स्मरण करते ही रक्षक बन जाते हैं दत्तात्रेय, ऐसे करें उपासना तो जल्द होंगे प्रसन्न

स्मरण करते ही रक्षक बन जाते हैं दत्तात्रेय, ऐसे करें उपासना तो जल्द होंगे प्रसन्न

Kamal Singh | Publish: Dec, 13 2016 01:52:00 PM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

यदि मानसिक रूप से, कर्म से या वाणी से महाराज दत्तात्रेय की उपासना की जाए तो वे शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं।


इंदौर.
दत्तात्रेय को शैवपंथी शिव का अवतार और वैष्णवपंथी विष्णु का अंशावतार मानते हैं। श्री गुरुदेव दत्त भक्ति से प्रसन्न होकर स्मरण करने से ही विपदाओं से रक्षा करते हैं। गूलर वृक्ष दत्तात्रेय का सर्वाधिक पूजनीय रूप है।
इसी वृक्ष में दत्त तत्व अधिक है। भगवान शंकर का साक्षात रूप महाराज दत्तात्रेय में मिलता है। तीनों ईश्वरीय शक्तियों से समाहित महाराज दत्तात्रेय की साधना अत्यंत ही सफल और शीघ्र फल देने वाली है। महाराज दत्तात्रेय आजन्म ब्रह्मचारी, अवधूत और दिगंबर रहे थे। किसी प्रकार के संकट में बहुत जल्दी भक्त की सुध लेने वाले हैं। यदि मानसिक रूप से, कर्म से या वाणी से महाराज दत्तात्रेय की उपासना की जाए तो वे शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं।

यह भी पढ़ें-Video Icon दत्त मंदिर का इतिहास इंदौर से भी पुराना है, जानिए देशभर से क्यों आते हैं श्रद्धालु

दत्त मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र
इंदौर के कृष्णपुरा के दत्त मंदिर का अस्तित्व इंदौर से भी प्राचीन है, यानी होलकर रियासत के सबूदार मल्हारराव होलकर के मालवा (इंदूर)आगमन से पूर्व श्री दत्त मंदिर की मौजूदगी दर्ज है। यही वजह हैं, कि यह मंदिर देशभर के लोगों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालू दर्शन के लिए आते है। मंदिर पुजारी नरहरि दत्तात्रे शुक्ला ने बताया कि श्री दत्तात्रेय भगवान से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते है।





ईश्वर और गुरु दोनों
दत्तात्रेय में ईश्वर और गुरु दोनों रूप समाहित हैं। इसलिए उन्हें  परब्रह्म मूर्ति सदगुरु और श्री गुरुदेव दत्त भी कहा जाता है। उन्हें गुरु वंश का प्रथम गुरु, साधक, योगी और वैज्ञानिक माना जाता है। विविध पुराणों और महाभारत में भी दत्तात्रेय की श्रेष्ठता का उल्लेख मिलता है। वे श्री हरि विष्णु का अवतार हैं। वे पालनकर्ता, त्राता और भक्त वत्सल हैं तो भक्ताभिमानी भी।

यह भी पढ़ें-संत भय्यू महाराज सूर्योदय मानवता सेवा सम्मान से सीएम को करेंगे सम्मानित

साधना विधि
गुरुवार और हर पूर्णिमा की शाम भगवान दत्त की उपासना में विशेष मंत्र का स्मरण बहुत ही शुभ माना गया है। इसलिये जितना ज्यादा मंत्र जाप कर सकते हैं करना चाहिए। मंत्र जाप से पूर्व शुद्धता का ध्यान विशेष रूप से रखें और हो सके तो स्फटिक माला से रोज दोनो मंत्र का एक माला मंत्र जाप करें। दत्तात्रेय की उपासना ज्ञान, बुद्धि, बल प्रदान करने के साथ शत्रु बाधा दूर कर कार्य में सफलता और मनचाहे परिणामों को देने वाली मानी गई है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान दत्तात्रेय भक्त की पुकार पर शीघ्र प्रसन्न होकर किसी भी रूप में उसकी कामनापूर्ति या संकटनाश करते हैं।

