भाजपा : राष्ट्रीय अध्यक्ष से पहले हो जाएगा प्रदेश का फैसला, राकेश सिंह की दावेदारी मजबूत, ये भी हैं कतार में...

  • ताकत से जुटे हैं अन्य दावेदार
  • सोशल इंजीनियरिंग पर ध्यान दे रही पार्टी

इंदौर. भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा की ताजपोशी लगभग तय हो गई है। 20 जनवरी को उनके नाम की घोषणा हो सकती है। इसके पहले प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का फैसला भी हो जाएगा। वैसे तो मौजूदा अध्यक्ष राकेश सिंह का रास्ता साफ नजर आ रहा है, लेकिन अन्य दावेदार भी पूरी ताकत से लगे हुए हैं। कई मजबूत नामों के आड़े पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग आ गई।

भाजपा : राष्ट्रीय अध्यक्ष से पहले हो जाएगा प्रदेश का फैसला, राकेश सिंह की दावेदारी मजबूत, ये भी हैं कतार में...

भाजपा के संगठन चुनाव की घोषणा में जनवरी तक राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति होना है, जिसके मुताबिक चलते हुए पार्टी 20 जनवरी को अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लेंगी। संघ और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की पसंद से कार्यकारी अध्यक्ष बने जेपी नड्डा के नाम की घोषणा होना महज औपचारिकता है। इसके पहले जिन प्रदेशों में अध्यक्ष का चुनाव नहीं हुआ है, उनमें नियुक्तियां हो जाएंगीं। इस हिसाब से मध्यप्रदेश में भी 17 या 18 जनवरी तक फैसला हो जाएगा।

आधा दर्जन से ज्यादा दावेदार

गौरतलब है कि अध्यक्ष बनने के लिए आधा दर्जन से अधिक दावेदार प्रयासरत हैं। इसमें सबसे बड़ा नाम पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान, राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा, सांसद वीडी शर्मा, भूपेंद्रसिंह, नरोाम मिश्रा, रामपालसिंह व लालसिंह आर्य आदि के हैं। हालांकि सबसे मजबूत आज भी मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष राकेशसिंह ही हैं। दो दिन पहले भाजपा अध्यक्ष व गृहमंत्री अमित शाह ने जबलपुर दौरा करके नजदीक होने का संदेश भी दे दिया।

भाजपा : राष्ट्रीय अध्यक्ष से पहले हो जाएगा प्रदेश का फैसला, राकेश सिंह की दावेदारी मजबूत, ये भी हैं कतार में...

सोशल इंजीनियरिंग पर बारीकी से ध्यान

भाजपा सोशल इंजीनियरिंग पर बारीकी से ध्यान देती है। खासतौर पर संगठनात्मक नियुक्तियों में। प्रदेश में मौजूदा दोनों महत्वपूर्ण पदों पर ब्राह्मण समाज के नेता काबिज हैं। नेता प्रतिपक्ष की भूमिका गोपाल भार्गव निभा रहे हैं तो संगठन महामंत्री सुहास भगत भी ब्राह्मण हैं। ऐसे में राजपूत समाज से नेतृत्व लेकर उन्हें नाराज नहीं किया जा सकता है। इस फेर में पूर्व मुयमंत्री चौहान ने भी अपने खास रामपाल सिंह का नाम आगे कर रखा हुआ है। वहीं पिछड़ी जाति से लिया जाता है तो वे खुद भी हैं और दूसरा नाम उनके पास पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्रसिंह का भी है। हालांकि वीडी शर्मा अपने आका संघ नेता सुनिल आंबेकर के भरोसेहैं तो मिश्रा भी शाह के भरोसे हाथ-पैर मार रहे हैं।

हुसैन अली Desk
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