डकैतों का गढ़ ‘बोरडाबरा’ : यहां घुसने पर पुलिस का तीर कमान, पत्थर, गोलियों से होता है 'स्वागत'

डकैतों के गढ़ में रिपोर्टर मनीष यादव, बदमाशों के परिजन से की बात

कुख्यात बोरडाबरा गैंग का आतंक : गांव में पुलिस के पहुंचते ही तीर कमान, पत्थर व गोलियों से होता है 'स्वागत'
अब तक 55 से ज्यादा लूट, डकैती, चोरी की वारदात दे चुके अंजाम

इंदौर @ मनीष यादव.

इं दौर शहर सहित प्रदेश व अन्य राज्यों में लूटपाट-डकैती की वारदात करने वाली धार जिले की दो कुख्यात गैंग बोरडाबरा व जामिया भूतिया। वर्चस्व की लड़ाई में बोरडाबरा गैंग ने जामिया भूतिया के सरगना की हत्या कर साबित कर दिया कि वही नंबर-1 है। ये गैंग इतनी खतरनाक है कि इंदौर सहित कई शहरों में एक दो नहीं, बल्कि 55 से ज्यादा लूट, डकैती व चोरी की वारदात अंजाम दे चुकी है। इनको पकडऩा आसान नहीं है, क्योंकि पुलिस के इनके गांव में कदम रखते ही तीर कमान, पत्थर व गोलियों से उसका 'स्वागत' होता है। ऐसे में आम आदमी की क्या बिसात की, जो गांव में घुस सके। न्यूज़ टुडे टीम ने इनके गांव में जाकर हालात देखे, पेश है एक रपट...

धार के गंधवानी थाना से 18 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में ग्राम बोरडाबरा स्थित है, जो श्यादी पंचायत अंतर्गत आता है। यह चारों ओर पहाडिय़ों से घिरा है। यहां घर भी ऊंचाई पर हैं। इसमें पांच अलग-अलग फालियों में लोग निवास करते हैं। इस गांव के कुछ बदमाश धार के अलावा मध्यप्रदेश के अन्य जिलों व अन्य राज्यों में डकैती, लूट, हत्या, चोरी, नकबजनी जैसे जघन्य अपराधों में लिप्त हैं। सभी बदमाश हथियारों से लैस होकर एक साथ डकैती व लूट करने अंधेरे में जाते हैं। वारदात के दौरान कोई जाग जाता है, तो ये लोग कट्टे, तीर-कमान, गोफन व पत्थर से हमला कर देते हैं। निर्ममता से हत्या करने से भी नहीं चूकते।
क्राइम ब्रांच ने गांव के एक दर्जन बदमाशों को पकड़ा है। इनके साथी अब भी फरार हैं। वे वर्ष 2006 से फरार चल रहे हैं। इनकी गिरफ्तारी पर एक लाख 62 हजार का इनाम है। जब भी पुलिस बदमाशों की तलाश के लिए बोरडाबरा दबिश देती है, तो वहां की भौगोलिक स्थिति व बसाहट के कारण बदमाशों को पता चल जाता है। पुलिस को देखकर ये लोग पहाडिय़ों पर चढ़ जाते हैं और गोफन, पत्थर, तीर कमान और लूटी गई बंदूकों से पुलिस बल पर हमला करते हैं। इसके चलते पुलिस को इन्हें गांव में पकडऩा मुश्किल हो जाता है। ये लोग आसानी से वहां से भाग निकलते हैं।

गांव का न कोई बोर्ड, न ही माइल स्टोन
न्यूज टुडे टीम धार से अमझेरा होते हुए जीराबाद वहां से कोटा, श्यादी से होते हुए बोरडाबरा गांव तक पहुंची। गांव की ओर मुडऩे पर न तो कोई बोर्ड, न ही माइल स्टोन नजर आता है, जो गांव का रास्ता बता सके। मुख्य मार्ग से कच्चा-पक्का रास्ता अंदर जाता है। इस रास्ते पर बच्चे या बुजुर्ग दिखाई देते हैं।
ये हैं बोरडाबरा गैंग के शातिर बदमाश
मेहरसिंह पिता भदु बामनिया (30), कैलाश पिता भदु बामनिया( 30), सदिया उर्फ सदु पिता भदु बामनिया (27), सोहन पिता भदु (24), आलम पिता दीपसिंह डोडवे ( 30), सोहन पिता मदन डुडवे (27), नजरू पिता शेखू भूरिया (28), बिशन पिता कलचिया ( 23), गोपाल पिता भंगडा भूरिया( 28), हीरासिंह पिता झेतरा मेढ़ा (30), दिनेश पिता चमरिया( 23), करम पिता किशन(27) पकड़े गए हैं। इनके अलावा अभी गैंग के कुछ बदमाश फरार चल रहे हैं।

