मृत्यु प्रमाण-पत्र पर ‘कोरोना’ सबूत के लिए काट रहे चक्कर

योजना का नहीं मिल रहा लाभ : एक-दो दिन बाद आने का कहकर लौटा रहे उल्टे पांव

इंदौर. कोरोना का दंश झेल रहे परिवारों के सामने अब मौत का कारण जानना भी मुश्किल हो रहा है। अस्पतालों के चक्कर काटने के साथ ही इन्हें मृत्यु प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। रोजाना कई लोग एमवायएच से लेकर कोविड अस्पतालों के बीच के चक्कर काटने पर मजबूर हो रहे हैं।
शहर में एमजीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध चार सरकारी कोविड अस्पतालों में पिछले दो माह में हजारों की संख्या में कोविड मरीजों को इलाज के लिए भर्ती किया गया। इसमें कई लोगों की कोरोना संक्रमण के चलते मौत भी हुई है। लेकिन जब इन मृतकों के मृत्यु-प्रमाण पत्र बनकर तैयार हुए, तो उन पर कोरोना संक्रमण से मौत का कोई जिक्र ही नहीं था। शासन द्वारा कोरोना संक्रमित मृतकों के परिवार को जिन योजनाओं का लाभ मिलना है, वह इस वजह से नहीं मिल पाएगा। ऐसे में जब परिजन इन प्रमाण-पत्रों पर कोरोना संक्रमण का उल्लेख करवाना चाह रहे हैं, तो उन्हें अस्पताल के चक्कर काटना पड़ रहे हैं।
अस्पताल में खंगाल रहे रिकॉर्ड
संक्रमित की मौत का असल कारण जानने के लिए परिजनों को अस्पताल जाकर पुरा रिकॉर्ड खंगालना पड़ रहा है। कोविड अस्पतालों फिलहाल रिकॉर्ड सहेजने समेत सभी कागजात अस्त-व्यस्त है, जिस वजह से जिस व्यक्ति की दो माह पूर्व मौत हो चुकी है, उसकी मौत का कारण जानना मुश्किल हो गया है।
बार-बार कटवा रहे चक्कर
ऐसे में परिजनों को बार-बार अस्पतालों के चक्कर काटना पड़ रहे हैं। कई लोगों को एक-दो दिन बाद आने का कहकर उल्टे पांव लौटाया जा रहा है। वहीं, दो दिन बाद पहुंचने पर भी मरीज के इलाज संबंधित दस्तावेजों की सही जानकारी या अधूरी जानकारी ही मिल रही है।

रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है
सभी कोविड अस्पतालों में मृतकों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है ताकि मृत्यु प्रमाण पत्र का कार्य तय समय सीमा में किया जा सके। -डॉ. संजय दीक्षित, डीन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज

रमेश वैद्य Desk
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