न बीमा है न सुरक्षा फिर भी निभा रहे हैं जिम्मेदारी

मदद के हाथ : अंतिम संस्कार के लिए लगातार पहुंच रहे हैं शव

By: रमेश वैद्य

Published: 11 May 2021, 02:11 AM IST

इंदौर. कोरोना के संक्रमण के साथ मृत्यु की दर भी बढ़ गई है, श्मशानों में अंतिम संस्कार करने वाले कर्मचारियों का काम बढ़ गया है। जहां कई बार परिवार के लोग पीछे हट जाते हैं, वहां यह कर्मचारी व्यवस्थाएं करते हैं। ये लोग पूरी ईमानदारी से मानवसेवा की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वहीं, इनकी जिम्मेदारी लेने में प्रशासन पीछे है। निजी संस्थानों के कर्मचारी यहां तैनात हैं, लेकिन न उनके पास सुरक्षा के साधन हैं और न ही कोई बीमे की सुविधा। श्मशानों में अंतिम संस्कार के लिए लगातार शव पहुंच रहे हैं।
अधिकांश श्मशानों की अंदरुनी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी निजी संस्थाओं के पास है, उनके कर्मचारी हैं। नगर निगम ने भी कर्मचारी तैनात किए हैं। काम बढऩे के साथ ही इन कर्मचारियों पर कोरोना का खतरा भी बढ़ा है। संस्थाओं से मिलने वाली राशि में घर का गुजारा करने वाले कर्मचारियों का न तो बीमा है, न ही उनके पास इलाज कराने के लिए ज्यादा पैसा। सरकारी कर्मचारी नहीं होने के कारण नगर निगम के अधिकारी भी इनके इलाज पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। रामनगर श्मशाम के एक कर्मचारी के बीमार होने पर यहीं समस्या आ रही है।
चिता और सूरज की गर्मी के बीच कर रहे हैं काम
चिताओं को तैयार करने के साथ ही अंतिम संस्कार का काम करने में लगे इन कर्मचारियों के लिए वर्तमान हालत सबसे ज्यादा खतरनाक है। श्मशानों में जहां लगातार लाशें आ रही हैं। वहीं, दूसरी ओर उन्हें सुरक्षा के लिए पीपीई किट पहनना भी जरूरी है। वहीं, पूरी तरह से एयरटाइट इस किट को पहनकर उन्हें गर्मी के बीच ही चिताओं से उठती गर्मी के बीच काम करना पड़ रहा है, जिससे उनकी हालत और खराब हो रही है।
रास्ते में पुलिस भी रोक लेती हैं
श्मशानों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए पुलिस कई बार परेशानी खड़ी कर देती है। दरअसल, इन कर्मचारियों का काम आवश्यक तो है, लेकिन इनके पास केवल संस्थाओं द्वारा दिया गया कार्ड है। कोरोना कफ्र्यू में जिन लोगों को छूट दी गई हैं, उनमें इनका नाम है। लेकिन फिर भी कई बार पुलिस रोक लेती हैं।
इलाज की व्यवस्था की कोशिश करेंगे
नगर निगम के सभी कर्मचारियों का कर्मचारी राज्य बीमा योजना का बीमा है। वैसे श्मशान में काम करने वाले कर्मचारियों के इलाज की व्यवस्था की हम इसकी कोशिश करेंगे। - संदीप सोनी, अपर आयुक्त

रमेश वैद्य Desk
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