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नजर आता है एकमात्र विद्यालय
गांव में काफी अंदर जाने पर एकमात्र सरकारी स्कूल की इमारत दिखाई देती है। इसके बाद सड़क गायब हो जाती है। यहां गिने-चुने बच्चे पढ़ाई करते नजर आए। अतिथि शिक्षक पढ़ा रहे थे। यहां आसपास कुछ घर हैं। कच्चे रास्ते पर आगे बढऩे पर ऊंचाई पर घर दिखाई देते हैं। हाल ही में पकड़े गए और फरार बदमाशों के घर जब पुलिस पार्टी पहुंची थी तो घर पर बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी और बच्चे थे, लेकिन एक भी युवक नजर नहीं आया।

10 से कम नहीं जाते वारदात पर
पुलिस की मानें तो बोरडाबरा गैंग के 20 से 25 लोग वारदात करने निकलते हैं। कम से कम भी जाएं तो 8 से 10 तो होते ही हैं। इनके पास सिकलीगरों के बने कट्टे और पिस्टल रहती हैं। लूटी हुई 12 बोर की राइफल भी इनके पास रहती हैं।

ये तरीका... जगाते, पीटते, फिर लूटते
इस गिरोह के लोग वारदात करने किसी घर में घुसते हैं तो चुपचाप चोरी-लूटपाट नहीं करते, बल्कि परिवार के सदस्यों को जगाते हैं और फिर उन्हें पीटते हैं। ज्यादा विरोध हो तो सीधे गोली मार देते हैं। इनकी कई वारदातों में तो पुलिस ने लूट या साधारण चोरी के मामले दर्ज किए हैं, जबकि इनकी संख्या के आधार पर ही डकैती हो जाती है। बदमाशों ने कितनी वारदात की हैं, यह उन्हें भी पता नहीं। पुलिस अफसर घटनास्थल का विवरण देकर पूछताछ करते हैं तो ही ये बताते हैं कि उस वारदात में शामिल थे। यह भी मुश्किल है, क्योंकि ये आसानी से वारदात कबूल नहीं करते।
...तो वहीं काट डालते हैं!
बोरडाबरा गैंग आसपास के लोगों के घर से जेवर-नकदी तो दूर मवेशियों तक को छीन ले जाते हैं। इसके बाद अगर मवेशी का मालिक इनसे किसी मध्यस्थ के माध्यम से संपर्क करता है तो रुपए लेने के बाद मवेशी लौटा देते हैं। गैंग इतनी खतरनाक है कि अगर मवेशी इनकी रफ्तार से नहीं चले तो उसे वहीं पर काट डालते हैं।

पकडऩा आसान नहीं, पहाड़ी पर भी दौड़ाते बाइक
ग्रामीणों की मानें तो यहां के युवा बाइक चलाना पसंद करते हैं। इसके लिए रुपयों की जरूरत होती है। रुपये कमाने के लिए वे अपराध का रास्ता चुन लेते हैं। इनका बाइक प्रेम और उसे दौड़ाने की महारत पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया है। यह उन पहाड़ी रास्तों पर गाड़ी दौड़ाते हुए निकल जाते हैं, जहां पैदल चलना भी मुश्किल है। इस तरह आसानी से वारदात कर भाग जाते हैं। लंबी दूरी पर वारदात करने जाते समय ही यह गैंग फोर व्हीलर इस्तेमाल करता है। ज्यादातर बाइक ही इस्तेमाल करते हैं। वहीं पुलिस अफसरों की मानें तो धार के अंदरूनी इलाकों में अधिकतर चोरी की बाइक दौड़ती हैं। यह या तो स्थानीय बदमाशों ने चुराई या फिर बाहर के बदमाश बेच कर चले गए हैं।

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Manish Yadav
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