स्वच्छता सर्वे...आसान नही होगा नम्बर 1 का ताज बरकरार रखना, मिल रही कड़ी चुनौतियां

स्वच्छता सर्वे...आसान नही होगा नम्बर 1 का ताज बरकरार रखना, मिल रही कड़ी चुनौतियां

Arjun Richhariya | Publish: Feb, 15 2018 10:00:01 AM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

पांच दिन बाकी, मुश्किल खड़ी कर रही ये पांच चुनौतियां

इंदौर . केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने स्वच्छता अभियान 2018 के सर्वे की तारीख का ऐलान कर दिया है। इंदौर में 19 से 21 फरवरी तक केंद्रीय टीम सर्वे करेगी। इंदौर को नंबर 1 बरकरार रखने के लिए कड़ी चुनौती मिल रही है। शहर की व्यवस्थाओं में भी पांच ऐसी चुनौतियां है जो नंबर बन की राह रोक सकती हैं। नगर निगम के पास इनसे पार पाने के लिए महज पांच दिन शेष हैं।

ये हैं पांच चुनौतियां
फीडबैक
इस बार सर्वे में सबसे ज्यादा नंबर फीडबैक के हैं। इसमें इंदौर का प्रदर्शन गत वर्ष से तो बेहतर है, लेकिन अन्य शहर भी
ज्यादा पीछे नहीं है।

बैकलेन में कचरा
निगम में प्रतिदिन 10 से ज्यादा चालान बैकलेन में कचरा फेंकने वालों के बन रहे हैं। यह स्थिति घर-घर से कचरा उठने को लेकर निगम के नंबरों को कम कर सकती है।
शौचालयों की गायब टोटियां

सर्वे में शौचालय में साफ-सफाई, प्रकाश और पानी की व्यवस्था पर
जोर दिया है। इसके पूरे नंबर हासिल करने के लिए निगम ने सभी शौचालयों में बिजली कनेक्शन के साथ ही पानी की टंकी और नल भी लगाए थे। लेकिन, शहर के कई शौचालयों से नलों की टोटियों के साथ ही पाइप तक चोरी हो गए हैं। कई जगह तो निगम सुबह टोटियां लगवाता है और शाम होते-होते ही वे चोरी हो जाती हैं।

बिल्डिंग मटेरियल का मलबा
इस बार बिल्डिंग मटेरियल के कचरे के निपटारे को भी सर्वे में शामिल किया है। शहर में सख्ती व
कार्रवाई के बाद भी कई जगह सडक़ किनारे बिल्डिंग मटेरियल और मलबा पड़ा मिल जाता है।

गीले-सूखे के अलग डस्टबिन
बाजार क्षेत्र और व्यावसायिक संस्थानों पर अभी भी गीले और सूखे कचरे के लिए अलग-अलग डस्टबिन नहीं है। जबकि सर्वे में आवासीय और व्यावसायिक दोनों ही स्थानों पर कचरे का पृथकीकरण जरूरी है।

ये भी परेशानी
< इको फ्रेंडली सिटी बनने के लिए प्लास्टिक का उपयोग वांछित स्तर तक कम नहीं हो पाया है। अभी भी पॉलिथीन का इस्तेमाल हो रहा है।
< नगर निगम ने प्रमुख स्थानों पर लीटरबिन तो लगवा दिए हैं, उसके बाद भी कई जगह कचरा फैलाया जा रहा है।
< ई-वेस्ट डिस्पोजल के मामले में जागरूकता नहीं आई है। यह भी सर्वे में शामिल है। हालांकि निगम ने ई-वेस्ट के वैज्ञानिक तरीके से निपटारे की व्यवस्था की है। लेकिन जागरूकता नहीं बढ़ाई।

ये इंदौर की ताकत
ट्रेचिंग ग्राउंड : यहां गीले कचरे से खाद बनाने व सूखे कचरे से रिसायकिल करने लायक कचरे को अलग किया जा रहा है।
रैकपिकर्स : लगभग डेढ़ हजार रैकपिकर्स को ट्रेचिंग ग्राउंड सहित अपने कचरा कलेक्शन पाइंट्स पर नौकरी पर लगाया।
रेलवे स्टेशन-बस स्टैंड की स्वच्छता : रेलवे स्टेशन के अंदर के साथ ही बाहरी क्षेत्र की सफाई पर ध्यान दिया है। बस स्टैंड पर भी सफाई की व्यवस्था को मजबूत किया है। आसपास के क्षेत्र में भी नगर निगम की टीमें दिन में तीन-तीन राउंड लगा रही हैं।
कचरा स्टेशन : आधुनिक कचरा स्टेशन पर कचरे को सीधे पैक्ड कंटेनर में डाला जा रहा है, जहां से इसमें ही सीधे ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंच रहा है।
कचरे की खाद : शहर में बगीचों में बनाए अधिकांश कचरे के पीट में खाद बनाने का काम पूरे देश में सबसे बडा मॉडल बनकर सामने आया है।

&हम तैयार हैं। शहरवासियों के सहयोग से पिछली बार नंबर वन बने थे, इस बार भी उनका पूरा सहयोग मिल रहा है। छोटी से छोटी बात का ध्यान रख रहे हैं। किसी भी दिक्कत आने पर स्थायी समाधान की कोशिश करेंगे।
- मालिनी गौड़, महापौर

ये दे रहे टक्कर
कोच्चि, विशाखापट्टनम, मैसूर, चंडीगढ़, सूरत, जबलपुर, गंगटोक, दक्षिण दिल्ली, तिरुचिरापल्ली

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