विधान सभा चुनाव : बेटों पर दांव लगाने की तैयारी में भाजपा-कांग्रेस

विधान सभा चुनाव : बेटों पर दांव लगाने की तैयारी में भाजपा-कांग्रेस

Amit S. Mandloi | Publish: Oct, 14 2018 10:48:27 AM (IST) | Updated: Oct, 14 2018 10:48:28 AM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

राजनीति से खत्म हो परिवारवाद : अपने संपर्कों के जरिए राजनीति विरासत बढ़ाने की चाहत

प्रमोद मिश्रा @ इंदौर. विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों में दावेदार सक्रिय हो गए हैं। अपने-अपने क्षेत्रों को छोडक़र भोपाल, दिल्ली की यात्राएं कर ऊपरी संपर्कों को टटोल रहे हैं। कई नेता अपने बेटों को मैदान में लाना चाहते हैं। इंदौर के साथ ही आसपास के जिलों में यही स्थिति है, जिसमें पिता अपने पुराने कामों को गिनाते हुए बेटे को टिकट दिलाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं।

मंदार को लेकर फिर प्रयास में महाजन
लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन बेटे मंदार महाजन को लॉन्च करने में जुटी हैं। चुनाव नजदीक आता है तो अपने उत्तराधिकारी के रूप में मंदार का नाम आगे कर संभावना तलाशती हंै। इंदौर 3 से फिर मंदार के नाम को आगे बढ़ाया है। इच्छा है यहां नहीं तो किसी और सीट से बेटे को टिकट मिले।

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आकाश के लिए जमीन तैयार करे रहे कैलाश
कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश का नाम भी इस बार दावेदारों में है। कैलाश चाहते हैं, इंदौर 2 से बेटे को टिकट मिले। हालांंकि, मौजूदा विधायक रमेश मेंदोला को यहां से शिफ्ट करना मुश्किल है। ऐसे में वह महू सीट पर दांव चल सकते हैं।

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भतीजे के बाद बेटे को कर रहे आगे
कांग्रेस नेता महेश जोशी बेटे दीपक जोशी पिंटू को लेकर आशांवित हैं। उनकी नजर इंदौर 3 में है, जहां से उनके भतीजे अश्विन जोशी 3 बार विधायक रहे। पिछले चुनाव में मिली हार को देखते हुए अश्विन की जगह जोशी ने दीपक का नाम बढ़ाया है।

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गौड़ भी एकलव्य के लिए लगा रहीं जोर
महापौर मालिनी गौड़ इंदौर 4 से बेटे एकलव्य को विधायक देखना चाहती हैं। 2013 में मालिनी की इच्छा थी कि उनकी जगह बेटे को टिकट मिले, बात नहीं बनी। वे महापौर भी हैं, ऐसे में बेटे पर दांव लगाना चाहती हैं। बात नहीं बनी तो वे लड़ेंगी।

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भूरिया की चाह भी विक्रांत
कांग्रेस नेता कांतिलाल भूरिया बेटे विक्रांत की टिकट की संभावना भोपाल, दिल्ली में टटोल रहे हैं। पिछले चुनाव में भी विक्रांत का नाम आगे किया था, लेकिन सफलता नहीं मिली थी। दिल्ली हाई कमान से नजदीकियों का फायदा उठाते हुए इस बार फिर विक्रांत के नाम को आगे बढ़ाया जा रहा है।

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बेटे को टिकट दिलाने की चाह
देवास विधानसभा सीट पर तुकोजीराव पवार का दबदबा रहा। उनके निधन के बाद पत्नी गायत्री पवार विधायक बनीं। अब वह बेटे विक्रमसिंह पवार को आगे लाना चाहती हैं। वे बेटे को टिकट दिलाने के लिए भोपाल-दिल्ली में पहुंच का इस्तेमाल कर रही हैं। हत्या के मामले में बरी होने के बाद बेटे विक्रम की सक्रियता भी क्षेत्र में बढ़ी है।

 

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सांवेर सीट पर बेटे-भतीजे का जोर
सांवेर सीट प्रकाश सोनकर परिवार के आसपास घूमती रही है। सोनकर का निधन के बाद पत्नी चुनाव लड़ीं, पर जीत नहीं पाईं। प्रकाश के नजदीकी राजेश सोनकर यहां से विधायक बने। अब प्रकाश के बेटे विजय के साथ ही भतीजे सावन सोनकर ने फिर से टिकट के लिए दावेदारी ठोकी है।

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