अब सीए देंगे जीएसटी पर सुझाव, जीएसटी कानून में होगा बड़ा संशोधन

होगा पुर्नरीक्षण, सीए, व्यापारिक संगठनों से बुलाए सुझाव, दो सदस्यीय कमेटी ३१ दिसंबर तक सौंपेगी काउंसिल को रिपोर्ट

By: amit mandloi

Published: 12 Nov 2017, 08:30 PM IST

इंदौर.
कारोबारियों की दिक्कतों को देखते हुए जीएसटी काउंसिल अब जीएसटी कानून का पुर्नरीक्षण करवा रही है। इसके लिए दो सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी ने देश भर के व्यापारियों, कर विशेषज्ञों और सीए एसोसिएशन से कानून के मुद्दों पर अलग-अलग सुझाव मंगाएं है। जिनके आधार पर कमेटी अपनी सिफारिशें काउंसिल को देगी। जिन पर विचार के बाद कानून में बदलाव किए जाएंगे, जिन्हें आगामी १ अप्रैल से लागू किया जाएगा।

देश में एक कर प्रणाली लागू करने के उद्देश्य से जुलाई से जीएसटी लागू किया गया है। इसकी शुरूआत हर माह रिटर्न भरने और डिटेल रिटर्न रिपोर्ट शेडयूल के साथ हुई थी। जीएसटी कानून की बारिकियों के चलते मामला उलझता गया और सरकार को कई मामलों में अपने कदम पीछे खींचना पड़े। लागू होने के चार महिनें में ही २०० से अधिक संशोधन कानून में किए गए। इसके अलावा हाल ही में गुवहाटी बैठक में कर की दरों पर भी यू-टर्न लेते हुए सरकार को दरें कम करने का अहम फैसला लेना पड़ा। इसके अलावा रिटर्न भरने की तिथियों में भी लगातार संशोधन करना पड़ रहा है। दूसरी ओर कारोबारियों और कर सलाहकारों की ओर से रिटर्न भरने की प्रक्रिया को जटिल बताया जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी दिक्क्त जीएसटीएन साफ्टवेयर है।

 

काउंसिल ने कानून का ढांचा इस तरह से तैयार किया है, कारोबारियों को मुश्किल नहीं आए। पूरा सिस्टम भी आन लाइन बनाया गया, रिटर्न भी एक से दूसरे को लिंक किया गया, जिससे चेकिंग भी होता रहे। बावजूद इसके जीएसटी की रिटर्न प्रक्रिया लगभग असफल रही और सरकार को इसके लिए अलग-अलग सुधार करना पड़े। पहले अनुमानित कर भरवाने का फैसला लिया गया, अब तीन माह में रिटर्न समिट करने का निर्णय लागू किया जा रहा है। इसके अलावा कानूनी रूप से भी अनेकों तरह की विसंगतियां सामने आ रही है। अनेक कारोबारियों ने एडवांस रूलिंग के लिए आवेदन लगा दिए। इन सभी को देखते हुए सरकार ने पूरे कानून की समीक्षा करने का निर्णय लेते हुए दो सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। सूत्रों के अनुसार काउंसिल की बैठक में एजेंडे से इतर कानूनी मुद्दों पर भी चर्चा की गई।

 

कानून की बारिकियों और बाद में आने वाली कानूनी उलझनों के समाधान निकालने की भी बात उठाई गई। अफसरों द्वारा कुछ एेसी दिक्कतों को सामने रखा गया कि, कानून की ही समीक्षा करवाने की बात उठने लगी। बैठक के बाद काउंसिल के कुछ सदस्यों ने जानकारी दी, इस कार्य के लिए एक दो सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया गया है। जिसमें केंद्र सरकार की ओर से विनोद कुमार और राज्यों की ओर से कमिश्नर आसाम को सदस्य बनाया गया है। दोनों सदस्यों से कहा गया है, वह देश भर के कर सलाहकारों, सीए संगठनों, व्यापारियों, औद्योगिक संगठनों, सीआईआई आदि से कानूनी में संशोधन करने की जरूरत और इसके लिए प्रस्ताव बुलाए। इसमें स्पष्ट कर दिया गया है, कानून के कारण जीएसटी के व्यावहारिक पालन में किस तरह की समस्याएं आ सकती है, इनके समाधान के लिए क्या कानून में बदलाव करना चाहिए या इसे बेहतर बनाने के लिए इसमें किस तरह के आवश्यक बिंदु जोड़े जा सकते हैं। इन सभी के आधार पर कमेटी ३१ दिसंबर तक अपने सुझाव काउंसिल को सौंपेगी, जिन पर उच्च सस्तरीय सलाहकार समिति विचार कर कानून प्रारूपों को अंतिम रूप देंगे। जिससे आगामी १ अप्रैल से जीएसटी कानून में इन बदलावों को लागू किया जा सकें।

 

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