Breaking : भाषण देते-देते भाजपा के दिग्गज नेता को हुआ ब्रेन हेमरेज, मंत्री की गाड़ी से लेकर पहुंचे अस्पताल

Breaking : भाषण देते-देते भाजपा के दिग्गज नेता को हुआ ब्रेन हेमरेज, मंत्री की गाड़ी से लेकर पहुंचे अस्पताल

amit mandloi | Publish: Sep, 08 2018 04:52:03 PM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

महू के वल्लभा गार्डन में भाजपा के पालक-संयोजकों की कार्यशाला में बिगड़ी तबीयत

डॉ. आंबेडकरनगर (महू). भाजपा जिला ग्रामीण के पालक-संयोजकों की कार्यशाला शनिवार को वल्लभा गार्डन में हुई। कार्यकर्ताओं व नेताओं से खचाखच भरे हाल में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य राधेश्याम यादव ने करीब आधे घंटे तक भाषण दिया और कुर्सी पर जाकर बैठे तो अचानक तबीयत बिगडऩे लगी। उनका हाथ नहीं उठ पा रहा था। ऐसे में हॉल में हलचल मची और गोद में उठाकर कार्यकर्ता उन्हें मंत्री दीपक जोशी के वाहन से नजदीक के निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टर राहुल मेवाड़ा ने ब्रेन हेमरेज होने की जानकारी नेताओं व कार्यकर्ताओं को दी। इस दौरान बड़ी संख्या में भाजपा नेता व कार्यकर्ता अस्पताल के बाहर जमा हुआ। यहां से उन्हें उपचार के लिए मेदांता अस्पताल इंदौर रैफर किया गया। खास बात है कि महू विधानसभा में भाजपा से राधेश्याम यादव टिकट के दावेदारों में शुमार हैं।

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14 मंडल के पदाधिकारी सहित बूथ लेवल के कार्यकर्ता हुए शामिल

कार्यशाला में भाजपा के 14 मंडल के अध्यक्ष सहित पदाधिकारी व बूथ स्तर के कार्यकर्ता व पालक व संयोजक शामिल हुए। इसमें दो सत्र हुए। पहले सत्र में भाजपा के जिला प्रभारी डॉ. तेज प्रतापसिंह व पूर्व विधायक जीतू जिरात ने बूथ मेनेजमेंट सहित विभिन्न विषयों पर संबोधित किए। दूसरे सत्र में तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री दीपक जोशी, राधेश्याम यादव व संभागीय संगठन मंत्री जसपालसिंह चावड़ा ने संबोधित किया।

एक वोट भी बदल सकता है चुनाव का परिणाम : दीपक जोशी

कार्यशाला के दौरान मंत्री दीपक जोशी ने कहा कि कार्यकर्ताओं को एक-एक वोट पर ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि एक वोट भी चुनाव परिणाम बदल सकता है। उन्होंने एक किस्सा सुनाते हुए बताया कि एक बार नगर निगम के चुनाव में मेरा एक कार्यकर्ता साथी आनंदनगर व रविशंकरनगर दो जगह का वोटर था। उसने मुझसे पूछा कि वोट कहां डालू तो हमने आनंदनगर के भाजपा प्रत्याशी से पूछा। उन्होंने कहा कि मैं तो जीतने वाला हूं, जुलूस की तैयारी है। हमने रविशंकर नगर में उसका वोट डाला। जब चुनाव परिणाम आया तो आनंदनगर के प्रत्याशी व विरोधी को बराबर वोट मिले और सिक्का उछालकर फैसला हुआ, जिसमें वह हार गए। सिर्फ एक वोट ने उन्हें पांच साल के लिए पार्षद बनने से पलट दिया।

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