कोरोना ने जिनकी जिंदगी छीनी उन्हें मुक्ति दिला रहे हैं ये युवा

युवाओं का यह समूह हर सप्ताह पंचकुइया मुक्तिधाम पहुंच जाता है...

By: Ashtha Awasthi

Published: 09 May 2021, 04:48 PM IST

इंदौर। शहर में कोरोना से मची हाहाकार की गाथा मुक्तिधामों में जल रही चिताएं कह रही हैं। मुक्तिधामों में अंत्येष्टि की जगह नहीं है। साथ ही परिजन अस्थियां और राख लेने भी नहीं आ रहे हैं। कर्मचारी इसे फेंकने को विवश हैं। ऐसे में शहर के युवाओं का एक समूह आगे आया है। ये मुक्तिधामों की राख इकट्ठा कर विधि-विधान से नर्मदा नदी में विसर्जित कर रहे हैं।

यहां हम बात कर रहे हैं संस्था कृष्णसखी की। संस्था के सदस्यों ने देखा कि पंचकुइया मुक्तिधाम में जब अस्थियों और राख का ढेर लगा है और कोई इन्हें लेने नहीं आ रहा है तो इन्होंने विसर्जन का बीड़ा उठाया। युवाओं का यह समूह हर सप्ताह पंचकुइया मुक्तिधाम पहुंच जाता है।

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पूरे सप्ताह इकट्ठा हुई अस्थियों और राख को बोरे में भरना शुरू कर देते हैं। हर सप्ताह 20 बोरों में करीब 5 से 6 क्विंटल वजन हो जाता है। लोडिंग गाड़ी में बोरियों को भरकर इनकी टोली खेडीघाट की ओर विसर्जन करने के लिए निकल पड़ती है। इस काम को संस्था के शशि सातपुते के साथ आर्यन गजरे, उमेश, पवन अग्रवाल, वीरेन्द्र खाटके और शुभम कर रहे हैं।

साथ लेकर जाते हैं पंडित

शशि सातपुते ने बताया कि अस्थियों और राख को हम विधि-विधान से नर्मदा नदी में विर्सजित करते हैं। नाव में सवार होकर नदी के बीच जाते हैं ताकि ठीक ढंग से विसर्जन हो सके। साथ पंडित भी ले जाते हैं। मंत्रोच्चार और पूरी विधि से विसर्जन किया जाता है। टीम के कुछ सदस्यों ने दिवंगतों के लिए मुंडन भी कराया है।

मिल रही है मदद

कई लोग ऐसे हैं जो पहले से ही अस्पताल के खर्च से आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। कुछ दिवंगत का अंतिम संस्कार भी नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे लोगों की मदद भी कृष्णसखी के सदस्य कर रहे हैं। पंचकुइया में संस्था हर सप्ताह 1500 कंडे और 10 से 15 क्विंटल लकड़ी देती है, ताकि जरूरतमंदों का अंतिम संस्कार निःशुल्क हो सके।

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