बड़ी खबर : सोना सस्ता करने की कवायद, जल्द हो सकता है फैसला

सौ रुपए किग्रा तक के बिस्किट्स को 12 प्रतिशत जीएसटी स्लैब में लाने की तैयारी

By: हुसैन अली

Published: 07 Jan 2019, 09:19 AM IST

इंदौर. जीएसटी व नोटबंदी के राजनीतिक इफेक्ट के बाद सरकार आगामी लोकसभा चुनावों से पहले अनेक तरह की राहत देने की तैयारियां की जा रही हैं। इसीलिए इस बार हर माह होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक तय समय से पहले 10 जनवरी को ही बुला ली गई है। सब कुछ ठीक रहा तो इसी बैठक में कुछ अहम फैसले हो सकते हैं। आम आदमी के बिस्किट के पैकेट का वजन बढ़ सकता है। क्योंकि काउंसिल 100 रुपए किलो से कम कीमत के बिस्किट को 18 से 12 प्रतिशत के स्लैब में लाने पर विचार कर सकती है। इसके लिए देशभर के बिस्किट निर्माता भी पूरा जोर लगा रहे हैं। इसी तरह सीमेंट व घर बुकिंग के समय जीएसटी की दरें कम करने पर फैसला हो सकता है।
देश में एक कर व्यवस्था के तहत जीएसटी लागू किया गया है। इसमें प्रारंभिक तौर पर 28 अनेक वस्तुओं को 28 और 18 प्रतिशत की स्लैब में ले आया गया। जबकि इसमें अनेक वस्तुओं पर राज्य वैट पर छूट देकर आम आदमी को राहत दे देते थे। अब सारा मसला जीएसटी काउंसिल के हाथों में आने से राज्य मुश्किल में है। पिछली काउंसिल की बैठक में अनेक वस्तुओं को 28 प्रतिशत के स्लैब से बाहर किया था। इसी तरह कुछ दिन पहले जूते व कपड़े पर बाउंड्री स्लैब का प्रयोग किया गया था। बिस्किट और कन्फेक्शनरी कारोबारी लगातार इन वस्तुओं पर टैक्स कम करने की मांग कर रहे हैं। पिछली बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुइ थी, लेकिन कुछ बिंदुओं पर मामला अटक गया था। सूत्रों के अनुसार इस बार की बैठक में इस मामले पर विचार हो कर राहत मिल सकती है। क्योंकि बिस्किट हर वर्ग के लोगों की जरूरत है। अधिकांश बिस्किट 100 रुपए किलो की श्रेणी में आते हैं। वर्तमान में 18 प्रतिशत जीएसटी लिया जा रहा है।
यदि इसे कम किया गया तो आम श्रेणी के बिस्किट सस्ते हो सकते हैं। जानकारी के अनुसार काउंसिल ने एक चिठ्ठी जारी कर सभी समितियों को अपनी रिपोर्ट जल्दी भेजने का आग्रह किया था। हाल ही में कुछ समितियों के साथ तो बैठक हो कर प्रस्तावों पर चर्चा भी हो चुकी है, 10 जनवरी की बैठक के लिए प्रस्ताव भी तैयार किए जा रहे हैं। सबसे अहम मामला सीमेंट को 18 प्रतिशत की स्लैब में लाना और मकानों पर जीएसटी दरों की विसंगतियों को समाप्त करना है। इसके अलावा अनेक कानूनी और व्यावहारिक मसलों पर भी चर्चा होगी।

बाउंड्री टैक्स से राजस्व का नुकसान
वस्तुओं को बाउंड्री टैक्स की श्रेणी में लाने से राजस्व का नुकसान हो सकता है। सरकार ने इससे पहले जूतों और कपड़ों पर प्रयोग करते हुए 1000 रुपए की सीमा तय कर इससे उपर और कम पर जीएसटी की अलग-अलग दरें तय की है। इससे टैक्स अपवंचन के मामले बढ़ेंगे। क्योंकि दुकानदार कम दरों पर ही टैक्स चुकाएगा।

लोकल ब्रांड को मिलेगा फायदा
वर्तमान में कन्फेक्शनरी व बिस्किट में मल्टी नेशनल ब्रांड के बीच खासी प्रतिस्पर्धा है। जीएसटी की दरें अधिक होने से लोकल ब्रांड मुश्किल में आ गए है। 18 फीसदी जीएसटी देना पड़ रहा है। इसके इनग्रेडिंयट पर जीएसटी नहीं होने से आइटीसी भी नहीं मिलता। बड़े ब्रांड ने तो कीमतों को वजन से नियंत्रित कर लिया। छोटे के लिए मुश्किल आ गई। कन्फेक्शनरी एसो. के दिनेश चौधरी का कहना है, यदि सरकार एेसा निर्णय लेगी तो लोकल ब्रांड को राहत मिलेगी और वे प्रतिस्पर्धा में बनें रहेंगे।

हुसैन अली
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