घरेलू कामकाजी महिलाओं का न्यूनतम वेतन नहीं मिलने पर शासन ने नहीं दिया जवाब

जनहित याचिका पर सुनवाई

By: रमेश वैद्य

Published: 10 Jun 2021, 02:19 AM IST

इंदौर. घरेलू कामकाजी महिलाओं को न्यूनतम वेतन देने सहित उनके लिए सामाजिक सुरक्षा बोर्ड गठित करने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस सुजोय पॉल की युगल पीठ में शासन को याचिका पर जवाब पेश करना था, लेकिन एक बार फिर समय मांग लिया गया। कोर्ट ने ४ सप्ताह बाद सुनवाई के आदेश दिए हैं। शासन को बताना था, घरेलू काम करने वाली महिलाओं के लिए क्या योजनाएं हैं? अब तक इनका न्यूनतम वेतन क्यों तय नहीं है? आयुषी मंडलोई ने एडवोकेट शन्नो शमुफ्ता खान के माध्यम से याचिका दायर की है। खान का कहना है, कई प्रदेशों में घरेलू काम-काज करने वाली महिलाओं का न्यूनतम वेतन तय हो चुका है, लेकिन मप्र में अब तक नहीं हुआ है। इन महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा का लाभ भी नहीं मिल रहा। क्योंकि, इसे लागू करने के लिए कोई बोर्ड ही नहीं है। 2008 में बोर्ड गठित करने के आदेश के 13 साल बाद भी इसका इंतजार है।

जिला कोर्ट अग्निकांड की जांच और मरम्मत कार्य से संतुष्ट चीफ जस्टिस
इंदौर. मध्यप्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक ने गत दिवस जिला कोर्ट का दौरा किया। एमजी रोड स्थित कोर्ट भवन के तलघर स्थित रिकॉर्ड रूम में आठ अप्रैल को आग लग गई थी और हजारों फाइलें जल कईं थी। कोर्ट भवन को भी काफी नुकसान हुआ था, जिसकी मरम्मद जारी है। गत दिवस चीफ जस्टिस और जस्टिस सुजोय पॉल जिला कोर्ट भवन पहुंचे थे। उन्होंने करीब आधे घंटे तक रिकॉर्ड रूम का निरीक्षण किया। जिला जज की देखरेख में पीडब्ल्यूडी द्वारा किए जा रहे काम से चीफ जस्टिस संतुष्ट दिखाई दिए। अग्निकांड में कुछ कोर्ट रूम भी प्रभावित हुए हैं, जिनका भी काम चल रहा है। चीफ जस्टिस ने बार एसोसिएशन के दफ्तर, लाइब्रेरी का भी निरीक्षण किया। जिला जज के चेम्बर में तदर्थ समिति के संयोजक कमल गुप्ता और शैलेंद्र द्विवेदी ने उनका स्वागत भी किया। अग्निकांड को लेकर जिला जज ने तीन सदस्यी जांच कमेटी का गठन किया है। उसकी जानकारी भी चीफ जस्टिस को दी गई। ग्रीष्मकालीन अवकाश खत्म होने के बाद जिला कोर्ट में नियमित सुनवाई शुरू हुई। कोरोना से सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बदली व्यवस्था में सिविल और क्रिमिनल केसों की दो सत्रों में सुनवाई हो रही है। सुबह १०.३० से २ बजे तक सभी सेशन कोर्ट में सिविल और क्रिमिनल केस सुने जा रहे हैं, जबकि २.३० से शाम पांच बजे के बीच जेएमएफसी कोर्ट में केसों की सुनवाई होगी।

हाई कोर्ट पहुंचा कॉलेजों की मान्यता का मामला
इंदौर. शहर के ५६ बीएड कॉलेज को मान्यता देने के मामले में गड़बड़ी और कॉलेजों में काबिल शिक्षकों के अभाव का मामला हाई कोर्ट पहुंचा है।
चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस सुजोय पॉल की युगल पीठ में गत दिवस याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन को १० दिन में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। स्टूडेंट विकास नंदवाल ने एडवोकेट रवींद्र पाल के माध्यम से दायर याचिका में मुद्दा उठाया कि यूजीसी की गाइडलाइन के मुताबिक बीएड कॉलेजों में कोड-२८ के मुताबिक शिक्षकों की भर्ती की जाना चाहिए। कोड-२८ में शिक्षकों की योग्यता सहित अन्य बिंदु शामिल हैं, लेकिन शहर के अधिकांश बीएड कॉलेजों में न तो पर्याप्त संख्या में शिक्षक हैं और न वे निर्धारित योग्यता रखते हैं। विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त आधारभूत सुविधाएं नहीं होने के बावजूद ऐसे कॉलेजों को मान्यता दी जा रही है। याचिका में देअविवि की कुलपति और रजिस्ट्रार को पक्षकार बनाया गया है।

रमेश वैद्य Desk
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