scriptData ready for 5 thousand students | बड़ी लापरवाही: लाखों स्टूडेंट्स में से अभी तक महज 5 हजार का डेटा ही तैयार, मार्कशीट का पूरा काम बाकी | Patrika News

बड़ी लापरवाही: लाखों स्टूडेंट्स में से अभी तक महज 5 हजार का डेटा ही तैयार, मार्कशीट का पूरा काम बाकी

शिक्षा विभाग ने एजेंसियों को दिया था काम

 

इंदौर

Updated: February 17, 2022 10:54:58 am

इंदौर. शिक्षा विभाग से जुड़ी एक बड़ी लापरवाही सामने आई है. नेशनल एकेडमी डिपॉजिटरी (एनएडी) योजना के तहत अपने स्टूडेंट्स का डेटा डिजिटल करना है, लेकिन करीब 5 साल में यह काम नहीं हो पाया है. देवी अहिल्या विवि तो अपने 8 लाख स्टूडेंट्स में से 5 हजार का डेटा ही डिजिटल कर पाया है. विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि हमारी तैयारी पूरी है, प्रक्रिया बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी बीयू से रुकी है. बताया जा रहा है कि नोडल ऑफिस बनाए गए बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी की कुछ कार्यवाही अभी तक पूरी नहीं हुई है.

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सन 2017 में शिक्षा मंत्रालय ने एनएडी योजना शुरू की थी। इसके तहत देशभर के विवि को अपने वर्तमान व पूर्व छात्रों का डेटा डिजी लॉकर में अपलोड करना था। मंत्रालय ने डिजी लॉकर में यह डेटा अपलोड करने का काम दो एजेंसियों को दिया था। इसी के तहत देअविवि को भी 2017 से 2021 के बीच अध्ययन कर चुके स्टूडेंट्स का डेटा डिजिटल करना है।

जानकारी के अनुसार इस अवधि के लगभग 8 से 10 लाख स्टूडेंट्स हैं। विवि प्रबंधन अभी तक महज 5 हजार छात्रों का डेटा ही डिजिटल कर पाया है। इसमें भी सबसे महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट मार्कशीट को डिजिटल करना अभी बाकी है।

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यूजीसी ने भी देशभर की यूनिवर्सिटियों को स्टूडेंट की डिग्री, मार्कशीट, माइग्रेशन, ट्रांसक्रिप्ट सहित अन्य डॉक्यूमेंट को जल्द ही डिजिटल अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि अभी कई अन्य विवि भी डेटा अपलोड नहीं कर पाए।

विवि प्रबंधन की मानें तो डिजी लॉकर के लिए डॉक्यूमेंट को डिजिटल करने का काम चल रहा है। इस संबंध में देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. अनिल शर्मा बताते हैं कि विवि ने डिजी लॉकर का रजिस्ट्रेशन करा लिया है। यूनिवर्सिटी प्रबंधन की तैयारी पूरी है लेकिन स्टेट लेवल पर नोडल ऑफिसर बनाए गए बीयू से कुछ कार्यवाही अभी तक पूरी नहीं हुई है। इस कारण डिजिटल करने की प्रकिया रुकी हुई है।

क्या है लाभ
— मौजूदा व्यवस्था में संस्थाएं डॉक्यूमेंट का संबंधित विवि से वेरिफिकेशन करवाती हैं जिसमें 4 से 5 महीने लगते हैं। डिजी लाॅकर में डॉक्यूमेंट होने से संस्थाओं को सत्यापन में महज 6—7 दिन ही लगेंगे।
— एनएडी योजना से सबसे ज्यादा फायदा प्रदेश के बाहर जाने वाले या विदेश जानेवाले स्टूडेंट्स को है। हर साल उच्च शिक्षा और नौकरी के लिए विदेश जानेवाले भारतीय स्टूडेंट के डॉक्यूमेंट का शैक्षणिक संस्थाएं और कंपनियां वेरिफिकेशन कराती हैं। एनएडी से ये काम आसान हो जाएगा.

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