलाल दुआ सभागार की जमीन और देवलालीकर कला वीथिका को बचाने का संकल्प लिया।

कला शिविर का नजारा कुछ एेसा था कि अजय पुन्यासी शरद शबल को मॉडल बनाकर क्ले से उनका मूर्तिशिल्प बना रहे थे तो अजय पुन्यासी का स्केच बना रहे थे धीरेंद्र मांडगे। पास ही में प्रकाश पाटीदार धीरेंद्र मांडगे का क्ले से पोर्टे्रट बना रहे थे। डीएस मयूर ने लकड़ी से गणपति बनाए। सुजाता वैशंपायन जो कि संगीत में भी प्रवीण हैं, कुछ मधुर गीत गाकर सभी का उत्साहवर्धन कर रही थीं। बाद में कुछ और चित्रकारों ने भी गीत गाए।

लैंडस्केप का आनंद
कला शिविर में ज्यादातर कलाकारों ने लैंडस्केप बनाए। अमिता पांचाल ने तो तीन-चार सुंदर लैंडस्केप बनाए और कुछ स्कैच भी। सुरेश मालवीय, हेमंत दुबे और मनीषा दिघे ने जल रंगों में लैंडस्केप रचे तो मधु शर्मा ने पेंसिल स्कैच बनाए। १९६५ बैच के रामचंद मालवीय ने छोटी-छोटी पेपर शीट पर ऑइल कलर्स से खूबसूरत पेंटिंग्स बनाईं। परवेज अहमद ने भी ऑइल कलर्स में काम किया।

कला परिसर खत्म नहीं होने देंगे
शाम को सभी कलाकार सेंट्रल लाइब्रेरी- प्रीतमलाल दुआ परिसर के गेट पर जमा हुए और हाईकोर्ट के लिए परिसर की जमीन को अधिगृहीत करने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि शहर के बीच में इस कला परिसर को खत्म नहीं करने देंगे। इस छोटी सी सभा को अनिल कुमार धड़वइवाले और तपन भट्टाचार्य ने संबोधित किया। यहां से ये सभी कलाकार देवलालीकर कला वीथिका पहुंचे जहां कलागुरु और कॉलेज के संस्थापक डीडी देवलालकर की मूर्ति पर माल्यार्पण किया।

यहां ८४ बरस के पूर्व छात्र सूर्यनारायण आचार्य और औकांर सांगरे सहित कॉलेज के कुछ वर्तमान स्टूडेंट्स भी शामिल हुए। यहां परवेज अहमद, अखिलेश और अनिल कुमार धड़वइवाले ने संबोधित किया और सभी को संकल्प दिलवाया कि देवलालीकर कला वीथिका को टूटने नहीं देंगे। इस परिसर को बचाने के लिए आखिरी दम तक लड़ेंगे। धड़वइवाले ने कहा कि वीथिका की इमारत सौ बरस पुरानी है, इसलिए हेरिटेज है। साथ ही इस परिसर ने इतने बड़े कलाकार दिए हैं जिन्होंने देश-विदेश में इंदौर का नाम रोशन किया है।

अर्जुन रिछारिया Incharge
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