किसी भी कोचिंग ने अक्षत को नहीं दिया था एडमिशन, मेरिट में आया दूसरा स्थान

किसी भी कोचिंग ने अक्षत को नहीं दिया था एडमिशन, मेरिट में आया दूसरा स्थान

nidhi awasthi | Publish: May, 18 2018 02:31:27 PM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

दृष्टिबाधित श्रेणी में संघर्षों के साथ सफलता हासिल करने वाले अक्षत से

इंदौर. अगर जीवन में चुनौतियां नहीं होगी तो सफलता मिलना भी मुश्किल हैं। कठिन परिस्थितियां और मुश्किल रास्ते व्यक्ति को निखारने के साथ ही आगे बढऩे का हौसला देते हैं। मैंने जीवन में इसी बात को ध्यान में रखा और किसी भी तरह की परेशानी से हार नहीं मानी। यह बात पत्रिका से बातचीत में 10वीं में 91 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले अक्षत बलदवा ने कही। अक्षत को दृष्टिबाधित की मेरिट में दूसरा स्थान मिला है।

अक्षत बताते हैं कि मैं एनटीएसई (नेशनल टैलेंट सर्च एग्जामिनेशन) के लिए कोचिंग करना चाहता था। एडमिशन के लिए मैंने इंदौर की कई बड़ी कोचिंग में कोशिश की, लेकिन ब्लाइंड होने से मुझे कहीं एडमिशन नहीं मिला। इसके बाद बहन और मम्मी ने एग्जाम की तैयारी करवाई। मैंने एग्जाम भी दी, लेकिन आठ माक्र्स कम आने से सफलता नहीं मिली। अक्षत बताते हैं कि ब्लाइंड स्कूल की टीचर और मां जवाब रिकॉर्ड करके देती थी। अक्षत ने आट्र्स स्ट्रीम सलेक्ट की हैं और वे भविष्य में सिविल सर्विस के क्षेत्र में कार्य करना चाहते हैं।

म्यूजिक भी है पेशन
अक्षत को म्यूजिक का काफी शौक है और वे कई कार्यक्रम में अपनी परफॉर्मेंस भी दे चुके हैं। उन्होंने तबला वादन में ६ साल का बीए एक्सीलेंस कोर्स कम्लीट कर लिया है और अभी म्यूजिक में सीनियर डिप्लोमा के फाइनल इयर में है।

मां दिन में दो से तीन बार जाती थी स्कूल
पिता संजय बलदवा बताते हैं कि हमने अक्षत को ५वीं क्लास तक ब्लाइंड स्कूल में पढ़ाया, लेकिन उसके बाद हम उसे नॉर्मल स्कूल में पढ़ाना चाहते थे। हम जानते हैं कि जीवन की जंग उसे सामान्य लोगों के बीच रहकर जीतनी है। इसीलिए छठी क्लास से हमने उसे सामान्य स्कूल में पढ़ाना शुरू किया। स्कूल में कुछ शरारती बच्चे परेशान करते थे। धक्का मारने पर उसे पता नहीं चलता था कि किसने मारा है। अक्षत की मां बहुत चिंतित रहती थी, इसीलिए शुरुआत में एक दिन में दो से तीन बार स्कूल में चेक करने जाती थी कि वह ठीक तो है। बाद में स्थितियां बदली और सबका सपोर्ट मिलने लगा।

Ad Block is Banned