भय्यू महाराज की मौत के बाद क्यों छिपा रहा यह राज, खड़े हुए सवाल

- परिजनों के हुए थे बारी- बारी से बयान पर सामने नहीं आईथी यह बात

- सामान्य पूछताछ के बाद युवती से नहीं हुई पूछताछ

By: Lakhan Sharma

Published: 19 Jan 2019, 10:36 AM IST

 

इंदौर।
भय्यू महाराज की आत्महत्या मामले में सच सामने आने और पुलिस द्वारा संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। महाराज की आत्महत्या के ७ माह बाद, तीन जांच अधिकारियों के बदलने के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है। सवाल यह उठ रहा है कि आत्महत्या के समय जब इन लोगों से पूछताछ की गई थी तब सच सामने क्यों नहीं आ पाया था। दरअसल तब महाराज के करीबियों ने ही पूरे मामले पर पर्दा डाल दिया था। महाराज के परिजन और खास सेवादारों ने पुलिस को उक्त युवती के द्वारा ब्लेकमेलिंग किए जाने की बात नहीं बताई थी और महाराज की पत्नी आयुषी और बेटी के कुहु के विवाद की बात हर कोई दोहरा रहा था। इसी के चलते जंाच दबी रही और मामले में पहले जांच अधिकारी मनोज रत्नाकर चुनाव के चलते ट्रांसफर हो गया।

ब्लेकमेलर ने खोला ब्लेकमेलिंग का राज

दरअसल पिछले दिनों भय्यू महाराज के परिचित वकील से ५ करोड़ रुपए की फिरौती मांग कर ब्लेकमेल करने का आरोप उनके पूर्व ड्रायवर कैलाश पाटिल व साथियों पर लगा था। पुलिस ने जब उन्हें गिरफ्तार किया तो कैलाश ने विनायक, युवती पलक पुराणिक, व शरद पर महाराज को ब्लेकमेल करने के आरोप लगाए। इसके बाद पुलिस ने शुरू से मामले की जांच शुरू की। वकील निवेश बडज़ात्या ने पुलिस में इसकी शिकायत की थी। कहना था कि आरोपितों ने १० दिसंबर को ५ करोड़ रुपए की फिरौती मांगी और न देने पर जान से मारने की धमकी दी। आरोपितों ने वकील पर भय्यू महाराज का पैसा होने की शंका के चलते फिरौती मांगी थी। जब आरोपित पकड़ाए तो महाराज की आत्महत्या मामले में नए सिरे से जांच शुरू हुई।

- जांच की दिशा बदली
मामले में सीएसपी मनोज रत्नाकर के जाने के बाद जांच आईपीएस अगम जैन को दी गई। लेकिन वह ठंड़े बस्ते में ही चलती रही। ड्रायवर कैलाश पाटिल के खुलासे के बाद सीएसपी अगम जैन ने युवती पलक, विनायक, शरद, महाराज की बहनें, पत्नी आयुषी व अन्य को नोटिस देकर बयान के लिए बुलाया। युवती पर सभी के द्वारा ब्लेकमेलिंग के आरोप लगाए गए तो उसके मोबाइल की जांच करवाई गई, जिसके बाद सच सामने आया। इसके बाद जांच डीएसपी पल्लवी शुक्ला के पास आई तो उन्होंने इस पर बारीकी से अध्ययन कर, पलक पुराणिक, विनायक दुधाले और शरद को महाराज की मौत के लिए जिम्मेदार माना।

Lakhan Sharma
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