माथे पर राख के क्रास के साथ ईसाई समाज ने शुरू किया चलीसाकाल

माथे पर राख के क्रास के साथ ईसाई समाज ने शुरू किया चलीसाकाल
ash Wednesday

 सभी के माथे पर राख मलते हुए उन्हें याद दिलाया जाता-   हे मनुष्य, तू मिटटी है, मिटटी में मिल जाएगा। 


गंगा रावत @ इंदौर। रेड चर्च में चलीसाकाल का शुभारम्भ सुबह साढ़े छ बजे पूजन विधि का आयोजन कर किया गया। आज का दिन राख बुध के नाम से जाना जाता है। सभी के माथे पर राख मलते हुए उन्हें याद दिलाया जाता- हे  मनुष्य, तू मिटटी है, मिटटी में मिल जाएगा। राख प्रायश्चित और तपस्या का प्रतीक है। यह मृत्यु का भी चिन्ह है। ये,  सभी को पापी है, का आभास करता है। यह प्रभु येसु के दुःख और मरण की याद दिलाता है। 



प्रार्थना गीत -मैंने देखा है क्रूस तेरा, मैंने पायी है तेरी क्षमा से पूरा चर्च गूंज उठा। सेंट पॉल कॉलेज के प्रिंसिपल फादर मायकल जॉन ने मुख्य याजक के रूप और फादर बीजू मैथ्यू, फादर जोसफ पी. जेवियर की सहभागीता में मिस्सा बलिदान चढ़ाया। ईसाई समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में इस प्रार्थना समारोह में भाग लिया। आज से ईसाई पुरोहित प्रार्थना के समय बैंगनी रंग के वस्त्र धारण कर पूजा-पाठ करेगें। यह उस घटना की याद दिलाता है कि प्रभु येसु को क्रूस पर चढाने ने से पहले बैंगनी रंग का चोगा पहनाकर उनके सर पर काँटों का मुकुट रखा था। 


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फादर मायकल जॉन ने अपने प्रवचन में कहा, धर्म पद्धति में चालीसा अति महत्वपूर्ण समय है। प्रार्थना, त्याग, तपस्या और उपवास के साथ – साथ हमें भले कार्य करते हुए आध्यात्मिक रूप से अपने आप को तैयार करना है। ईश्वर हमारे मुक्ति के मार्ग को प्रशस्त करता है। जब हम इस मार्ग से भटक जाते हैं तो हम पाप करते हैं। ईश्वर दयालु, प्रेम, सहनशील है। अतः यह दिखावे का समय नहीं  बल्कि प्रार्थना, प्रायश्चित और उपवास का समय है। प्रार्थना से प्रभावित होकर परमकार्यों में लीन होना है । प्रेमी पिता की भांति येसु हमारा इंतजार करता है कि कब हम पापमय जीवन को छोड़कर सही रास्ते पर आ जाये। 



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वहीँ फादर बीजू मैथ्यू रेड चर्च के पल्ली पुरोहित है कहा, यह पुण्यकाल है नवीनीकरण का सुनहरा मौका है। हम प्रभु येसु के दुःख भोग को याद करते है। उनके असीम प्रेम, त्याग और बलिदान पर मनन करते हुए हमारे व्यक्तिगत रिश्तों का मूल्यांकन कर विश्वासी जीवन में बदलाव लाने का प्रयास करें।

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