एक किस्सा: एक IAS अफसर जो कांग्रेस ज्वाइन कर बन गया था मुख्यमंत्री

मध्यप्रदेश में 14 साल कलेक्टर रहने के बाद ढाई घंटे में बन गए थे कांग्रेस के नेता...।

By: Manish Gite

Published: 29 May 2020, 05:35 PM IST


इंदौर। शहर के सबसे पॉश इलाके में रेसिडेंसी एरिया में स्थित था कलेक्टर साहब का बंगला। 1985 का वक्त था जब कलेक्टर साहब अजीत जोगी बंगले में आराम कर रहे थे। अचानक फोन की घंटी घनघनाती है और बंगले पर तैनात कर्मचारी कहता है कि कलेक्टर साहब सो रहे हैं। दूसरी तरफ से आदेश आता है कि साहब को उठाइए और बात कराइए। साहब जागते हैं और फोन पर आ जाते हैं। दूसरी तरफ से एक शख्स कहता है तुम्हारे पास ढाई घंटे हैं, सोच लो। राजनीति में आना है या कलेक्टर ही बने रहना है। दिग्विजय सिंह आपके पास आएंगे उन्हें अपना फैसला बता देना। फोन करने वाला व्यक्ति उस समय प्रधानमंत्री राजीव गांधी के पीए वी जॉर्ज का था।


थोड़ी देर बाद जब कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह रेसिडेंसी एरिया स्थित कलेक्टर बंगले पर पहुंचे तब तक अजीत जोगी राजनीति में जाने का मन बना चुके थे। उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन कर ली। कलेक्टरी से भी इस्तीफा दे दिया। कुछ ही दिनों बाद अजीत जोगी को कांग्रेस की वेलफेयर ऑफ शेड्यूल्ड कास्ट एंड ट्राइब्स का सदस्य बना दिया गया। कुछ ही महीनों बाद राज्यसभा सांसद बना दिए गए।

एक किस्सा: एक IAS जो कांग्रेस ज्वाइन कर बन गया था मुख्यमंत्री

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि उस समय पुराने लोगों को हटाकर राजीव गांधी नई टीम बना रहे थे। मध्यप्रदेश रीजन के लिए दिग्विजय सिंह और आदिवासी क्षेत्र छत्तीसगढ़ के लिए उन्हें नए युवा व्यक्ति की तलाश थी और अजीत जोगी उनकी पसंद के व्यक्ति थे। उस समय अजीत जोगी एक तेज तर्रार आईएएस अफसर के रूप में जाने जाते थे। जोगी शहडोल और सीधीमें काफी समय तक कलेक्टर भी रहे। सीधे जिले में चुरहट क्षेत्र भी है जहां पर कांग्रेस नेता अर्जुन सिंह की ही राजनीति चलती थी।

पुराने लोग कहते हैं कि राजनीति में आने के बाद अर्जुन सिंह के दबदबे को जोगी भांप चुके थे और उन्हें गॉडफादर बना लिया था। जोगी खुद को पिछड़ी जातियों के नेता मानने लगे थे। एक बार तो दिग्विजय सिंह के खिलाफ ही उन्होंने मोर्चा खोल दिया था, जो उन्हें राजनीति में लाने में अहम किरदार थे।

यह भी बताया जाता है कि जब मध्यप्रदेश में 1993 में सत्ता परिवर्तन हुआ था और दिग्विजय सिंह का नाम मुख्यमंत्री के लिए लिया गया तब अजीत जोगी भी दावेदारों में शामिल थे।

 

 

तो बन गए छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री
सन 2000 से पहले छोटे-छोटे राज्य बनाने की मांग उठ रही थी। तब देश में तीन नए राज्य बना दिए गए। उनमें से मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य बन गया। 90 विधायक छत्तीसगढ़ के दायरे में आ गए, वो चले गए। वहां कई गुट थे, श्यामाचरण शुक्ल, विद्याचरण शुक्ल, राजेंद्र शुक्ल, मोतीलाल वोरा। अब मुखिया बनने की लड़ाई थी। कई टूट और फूट की तैयारी थी। मांग उठी कि आदिवासी सीएम बनाओ। इसके बाद कई विवादों के बाद अजीत जोगी की लॉटरी लग गई। अजीत जोगी 31 अक्टूबर 2000 को छत्तीसगढ़ राज्य के पहले मुख्यमंत्री बन गए।

 

फिर कांग्रेस से टूट गया नाता
2003 की बात है जब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के पास सीटें कम थीं। भाजपा को 50 सीटें मिल गई थीं, जबकि जोगी के पास सिर्फ 37 सीटें थीं। उस समय एक स्टिंग आपरेशन में दावा किया गया था कि जोगी ने पैसा देकर भाजपा के विधायकों को खरीदने की कवायद की थी। स्टिंग सामने आने के बाद जोगी को कांग्रेस ने पार्टी से बाहर करने की सिफारिश की, लेकिन सोनिया गांधी ने निकाला नहीं। इसके बाद समय गुजरता गया और 6 जून 2016 को जोगी ने कांग्रेस से खुद ही अलग होने का फैसला कर लिया था और अपनी अलग पार्टी बना ली, जिसका नाम था छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस। अब इस पार्टी में जोगी के बाद उनके पुत्र और पत्नी रेणु जोगी हैं।

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