IAS - IPS की तरह बर्ताव कर रहे भाजपा के संगठन मंत्री

भाजपा के जवाबदार पदाधिकारी ने सोशल मीडिया पर खोला मोर्चा,

By: Mohit Panchal

Published: 19 Jan 2019, 10:59 AM IST

इंदौर। विधानसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा गलियारों में राजनीतिक माहौल अभी भी गर्माया हुआ है। कल इंदौर के एक जवाबदार नेता के सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने के बाद बवाल मच गया। उनका कहना था कि संगठन मंत्री आईएएस व आईपीएस की तरह व्यवहार करते हैं, जिन्हें बदला जाना चाहिए। ऐसा नहीं हुआ तो लोकसभा चुनाव में भी नुकसान होगा।

चौथी बार सरकार बनाने के मंसूबे पर पानी फिरने के बाद भाजपा हलकों में हार को लेकर तरह-तरह के मंथन हुए। इसमें ये बात भी निकलकर सामने आई थी कि प्रदेश संगठन महामंत्री अरविंद मेनन होते तो शायद सरकार बन जाती। मौजूदा संगठन महामंत्री सुहास भगत की ढीली पकड़ और संभागीय संगठन मंत्रियों की लापरवाही का खामियाजा संगठन को भुगतना पड़ा।

इसको लेकर निचले स्तर तक के कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी है, जो अब सामने भी आ रही है। कल इंदौर भाजपा के चुनाव प्रबंधन समिति प्रकोष्ठ के संयोजक अजीत रघुवंशी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डालकर सबको चौंका दिया। उसके बाद इंदौर भाजपा की राजनीति में भूचाल आ गया।

एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष भाजपा तुरंत संगठन मंत्रियों को बदल दें। आईएएस और आईपीएस की तरह बर्ताव करने वाले संगठन मंत्री भाजपा को नहीं चाहिए। दूसरी पोस्ट में कहा कि भाजपा मध्यप्रदेश को कुशाभाऊ ठाकरे, प्यारेलाल खंडेलवाल, कृष्णमुरारी मोघे, कप्तानसिंह सोलंकी और अरविद मेनन जैसे संगठन मंत्री चाहिए।

न कि सत्ता की लालसा में अपने आप को आईएएस और आईपीएस अधिकारी समझने वाले संगठन मंत्री। हमें सोचना होगा कि आगामी लोकसभा चुनाव में हम सभी लोकसभा सीटें जीतें, इसके लिए भाजपा संगठन को तुरंत फैसला लेकर संगठन मंत्रियों को बदलना चाहिए। इसके बाद धड़ाधड़ प्रतिक्रिया आना शुरू हो गई। ये बात जैसे ही पार्टी के नेताओं को मालूम पड़ी, वैसे ही वे सक्रिय हो गए। तुरंत रघुवंशी से संपर्क कर उन्हें पोस्ट हटाने के निर्देश दिए।

आम कार्यकर्ता नाराज

भाजपा में संगठन मंत्री, संघ प्रचारक की तर्ज पर होते हैं। वरिष्ठ भाजपाइयों का मानना है कि संगठन के विस्तार, नेताओं में समन्वय और कार्यकर्ताओं के बीच जाकर माहौल खड़ा करने का मूल काम होता है। इंदौर के संगठन मंत्री जयपालसिंह चावड़ा सभी पैमाने पर कमजोर हैं। इस चुनाव में जितने बागी खड़े हुए, जो आज तक नहीं हुए, उन्हें बैठाने में चावड़ा सफल नहीं रहे, क्योंकि नेताओं से उनकी आत्मीयता नहीं थी।

वहीं, नेताओं के बीच भी वे समन्वय स्थापित नहीं कर पाए। गुटों के बीच दूरी खत्म करने में सफल नहीं हुए। बात रही कार्यकर्ताओं की तो उनसे मिलने के लिए पहले पीए से समय लेना पड़ता है। आगे रहकर किसी के यहां वे प्रवास करने भी नहीं जाते।

BJP
Mohit Panchal Reporting
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