यह भी पढ़ें- महाकाल की नगरी को ओशो मानते थे PERFECT, इंदौर ऐसे मना रहा BirthDay

पूर्णिमा को हुआ था जन्म
मार्गशीर्ष (अगहन) मास की पूर्णिमा को दत्त जयंती मनाई जाती है। शास्त्रानुसार इस तिथि को भगवान दत्तात्रेय का जन्म हुआ था। ब्रह्मा, विष्णु और महेश इन तीनों देवताओं की परमशक्ति जब केंद्रित हुई तब त्रयमूर्ति दत्त का जन्म हुआ। अगहन पूर्णिमा को प्रदोषकाल में भगवान दत्त का जन्म होना माना गया है। तीन सिर, छ: हाथ, शंख, चक्र, गदा, पद्म, त्रिशूल, डमरू, कमंडल, रुद्राक्ष माला, माथे पर भस्म, मस्तक पर जटाजूट, एकमुखी और चतुर्भुज या षडभुज इन सभी रूपों में श्री गुरुदेव दत्त की उपासना की जाती है। मान्यता यह भी है कि दत्तात्रेय ने परशुरामजी को श्री विद्या मंत्र प्रदान किया था। शिवपुत्र कार्तिकेय को उन्होंने अनेक विद्याएं दी थी। भक्त प्रल्हाद को अनासक्ति योग का उपदेश देकर उन्हें श्रेष्ठ राजा बनाने का श्रेय भी भगवान दत्तात्रेय को ही है।

ऐसा है रूप
-दत्तात्रेय भगवान का रूप तथा उनका परिवार भी आध्यात्मिक संदेश देता है।
-उनका भिक्षुक रूप अहंकार के नाश का प्रतीक है। कंधे पर झोली, मधुमक्खी के समान मधु एकत्र करने का संदेश देती है।
-उनके साथ खड़ी गाय कामधेनु है जो पृथ्वी का प्रतीक हैं ।
-चार कुत्ते, चारों वेदों के प्रतीक माने गए हैं। गाय और कुत्ते एक प्रकार से उनके अस्त्र भी हैं। क्योंकि गाय अपने सींगों से प्रहार करती है और कुत्ते काट लेते हैं।

यह भी पढ़ें-120 साल की उम्र सच-अचंभा और भूली-बिसरी यादें

दत्तात्रेय के अवतार
ऐतिहासिक युग में दत्त देवता के तीन अवतार श्रीपाद श्रीवल्लभ, श्री नृसिंह सरस्वती और मणिकप्रभु हुए। श्रीपाद श्रीवल्लभ भगवान दत्तात्रेय  के पहले अवतार थे । श्री नृसिंह सरस्वती उनके दूसरे और मणिकप्रभु तीसरे अवतार थे। चौथे अवतार श्री स्वामी समर्थ थे । यह चार पूर्ण अवतार हैं और इनके अतिरिक्त कई आंशिक अवतार भी हैं। श्री वासुदेवानंद सरस्वती उनमें से एक हैं । जैन नेमीनाथ के रूप में दत्तात्रेय की पूजा करते हैं।
दत्तात्रेय के अचूक मंत्र

घर में क्लेश ना होने के लिए
दत्तात्रेय भगवान का चित्र स्थापित करे । चित्र के समुख एक पानीवाला नारियल मिट्टी के घड़े के ऊपर रखकर चारों तरफ पत्ते लगाकर कलश स्थापित करें और चार मुख वाला दीपक उसके सामने प्रज्ज्वलित करें। स्वयं पीले वस्त्र धारण करें और दत्तात्रेय भगवान को भी पीले वस्त्र अर्पित करें। पीले रंग का आसन का प्रयोग करें और नीचे दिए गए मंत्र की चंदन के माला पर 7 माला जप करें। जप पूरा होने के बाद कन्या को भोजन या मीठा प्रसाद, शृंगार का सामान, दक्षिणा अर्पित करके मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं।
मंत्र - उं झं द्रां विपुलमुर्तेये नम: स्वाहा ॥

