कोरोना वायरस : दूसरी बार सैंपल का विरोध, ठीक हुए मरीज व परिजन का इनकार

परेशान हो रहा प्रशासन व स्वास्थ्य अमला, सरकारी रवैये पर खड़े किए सवाल

By: Mohit Panchal

Updated: 25 Jun 2020, 11:12 AM IST

इंदौर। मई में कोरोना पॉजिटिव आए मरीज और उनके परिजन के दोबारा सैंपल लेने के लिए प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर-घर दस्तक देना शुरू कर दिया है, लेकिन उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। लोग सैंपल देने से साफ इनकार कर रहे हैं। कहना है कि हम ठीक हैं तो दोबारा सैंपल क्यों दें?
कोरोना संक्रमण फैलाव रोकने के लिए प्रशासन गत सप्ताह तक शिविर लगाकर सैंपल ले रहा था। जब उस पर सवाल खड़े होने लगे तो तय हुआ कि पॉजिटिव आने वाले मरीजों के परिजन के ही सैंपल लिए जाएंगे। इसके अलावा फीवर क्लिनिक पर मरीज पर संदेह होने पर उसकी जांच की जाएगी। इस फॉर्मूले पर दो-चार दिन काम हुआ और नया शिगूफा छोड़ दिया गया।

प्रशासनिक व स्वास्थ्य विभाग के अमले को निर्देश दिए गए हैं कि वे मई में पॉजिटिव आए मरीज सहित निगेटिव आए मरीजों के दोबारा सैंपल लें। इसको लेकर आज से टीम मैदान में उतरी, जिन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा। लोगों ने सैंपल देने से साफ इनकार कर दिया। कहना था कि हम पॉजिटिव आ गए थे और १५ दिन इलाज करके घर लौटे हैं।

अब सबकुछ अच्छा है और हम स्वस्थ हैं तो सैंपल लेने की क्या जरूरत है? हमको सैंपल नहीं देना। कुछ ने तो बात करने तक से इनकार कर दिया। बोले कि दो माह बाद अब क्या औचित्य है? मधुबन कॉलोनी में पहुंचे दल से बात करने से इनकार कर दिया तो एसडीएम रवि कुमार सिंह को मौके पर पहुंचना पड़ा। इस प्रकार अन्य जगहों पर भी यही हाल हुए।

सताने लगा डर

वैसे तो माना जाता है कि एक बार कोरोना पॉजिटिव होने के बाद निगेटिव आ जाएं तो दोबारा होने की संभावना ना के बराबर रहती है। ऐसे में सरकारी अमले द्वारा जांच कराया जाना किसी को हजम नहीं हो रहा है। इसके बावजूद पॉजिटिव मरीज सैंपल देने से डर रहे हैं। उन्हें चिंता सता रही है कि कहीं गलती से रिपोर्ट फिर पॉजिटिव आ गई तो १५ दिन की प्रताडऩा कौन झेलेगा, जबकि हम स्वस्थ हैं।

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Mohit Panchal Reporting
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