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मंडी की जमीन पर हक का झगड़ा

locationइंदौरPublished: Dec 11, 2023 11:46:39 am

Submitted by:

Anil Phanse

छावनी अनाज मंडी की बेशकीमती जमीन किसकी?

व्यापारी एसोसिएशन कह रहा खरीदकर मंडी को दी थी जमीन
मंडी सचिव कह रहे दान में दे दी तो अब क्यों जता रहे हक

मंडी की जमीन पर हक का झगड़ा
मंडी की जमीन पर हक का झगड़ा
इंदौर। छावनी अनाज मंडी की बेशकीमती जमीन पर हक का झगड़ा खड़ा हो गया है। अनाज व्यापारी एसोसिएशन ने इस जमीन पर अपना दावा ठोक दिया है। मंडी प्रशासन इस दावे को मानने को तैयार नहीं। इस सारी तनातनी से अनाज मंडी शिफ्टिंग पर संकट के बादल छा गए हैं। मंडी प्रशासन इस जमीन का कमर्शियल उपयोग करने की तैयारी में था, लेकिन अब पूरा मामला उलझ गया लगता है।
इंदौर की छावनी अनाज मंडी में कारोबार बढऩे से मंडी परिसर छोटा पडऩे लगा है। इस मंडी को शिफ्ट किए जाने को लेकर पिछले एक दशक से प्लानिंग चल रही है, लेकिन हमेशा कुछ न कुछ पेंच आ जाने से अभी तक इसे आकार नहीं दिया जा सका। मंडी प्रशासन बायापास स्थित कैलोद कर्ताल में 104 एकड़ जमीन पर नई मंडी बनाए जाने की योजना को फाइनल कर चुका है। इसे लेकर तैयारियां भी हो रही हैं। इसी बीच श्री अनाज तिलहन व्यापाारी संघ ने छावनी अनाज मंडी की जमीन पर अपना हक जता दिया है।
व्यापारी एसोसिएशन ने दावा किया है कि यह जमीन व्यापारियों की है, न की मंडी प्रशासन की। हालांकि मंडी प्रशासन भी इस जमीन पर अपना दावा जता रहा है। व्यापारी एसोसिएशन के दावा जताए जाने के बाद मंडी प्रशासन की छावनी अनाज मंडी का कर्मशियल उपयोग किए जाने की योजना खटाई में पड़ती दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि मंडी प्रशासन इस जमीन का व्यवसायिक उपयोग किए जाने की एक बड़ी प्लानिंग कर चुका है। इस जमीन से होने वाली आय से ही बायपास पर नई मंडी को आकार देने की भी प्लानिंग है।
दान में दी है, अब अधिकार नहीं
वर्तमान जमीन तत्कालीन व्यापारी एसोसिएशन ने दान में दी थी। इसलिए अब इस जमीन पर व्यापारी एसोसिएशन का अधिपत्य नहीं है।
नरेश परमार, सचिवकृषि उपज मंडी समिति, इंदौर7
दान नहीं समझौते के तहत दी है जमीन
मंडी प्रशासन को हर पहलू की जानकारी है। सारे दस्तावेज उनके पास भी है। दान नहीं समझौते के तहत जमीन दी गई है। हम भी चाहते है शहर हित में छावनी अनाज मंडी शिफ्ट हो।
संजय अग्रवाल अध्यक्ष, व्यापारी एसोसिएशन
चंदा कर व्यापारियों ने खरीदी थी जमीन
अनाज व्यापारी एसोसिएशन का दावा है कि अनाज मंडी की जमीन तात्कालीन एसोसिएशन जिसे संयोगितागंज ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन कहा जाता था, ने खरीदी थी। उस दौरान एसोसिएशन के 240 व्यापारियों ने 5-5 हजार रुपए मिलाए थे। यह बात 1960 की है। इस दौरान यह भी तय हुआ था कि व्यापारियों को एक एक हजार वर्गफीट जमीन गोदाम व आफिस के लिए निशुल्क दिए जाएंगे। एक इकरारनामा भी 22 नवंबर 1960 को हुआ था। उस दौरान छावनी क्षेत्र के तात्कालीन विधायक व मंत्री रहे मिश्रीलाल गंगवाल, रामेश्वरदायल तोतला, सज्जनसिंह विश्रार के सक्रिय प्रयासों से तात्कालीन कृषि उपंत्री स्व. श्यामसुंदर नारायण मुश्रान, प्रदेश के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर रीवा शंकरलाल गौड की उपस्थिति में कृषि उपज मंडी समिति इंदौर के अध्यक्ष महंतरामगोपाल दास और संयोगितागंज ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन वर्तमान में श्री इंदौर अनाज तिलहन व्यापारी संघ की पैतृक संस्था के अध्यक्ष महादेव प्रसाद शाहरा के मध्य समझौता हुआ था। इसका विधिवत पंजीयन भी 22 फरवरी 1961 को हुआ था।
ना दान, ना गिफ्ट, नि:शुल्क समझौते के तहत दी
एसोसिएशन का दावा है तत्कालीन अनाज व्यापारी एसोसिएशन ने 16.79 एकड़ जमीन कृषि उपज मंडी समिति इंदौर को हस्तांतरित की है। मूल्य चुका कर नहीं खरीदी है। व्यापारी एसोसिएशन ने छावनी की जूनी मंडी को नदी पर स्थित इस नए प्रांगण से जोडऩे के लिए अपने खर्चे पर ब्रिज का निर्माण भी कराया। एसोसिशन का कहना है कि मंडी शिफ्ट होती है तो इकारारनाम के तहत उक्त भूमि पर मंडी प्रांगण का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।

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