मेडिकल उपकरणों की बिक्री में वृद्धि

कोरोनाकाल : ऑक्सीजन लेवल के साथ बीपी-शुगर भी जांच रहे घर पर

By: रमेश वैद्य

Published: 15 Apr 2021, 07:00 PM IST

इंदौर. कोरोना संक्रमण काल में आम लोगों में स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ी है। आमजन अब स्वास्थ्य और खासकर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने को लेकर ज्यादा चिंतित रहने लगे हैं। खासकर युवाओं का ध्यान अब जिम में जाकर पसीना बहाने के बजाय घर ही पारंपरिक योगा और दौड़, साइकिल की तरफ बढ़ गया है। इतना ही नहीं शरीर में ऑक्सीजन के स्तर के साथ ही अब हर कदम का हिसाब भी रखा जा रहा है। कई लोगों ने घर पर ही बीपी-शुगर जांचने के लिए मशीनें खरीद ली हैं। दवा बाजार सहित अन्य बाजारों में इन मशीनों की खरीदी पिछले एक वर्ष में जमकर खरीदी हुई है। कई लोगों ने इन उपकरणों को ऑनलाइन ऑर्डर देकर भी बुलवाया हैं।
कोरोना मरीजों को दी जाती है ये डिवाइस
कोरोना मरीजों को यह मीटर देने की बात इस कारण से चली क्योंकि इससे रोगी घर पर ही यह जांच कर पाएंगे कि उनके शरीर का ऑक्सीजन स्तर क्या है? कोरोना वायरस के गंभीर मामलों में सांस से संबंधित समस्याएं ही देखने को मिलती हैं। एक तरह से इसे ट्रिगर भी कहा जा सकता है। ऑक्सीजन की अधिक कमी खतरे की घंटी का संकेत है।
ये मशीनें भी आई चलन में
वायरलेस ब्लड प्रेशर मॉनिटर के साथ आसानी से रक्तचाप की जांच की जा सकती है। अपने डिजाइन में ब्लड प्रेशर मॉनिटर का उपयोग कहीं भी किया जा सकता है. जैसै फोन कही भी ऑन कर सकते हैं। सिस्टोलिक और डायस्टोलिक दोनों ब्लड प्रेशर को मापते हुए, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी सीधे आपके फोन पर रिपोर्ट भेजती है, जिसे आप अपने डॉक्टर को भेज सकते हैं।
फिटनेस बैंड की सबसे ज्यादा डिमांड
बाजार में ऐसे कई हेल्थ डिवाइस भी आ गए हैं, जो युवाओं की इस नई अच्छी आदतों को बढ़ाने के साथ ही उन्हें उनके स्वास्थ्य को लेकर लगातार अपडेट भी करता है। बाजार में इन डिवाइस की कीमत एक हजार रुपए से शुरू हो जाती है। इसमें सबसे ज्यादा चलन फिलहाल फिटनेस बैंड का है, जो कलाई पर घड़ी की तरह बांधी जाने वाली एक डिवाइस है। फिटनेस बैंड दो बेसिक सेंसर्स एक्सिलोमीटर और गायरोस्कोप होते हैं। कुछ एडवांस्ड फिटनेस बैंड हार्ट रेट सेंसर्स के साथ भी आ रहे हैं। इसमें अल्टीमीटर लगा होता है। इससे ही फिटनेस की जानकारी मिलती है।
कई तरह की सुविधाएं शामिल : इस फिटनेस बैंड में हेल्थ और फिटनेस सुविधाएं शामिल होते हैं। इनमें प्रमुख रूप से ऑटोमैटिक एक्टिविटी, एक्सर्साइज, स्लीप स्टेज ट्रैकिंग, गोल सेलिब्रेशन के अलावा रिमाइंडर, टाइमर और स्टॉपवॉच जैसी सुविधाएं भी शामिल होती हैं।
पल्स ऑक्सीमीटर की सबसे ज्यादा मांग
इस डिवाइस से यह पता लगता है कि आपका दिल कितने अच्छे से काम कर रहा है। इससे यह भी पता लगता है कि फेफड़ों के लिए दी गई दवाई कितने अच्छे से काम कर रही है या यह पता लगता है कि शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कितनी है? यानी कि सांस से जुड़ी अलग-अलग जानकारियों के लिए यह डिवाइस काम आती है।
ऐसे काम करती है यह डिवाइस : रीडिंग प्राप्त करने के लिए इस क्लिप जैसी डिवाइस में उंगली को रखा जाता है। इसके बाद डिवाइस आपके खून में मौजूद ऑक्सीजन के स्तर को मापती है। यह हार्ट रेट की रीडिंग भी देती है। इस दौरान किसी तरह का दर्द नहीं होता है। आमतौर पर खून में 94 प्रतिशत से अधिक ऑक्सीजन होनी चाहिए। इतना ऑक्सीजन लेवल होने पर आपका शरीर और सेल्स स्वस्थ रहते हैं।

रमेश वैद्य Desk
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