भारत की छिपकली पर चीन ने रिसर्च कर बनाई सबसे ताकतवर गोंद, लटका सकते हैं 700 किलो वजन

भारत की छिपकली पर चीन ने रिसर्च कर बनाई सबसे ताकतवर गोंद, लटका सकते हैं 700 किलो वजन
भारत की छिपकली पर चीन ने रिसर्च कर बनाई सबसे ताकतवर गोंद, लटका सकते हैं 700 किलो वजन

Hussain Ali | Updated: 17 Sep 2019, 06:17:55 PM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

- छिपकली, मेंढक, मधुमक्खी और प्रकृति की अन्य ताकतों को पहचानकर दुनिया को बदल रहे वैज्ञानिक

इंदौर. चीन ने हाल ही में ऐसी गोंद बनाई है, जिससे बने सेलोटेप पर 700 किलो वजन भी लटकाया जा सकता है। इस गोंद को बनाने के लिए चीन ने भारत में पाई जाने वाली गेको छिपकली पर सालों तक रिसर्च किया और अपने अब वह इनोवेशन को पूरी दुनिया में बेचकर बड़े मुनाफे कमाएगा।

यह बात डॉ. प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने पत्रिका से चर्चा में कही। वे डेली कॉलेज में आयोजित रसायन विज्ञान की उपयोगिता पर आयोजित वर्कशॉप में भाग लेने के लिए इंदौर आए हैं। डॉ. श्रीवास्तव हाल ही में सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टिट्यूट के डिप्टी डायरेक्टर के पद से रिटायर्ड हुए हैं। उन्होंने बताया, भारत में शिवाजी और तानाजी की कहानी में गोह छिपकली का जिक्र आता है, जिसकी मदद से तानाजी किलों की दीवारों पर चढ़ते थे। गोह और गेको में बहुत समानताएं हैं और दोनों ही हमारे देश में होती हैं। हमें इसकी ताकत बहुत पहले से पता थी, लेकिन चीन ने इसका महत्व समझा और रिसर्च कर सबसे ताकतवर गोंद बना दी।

भारत की छिपकली पर चीन ने रिसर्च कर बनाई सबसे ताकतवर गोंद, लटका सकते हैं 700 किलो वजन

बायो इंसपायर्ड इंजीनियरिंग पर देना होगा ध्यान

उन्होंने कहा, हम आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और आइटी की तो बहुत बात कर रहे हैं, लेकिन इन सबके बीच एक ऐसा विषय तेजी से पांव पसार रहा है जिस पर सिर्फ कुछ ही देशों का ध्यान है। यह विषय है बायो इंसपायर्ड इंजीनियरिंग। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर फिलहाल चीन, जापन, अमरीका और रूस जैसे कुछ ही देश काम कर रहे हैं। इस विषय में प्रकृति की ताकत को समझकर उसे जीवन को उन्नत बनाने में उपयोग किया जाता है। इसमें जीव-जंतुओं, पेड़-पौधों आदि का अध्ययन कर उनके ऐसे गुणों पर रिसर्च किया जाता है जो मानव जीवन में बड़े बदलाव कर सकते हैं।

मधुमक्खियों की मदद से बना एयरपोर्ट ट्रैफिक सिस्टम

डॉ. श्रीवास्तव ने बताया, मधुमक्खियां एक साथ फूलों की तरफ जाती हैं और पराग लेकर फिर एक साथ छत्ते की तरफ जाती हैं। हजारों की तादाद में होने के बावजूद भी ये आपस में सामंजस्य बैठाते हुए एक जगह से दूसरी जगह तक आसानी से चली जाती हैं। ऑस्ट्रेलिया में वैज्ञानिकों के एक दल ने मधुमक्खियों के इस व्यवहार पर रिसर्च किया और उसके आधार पर एयरपोर्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम बनाया। उन्होंने कहा, यह तो कुछ ही उदाहरण हैं लेकिन यदि इस क्षेत्र में काम किया गया तो बहुत बड़े आविष्कार सामने आएंगे।

विज्ञान को निखारता है संगीत

भारत की छिपकली पर चीन ने रिसर्च कर बनाई सबसे ताकतवर गोंद, लटका सकते हैं 700 किलो वजन

देश के शीर्ष वैज्ञानिकों में शुमार प्रबोध चौबे एक बेहतरीन गायक और ट्रेवलर हैं। वे कहते हैं पढ़ाई के साथ अन्य विद्याएं आपके सोचने समझने की शक्ति को और बढ़ाती हैं। प्रबोध चौबे ने बताया, जब भी काम के दौरान मुझे बहुत तनाव होने लगता तो मैं अपने संगीत पर ध्यान देता या खूबसूरत जगहों पर घूमने चले जाता। जब आप शांत रहते हैं तो हर समस्या का हल खोज लेते हैं। इसके लिए आपको अन्य विधाओं से भी जुडऩा जरूरी है। देश में इनोवेशन के क्षेत्र में छात्रों के कम रुझान पर उन्होंने कहा, हमारे यहां आउट ऑफ द बॉक्स सोचने की प्रवृत्ति बहुत कम है। जो पढ़ा दिया जो बता दिया, बस उसका अनुसरण करते रहते हैं। इसी वजह से हम इनोवेशन में बहुत पीछे हैं। अगर हमें इस अवधारण को बदलना है तो स्कूल लेवल से ही काम करना पड़ेगा।

विज्ञान को मनोरंजन से जोडऩा जरूरी

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दुनियाभर के देशों में 100 से अधिक साइंस वर्कशॉप आयोजित कर चुके प्रोफेसर ब्रजेश पारे ने कहा, विज्ञान को मनोरंजन से जोडऩा बहुत जरूरी है। हमारे स्कूलों और कॉलेजों में आज भी विज्ञान को एक बेहद गंभीर विषय की संज्ञा दे रखी है। इस वजह से बच्चों की इसमें रुचि पैदा नहीं होती। हमें इस तरह के इवेंट, गेम्स और वर्कशॉप क्रिएट करना चाहिए जिसमें वे खुद विज्ञान के प्रयोग पूरे करें और उनका महत्व समझें।

क्विज में चोइथराम स्कूल प्रथम

इससे पहले सुबह के सत्र में साइंस वर्कशॉप में क्विज कॉम्पीटिशन का आयोजन हुआ। इसमें शहर के 15 स्कूलों के बच्चों ने भाग लिया। इसमें चोइथराम ने प्रथम, सेंट अर्नाल्ड ने द्वितीय और डेली कॉलेज ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम का शुभारंभ डेली कॉलेज के प्रिंसिपल नीरज बधौतिया और सभी स्कूलों के शिक्षकों की मौजूदगी में हुआ।

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