अमीर बनने के लिए इस गलत काम में फंस रहे कॉलेज स्टूडेंट्स, नशे और कर्ज की भी पड़ रही आदत

लाइफस्टाइल हाई-फाई करने के लिए युवा कर रहे क्राइम, थानों में दर्ज हैं कई केस

 

By: nidhi awasthi

Published: 24 May 2018, 12:35 PM IST

कृष्णपालसिंह चौहान@ इंदौर. शहर के भंवरकुआं क्षेत्र को प्रदेश में एजुकेशन हब के नाम से भी पहचाना जाता है। यहां कॉलेजों व कोचिंग संस्थान में पढऩे वाले हजारों छात्र होस्टल व किराए के कमरों में रहते हैं। इनकी लाइफस्टाइल में बदलाव के मुख्य कारणों का पता लगाने के लिए पत्रिका ने थाने में दर्ज विभिन्न एफआईआर पर एक्सपर्ट के मत लिए कि किस वजह से छात्र अपने शौक पूरे करने के लिए अपराध की दुनिया में कदम रख रहे हैं।

भंवरकुआं थाने में छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आंकड़ों को देखें तो सबसे अधिक चोरी के मामले में संलिप्तता मिली है। कई छात्र छेड़छाड़, मारपीट व एक्सीडेंट के मामले में भी पकड़े जा चुके हैं। थाने में दर्ज चोरी के अपराधों में जितने भी छात्र पकड़ाए हैं, उन्होंने कर्ज चुकाने, शौक व नशे की लत पूरी करने को वजह बताया है। जनवरी में मोबाइल योजना के तहत छात्रों में वितरित करने के लिए आट्र्स एंड कॉमर्स कॉलेज की मैनेजमेंट शाखा के लॉकर रूम में रखे 150 मोबाइल वहीं पढऩे वाले छात्र ने उड़ाए थे। पुलिस ने कॉलेज के एमकॉम के आरोपी छात्र शुभम पाल व उसके साथी को पकड़ा था। पूछताछ में छात्र ने प्रत्येक मोबाइल 500 रुपए में बेचकर कर्ज चुकाना कबूला। अन्य मामले में पॉकेट मनी कम होने पर चोरी करने की बात आरोपी छात्रों से पता चली।

नशे में होते हैं एक्सीडेंट
पुलिस का कहना है, देर रात पढ़ाई का बहाना बनाकर नाश्ता व नशाखोरी के लिए निकलने वाले छात्र ही सडक़ों पर एक्सीडेंट का कारण बनते हैं। रात में शराब दुकान बंद न हो जाए, इसलिए तेज वाहन चलाते हैं। कई मामलों में पुलिस एेसे छात्रों को पकडक़र समझाइश भी देती है।

एक्सपर्ट व्यू
बचपन से बच्चा माता-पिता की निगरानी में रहता है तो आदतें अच्छी होती हैं, लेकिन जब पढ़ाई के सिलसिले में परिजन से दूर रहने पर बाहरी दुनिया के साथ चलने का प्रयास करता है। उसमें यह भावना पैदा हो जाती है कि वह बढ़ा हो चुका है। इसी स्टेज से छात्र के स्वभाव में बदलाव शुरू होते हैं।
परिवार की निगरानी नहीं होने पर खुद को स्वतंत्र मानकर शराब, सिगरेट व गुटखा का सेवन करने लगता है। कई दफा पढ़ाई में असफल छात्र भी नशे की लत में पड़ जाते हैं।
जेब खर्च के लिए छात्र चोरी करने लगता है। वयस्क होने पर आकर्षण बढऩे पर छेड़छाड़ करता है। बदलाव दिखने पर माता-पिता को तुरंत उपाय करना चाहिए।
- डॉ. वीएस पाल, मनोरोग विशेषज्ञ व अधीक्षक, एमवायएच

जनवरी से मई तक इतने केस दर्ज

प्रकरण संख्या
चोरी 6
छेड़छाड़ 4
मारपीट 4
एक्सीडेंट 5

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