स्वच्छता में इंदौर को नंबर वन बनाने में केवल और केवल इनका था हाथ

जहां लोगों का साथ,वहां दिखा असर

इंदौर. स्वच्छ भारत अभियान में लगातार दूसरे साल नंबर वन बनने के लिए नगर निगम ने अपनी कोशिशों में कोई कसर नहीं छोड़ी और आखिर दोबारा हम नंबर वन बन गए। दौड़ में शामिल बाकी शहरों की ताकत पर नजर डालें तो इंदौर का पलड़ा जनभागीदारी व जागरूकता के कारण इस बार भी भारी था।हालांकि सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है, इसलिए निगम ने कुछ मामूली परिवर्तन भी कर लिए और हम 2018 में भी पहले पायदान बरकरार रहे।पत्रिका ने शहर में स्वच्छता को लेकर चल रहे कामों और मैदानी स्थिति का जायजा लिया। पहले चरण में पूर्वी शहर के नई बसाहट वाले हिस्से की हकीकत जानी, जहां अपेक्षाकृत जागरूक लोग रहते हैं, जो स्वच्छता को लेकर संजीदा हैं।

मैदानी हालात
कुछ बस्तियों को छोड़ दिया जाए, तो इस क्षेत्र में अधिकतर पॉश कॉलोनियां ही हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण में जब इंदौर को नंबर वन बनाने की बात आई तो यहां के रहवासियों ने इस काम में नगर निगम का भरपूर सहयोग किया। आज भी बात गीला-सूखा कचरा अलग-अलग करके डालने की बात हो या फिर शहर को साफ रखने की, यहां के बाशिंदों ने निगम का पूरा साथ दिया है। खासकर विजयनगर, स्कीम 54, स्कीम 74, स्कीम 140, महालक्ष्मी, तुलसी नगर, साईंकृपा, समर पार्क, कालिंदी कुंज, ब्रजेश्वरी जैसी कॉलोनियों ने सफाई के फार्मूले को पूरी तरह स्वीकार किया है। शहर की इन पॉश कॉलोनियों को कचरा मुक्त बनाने के लिए जैसे ही कचरा पेटियां हटाई गई, निगम ने १०० से ज्यादा कचरा वाहन डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए तैनात कर दिए।

सुधार की जरूरत
लोग निगम की व्यवस्था से खुश हैं। बस, कचरा गाडिय़ों की टाइमिंग का मसला आता है। लोग कहते हैं, कचरा गाड़ी सुबह 10 बजे तक आ जाए तो अच्छा है। कभी 11 बजे तो कभी दोपहर में दो या तीन बजे आती है। नौकरीपेशा घर से चले जाते हैं, जबकि ये बुजुर्गों के आराम करने का वक्त होता है। दूसरा मसला, वाहन चालक व कर्मचारी के व्यवहार का है। इसके लिए ट्रेनिंग दी जाना चाहिए।

ऐेसे काम कर रहा सिस्टम
इस हिस्से को नगर निगम ने 4 जोन में बांटा है। इनमें विजयनगर, स्कीम नं. 54, स्कीम 140 और साकेत नगर जोन शामिल हैं। इन सभी जोनों में क्षेत्र की जनसंख्या के हिसाब से करीब एक हजार से ज्यादा सफाईकर्मी सेवाएं दे रहे हैं।

 

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ऐसे बदली तस्वीर
महालक्ष्मी नगर के सामने खाली मैदान पर हमेशा कूड़े का ढेर लगा रहता था। अब यह ढेर गायब हो चुका है, वहीं वहां अब सार्वजनिक शौचालय का निर्माण करवाया है। घर-घर से कचरा उठाने की वजह से रहवासियों ने भी बाहर कचरा फेंकना बंद कर दिया है। कचरे के निपटान के लिए भी जगह-जगह कचरा ट्रांसफर स्टेशन बनाए हैं, जहां से कचरा इकट्ठा कर ट्रंेचिंग ग्राउंड पहुंचाया जा रहा है।

सफल हो गई कवायद, लोग बोले इस बार भी हम ही अव्वल
स्वच्छता अभियान में शहर को एक बार फिर से नंबर वन बनाने के लिए एक ओर जहां निगम ने पूरी जान लगा दी थी,वहीं दूसरी ओर जनता भी निगम कर्मचारियों का भरपूर साथ दे रही थी। जनता और निगम के बीच इस कोऑर्डिनेशन की बानगी तब देखने को मिली जब लोग निगम की तारीफ करते दिखाई दिए। शहर को नंबर वन बनाने की आशा से लबरेज लोगों ने स्वच्छता अभियान में अहम भूमिका निभाने की बात कही। रिटायर्ड डीएसपी और इंदौर नगर नगम स्वच्छता मिशन के ब्रांड एम्बेस्डर एनएस जादौन का कहना है, घर से कचरा उठाने वाली निगम की गाडिय़ां निर्धारित समय पर अपना काम कर रही हैं। साथ ही निगम कर्मचारी भी पूरी ताकत से लगे हुए हैं।

