बीआरटीएस : बॉटलनेक वाहन चालकों के लिए बनी मुसीबत

- 4.7 किमी का संघर्ष चालकों पर भारी, बीआरटीएस की कमियां हों दूर
- मुख्य समस्या : फुटपाथों पर अतिक्रमण, चौराहों पर जाम, रैलिंग से परेशानी

By: हुसैन अली

Published: 19 Jan 2019, 12:26 PM IST

इंदौर. शहर को सुंदर बनाने और रैेपिड लोक परिवहन के लिए एबी रोड के 11.5किमी हिस्से को बीआरटीएस बनाया गया है। कॉरिडोर में रैलिंग लगा कर मौजूदा सडक़ की चौड़ाई का करीब 26 फीसदी हिस्सा आइ-बस के लिए सुरक्षित किया गया। पूरा बीआरटीएस 200 मीटर की चौड़ाई के लिए डिजाइन किया गया था, लेकिन नौलखा से एलआइजी चौराहे के बीच 4.7 किमी लंबाई का बॉटलनेक वाहन चालकों के लिए मुसीबत बन गया है। इसमें बस स्टॉप तक आवाजाही भी सुरक्षित नहीं है। हाई कोर्ट के आदेश पर गठित विशेषज्ञों की कमेटी व सीइपीआरडी की रिपोर्ट ने भी इस हिस्से को सुधारने के विकल्प तलाशने के सुझाव दिए हैं। जेएनएनयुआरएम के तहत शहर विकास और बेहतर लोक परिवहन की स्कीम के तहत तीन बीआरटीएस बनाने का फैसला लिया गया था, जिनमें एक इंदौर था। एबी रोड के करीब ११ किमी हिस्से पर 60 मीटर यानी 200 फीट की मल्टी यूटीलिटी लेन कॉरिडोर बनना था, लेकिन नौलखा से एलआइजी के बीच 4.7 किमी हिस्से में सडक़ की चौड़ाई 31 मीटर ही मिल सकी और सारा मामला फंस गया। निर्माण के बाद यह हिस्सा बीआटीएस का बॉटलनेक बन गया। इसमें भी पलासिया से एलआइजी और चिडि़याघर से शिवाजी वाटिका के बीच पीक आवर में लंबी लाइनें लगती हैं। बसों को तो रेपिड गति मिलती है, ट्रैफिक कछुआ चाल से चलता है।

सीइपीआरडी अध्ययन दल के विशेषज्ञों ने बॉटलनेक के अलग-अलग हिस्से की लेनों का अध्ययन किया तो यह हिस्सा इंडियन रोड कांग्रेस के मानक कोड के अनुरूप नहीं मिला। इसमें चौड़ाई कम रहने के साथ बस कॉरिडोर के साथ दोनों ओर 2-2 मिक्स लेन मुश्किल बन गई हंै।

नौलखा से पलासिया
इस हिस्से में बीआरटीएस की चौड़ाई 8 मीटर व दोनों ओर 7-7 मीटर की मिक्स लेन है। जीपीओ-नौलखा का पैसेंजर प्रति यूनिट ४७०० व पलासिया पर 8500 है। इससे यहां पर वाहनों की लाइन अधिक लंबी लगती है।

पलासिया से एलआइजी
इस हिस्से में पीसीयू 8400 है। इससे इस हिस्से में हमेशा वाहनों की लाइन रहती है। 1 किमी इस भाग में यातायात घनत्व अनुसार 4लेन जरूरी हैं। निगम ने दोनों ओर 3-3 मीटर जमीन लेकर एक लेन बनाई, पर अब गुंजाइश नहीं है।

सुझाव : अध्ययन दल ने सुझाव दिया है कि इस हिस्से को सुधारने के लिए व्यापक सर्वे किया जाए। चौराहों पर फ्लायओवर बनाएं और पलासिया से एलआइजी वाले हिस्से में एलिवेटेड ब्रिज बना दिया जाए। इससे इस हिस्से से निकलने वाला सीधा ट्रैफिक निकल सके।

सुविधा अच्छी, लोग उपयोग करें
बीआरटीएस पर आइबस कॉरिडोर के संबंध में लोगों से पूछा कि क्या बीआरटीएस को हटाकर आइबस को कॉमन लेन में कर दिया जाए? क्या बीआरटीएस के बॉटलनेक वाले हिस्से को हटाकर शेष रहने दिया जाए? क्या आइबस और अपने वाहन से सफर करने में समय बच रहा है? यदि बीआरटीएस आपकी नजर में अच्छा है तो, इसकी परेशानियों को कैसे दूर किया जाए? इन सवालों के जवाब में लोगों ने कहा, बस सुविधा अच्छी है, इसे चलने देना चाहिए। तोडऩे या बंद करने के बजाय सकारात्मक नजरिए से काम करें और परेशानियों को दूर करने के उपाय देखें।

हुसैन अली
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