शहर में भविष्य संवार रहे मिजोरम के शरणार्थी बच्चे

Arjun Richhariya

Publish: Nov, 15 2017 01:51:07 (IST)

Indore, Madhya Pradesh, India
शहर में भविष्य संवार रहे मिजोरम के शरणार्थी बच्चे

शहर के मृत्युंजय भारत ट्रस्ट ने यह बीड़ा उठाया है और इनको शिक्षा और संस्कार दिए जा रहे हैं ...

लखन शर्मा . इंदौर . मिजोरम से त्रिपुरा में आए शरणार्थियों के पास अब तक खुद के रहने, काम करने व खाने की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में शिक्षा और स्वास्थ्य की बात करना ही बेमानी होगा। लेकिन वहां के कुछ बच्चे इन दिनों शहर में रहकर अपना भविष्य संवार रहे हैं। दरअसल शहर के मृत्युंजय भारत ट्रस्ट ने यह बीड़ा उठाया है और ट्रस्ट के प्रकल्प क्राफ्टिंग फ्युचर के तहत इनको शिक्षा और संस्कार दिए जा रहे हैं।

साकेत नगर में ट्रस्ट ने किराए से एक फ्लेट लेकर बच्चों के रहने, खाने और शिक्षा की व्यवस्था की है। फिलहाल यहां त्रिपुरा, मिजोरम, मध्यप्रदेश सहित कुछ अन्य राज्यों के 16 बच्चे रह रहे हैं। चार साल पहले सिर्फ पांच बच्चों से इसे शुरू किया गया था।

देर से ही सही, लेकिन मिलेगा परिणाम
दरअसल इस प्रकल्प को शुरू करने के पीछे ट्रस्ट के संचालकों की मंशा यह है कि कोई भी काम रिजल्ट ओरिएंटेड होना चाहिए। कई लोग आज एक या दो दिन के इवेंट आयोजित करते हैं, जागरूकता अभियान चलाते हैं, लेकिन इसके परिणाम सामने नहीं आते। ट्रस्ट संचालकों की मंशा थी कि ऐसा कोई काम किया जाए, जिसके रिजल्ट सामने आएं। चार सालों से यहां बच्चे रह रहे हैं, जिन पर प्रतिमाह करीब ८० हजार रुपए खर्च आता है, जिसके लिए किसी भी प्रकार का शासकीय अनुदान नहीं लिया जाता। ट्रस्ट के संस्थापक व सहयोगी मिलकर ही इसे संचालित करते हैं।

आत्मनिर्भर बनेंगे तो दूसरों को भी बनाएंगे
दरअसल ट्रस्ट का उद्देश्य यहां रहने वाले बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। यहां रहने वाले बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ ही संस्कार भी दिए जाते हैं। ट्रस्ट से जुड़े सहयोगियों का कहना है कि इन बच्चों के परिजन के पास खाने को अनाज तक नहीं है। वे कैसे शिक्षा हासिल करेंगे। मिजोरम, त्रिपुरा में तो हालत बहुत खराब है। ऐसे में यहां अगर यह इतना पढ़ लिए कि कहीं नौकरी कर पाए तो स्वयं का जीवन तो बनाएंगे, अपने परिजनों और परिवार के अन्य सदस्यों को भी आगे बढ़ाएंगे।

परीक्षा की कर रहे तैयारी
खास बात यह है कि यहां हर उम्र के बच्चे रह रहे हैं। यहां रहने वाले तीन छात्र ग्रेजुएट हैं, जो इन बच्चों के साथ रहकर पढ़ते भी हैं और वार्डन का काम भी करते हैं। ये तीनों पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई करने के साथ ही प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी कर रहे हैं। त्रिपुरा से आए ५वीं के छात्र ओजित आशापारा ने बताया कि यहां उन्हें सभी सुविधाएं मिल रही हैं और अब पढ़ाई में मन भी लगने लगा है।

मिजोरम के खोरगो जॉय ने बताया कि हम यहां आने से पहले कभी स्कूल नहीं गए थे लेकिन अब हमारे दोस्त भी बन गए हैं। वहीं इनके साथ देवास जिले के ८वीं के छात्र शेखर ने बताया कि हम गरीब थे, इसलिए परिजन पढ़ा नहीं सकते थे। यहां पढ़ाई कर रहा हूं। पापा-मम्मी के लिए कुछ करके दिखाना चाहता हूं।

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