मिसाल कायम कर रहा है इंदौर
यूं तो स्वच्छता रैंकिंग में पहला स्थान हासिल कर इंदौर टू और थ्री टीयर शहर के लिए एक बड़ा कॉम्पीटीटर है, लेकिन अब इंदौर दूसरी बार यह खिताब हासिल करने के बाद तो वह अन्य शहरों के लिए मिसाल कायम कर चुका है।

पहले से ज्यादा जागरूक हुए लोग
स्वच्छता को लेकर चलाए जाने वाले अभियानों का रहवासियों पर खासा असर पड़ा है। लोग जागरुक हो गए हैं। पॉलीथिन का उपयोग कम करके जहां दुकानदार निगम को पूरा सपोर्ट कर रहे हैं, वहींं व्यापारी वर्ग में भी खासी जागरूकता देखने को मिल रही है।

कैसे बना नंबर वन
एनएस जादौन का कहना है "अगर शहर को नंबर वन बनाना है, तो इसके लिए लोगों को और जागरूक होने की जरूरत है। उन्होंने बताया, मैं स्वयं जाकर विभिन्न गार्डन्स में लोगों को जागरुकता के लिए कहता हूं।"

थोड़ी शिकायत भी
हालांकि ऐसा नहीं है निगम और शहर की जनता एक दूसरे से पूरी तरह संतुष्ट हों, क्योंकि दोनों को एक दूसरे से कुछ शिकायतें भी हैं। मसलन एक ओर जहां जनता का कहना है, ज्यादातर कचरा गाडिय़ां निर्धारित समय पर नहीं आतीं वहीं कचरा गाडिय़ों ड्राईवर्स का कहना है कि शहर में चंद लोग हैं जो समझाने के बाद भी कचरा बाहर फेंक देते हैं।

आ रहा बदलाव
पिछले साल की अपेक्षा इस बार लोगों के बीच काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। पिछले साल जहां लोग डस्टबिन को उतनी प्राथमिकता नहीं देते थे, वहीं इस बार लगभग हर घर में डस्टबिन देखा जा सकता है। जिन घरों में डस्टबिन नहीं हैं, वहां लोग पॉलीथिन या अन्य चीजों में कचरे को इकट्ठा कर कचरा कलेक्शन करने वाली गाडिय़ों में कचरा डाल रहे हैं।

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ये कहते हैं लोग
"कचरा गाडिय़ां कई बार समय पर नहीं आतीं अगर इनका टाइम टेबल फिक्स हो जाए तो बहुत अच्छा हो।"
शालू मेहता, गृहिणी

"पिछले साल की अपेक्षा इस बार अच्छे काम हो रहे हैं। यही जज्बा कायम रखते हुए शहर एक बार फिर अव्व्ल बना है।"
विमला जादौन, गृहिणी

"जागरुकता अभियान में दिए गए बैच से बच्चे भी इतने उत्साहित हैं कि वे भी सफाई पर पूरा ध्यान दे रहे हैं और कचरे को डस्टबिन में ही डालते हैं।"
चंद्रजीत जादौन, गृहिणी

"हम नगर निगम के प्रयासों से खुश हैं। "
सुनीता, गृहिणी

"शहर को स्वच्छ बनाने में हम पूरा प्रयास कर रहे है, लेकिन लोग अगर और जागरूक हो जाएं तो मजा आ जाए।"
सैयद अलीम, ड्राइवर

"जनता सपोर्ट कर रही है, लेकिन कुछ लोग लाख समझाने के बाद भी नहीं मानते, अगर शहर को और स्वच्छ बनाना है तो उन्हें समझना होगा।"
पवन चौहान, ड्राइवर

" पूर्वी क्षेत्र का ये हिस्सा सफाई के मामले में अन्य इलाकों की तुलना में आगे है। यहां लोगों के जागरूक होने का काफी फायदा हमें मिला है। गीले व सूखे कचरे को अलग-अलग डालने के साथ ही कचरे के उचित निपटान के लिए भी खासा योगदान दिया है। इसके अलावा विकासशील क्षेत्रों में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन सहित सफाई को लेकर उचित प्रबंध करना भी बेहद जरूरी है।"
अरशद वारसी , कंसल्टेंट, नगर निगम

" पूर्वी क्षेत्र में कुछ ही एेसे इलाके है, जहां सफाई को लेकर ध्यान देने की जरूरत है। इनमें निरंजनपुर क्षेत्र के ग्रामीण इलाके साथ ही नगरीय सीमा में शामिल हुए 29 गांव में से कुछ गांव हैं। क्षेत्र में अधिकतर इलाके नवविकसित होने की वजह से कचरा संग्रहण को लेकर विस्तृत प्लान बनाकर काम करना जरूरी है। खासकर उन ग्रामीण क्षेत्रों में जो अब नगर निगम क्षेत्र से जुड़ चुके हैं।"
अतुल सेठ, ऑर्किटेक्ट

अर्जुन रिछारिया Incharge
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