शत्रुओं से छुटकारा
दत्तात्रेय भगवान का चित्र स्थापित करके उनके सामने एक सूखा नारियल काले कपड़े में लिपटा कर मोली सूत्र से बांध दें और भगवान को अर्पित करें। साथ ही एक सुपारी अर्पित करें। कंबल के आसन का प्रयोग करें और नीचे दिए गए मंत्र की रुद्राक्ष की माला से 8 माला जप करें। जप पूरा होने के बाद भगवान को मीठी रोटी का भोग लगाएं। उसमें से एक भाग कौए को और एक भाग कुत्ते को खिलाएं और कपड़े में लिपटा नारियल शिव मंदिर में जाकर शत्रु का नाश होने की प्रार्थना करके शिव को अर्पित करें।
मंत्र -॥ ऊं द्रां ह्रीं स्पोटकाय स्वाहा ॥


datta jayanti special story of datta mandir krishn

गंगाजी में करते थे स्नान
मान्यता है कि दत्तात्रेय नित्य प्रात:काल काशी की गंगाजी में स्नान करते थे। इसी कारण काशी के मणिकर्णिका घाट की दत्त पादुका दत्त भक्तों के लिए पूजनीय है। इसके अलावा मुख्य पादुका स्थान कर्नाटक के बेलगाम में स्थित है। दत्तात्रेय को गुरु रूप में मान उनकी पादुका को नमन किया जाता है।

परीक्षा में सफलता
दत्तात्रेय भगवान का चित्र स्थापित करके उनके सामने तांबे की थाली में खीर बनाके प्रसाद के रूप में रखें और भगवान के सामने पान की तीन पत्तियां लेकर उस पर चावल की छोटी-छोटी ढेरी बनाकर रख दें। भगवान को सफेद वस्त्र अर्पित करें और लाल कंबल के आसन का प्रयोग करें और नीचे दिए गए मंत्र की तुलसी की माला से 5 माला जप करें।
मंत्र ॥ ऊं विध्याधिनायकाय द्रां दत्तारे स्वाहा॥

धन-दौलत मिलने के लिए
ये साधना रात में करनी है। दत्तात्रेय भगवान का चित्र स्थापित करें। चित्र के सम्मुख एक पानीवाला नारियल मिट्टी के घड़े के ऊपर रखकर चारो तरफ पत्ते लगाकर कलश स्थापित करें। उसके बाद तुलसी दल, बिल्वपत्र और गेंदे के फूल भगवान को अर्पित करें और मेवे का भोग लगाएं । 5 अखंड दीप लगाएं जो साधना की शुरुआत से पूरी रात जलते रहें और लाल कंबल के आसन का प्रयोग करें। फिर नीचे दिए गए मंत्र की तुलसी की माला से 9 माला जाप करे।
मंत्र- ॥ ऊं ह्रीं विद्दुत जिव्हाय माणिक्यरुपिणे स्वाहा ॥


घर प्राप्ति के लिए
दत्तात्रेय भगवान का चित्र स्थापित करें। चित्र के सम्मुख 11 पत्ते पर 5 लौंग, 5 इलायची रखकर दक्षिणा के साथ अर्पित करें। फिर अपनी मनोकामना कह दें और पीले रंग के आसन का प्रयोग करें और नीचे दिए हुए मंत्र की रुद्राक्ष की माला से 8 माला जप करें।
मंत्र ॥ श्रीं ह्रीं ऊं स्ताननायकाय स्वाहा ॥

दुर्घटना से बचाव के लिए
दत्तात्रेय भगवान का चित्र स्थापित करें। चित्र के सम्मुख तांबे की थाली में पानी भरकर उसमे एक दिया जलाएं। फिर काले कंबल के आसन का प्रयोग करें और नीचे दिए हुए मंत्र की रुद्राक्ष की माला से 4 माला जप करें। जप पूरा होने के बाद भगवान को पुष्प, धूप, दीप लगाकर बेसन का भोग लगाएं।

मनचाहा प्यार मिलने के लिए
दत्तात्रेय भगवान का चित्र स्थापित करें। लाल कंबल के आसन का प्रयोग करें और नीचे दिए हुए मंत्र की स्फटिक माला से 9 माला जप करें। जप पूरा होने के बाद भगवान को पुष्प, धूप, दीप लगाकर गुड़, शहद और मिश्री का भोग लगाएं और गुलाबी रंग का वस्त्र अर्पित करें और 21 केले का प्रसाद चढ़ाकर सभी परिवार के लोगों में और आसपास या पड़ोस के लोगों में बांटे दें।
मंत्र - ॥ ऊं ह्रीं नमो अकर्शानाय द्रां ह्रीं हुम्॥

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पड़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते है । हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते है ।
OK
Ad Block is Banned