कांट्रेक्ट फैकल्टी रख 10 करोड़ बचाएगी यूनिवर्सिटी

तक्षशिला स्थित विभागों में करीब १८० फैकल्टी की जरूरत है। स्कूल ऑफ कॉमर्स, स्कूल ऑफ सोशल साइंस और स्कूल ऑफ लैंग्वेज में तो एक भी परमानेंट फैकल्टी नहीं है। इसके साथ ही आईआईपीएस, आईएमएस, स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स जैसे बड़े विभागों में भी फैकल्टी की संख्या कम है।

By: अभिषेक वर्मा

Published: 07 Jun 2018, 08:01 AM IST

नैक के दौरे से पहले कम से कम १५० की भर्ती जरूरी, आउटसोर्सिंग से दूर होगी कर्मचारियों की कमी

इंदौर.

देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में फैकल्टी और स्टाफ की कमी होती जा रही है। विभागों में फैकल्टी नियुक्त करने के लिए दो बार प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन, एक भी भर्ती नहीं हो पाई। इधर, शासन से स्टाफ की भर्ती की मंजूरी भी नहीं मिल रही है। इस हालात से निपटने के लिए यूनिवर्सिटी ने फैकल्टी को तीन साल के कांट्रेक्ट और कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग पर रखने का निर्णय लिया है। परमानेंट नियुक्त न कर कांट्रेक्ट पर फैकल्टी रखने से यूनिवर्सिटी को सालाना १० करोड़ रुपए से ज्यादा की बचत का भी अनुमान है।

तक्षशिला स्थित विभागों में करीब १८० फैकल्टी की जरूरत है। स्कूल ऑफ कॉमर्स, स्कूल ऑफ सोशल साइंस और स्कूल ऑफ लैंग्वेज में तो एक भी परमानेंट फैकल्टी नहीं है। इसके साथ ही आईआईपीएस, आईएमएस, स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स जैसे बड़े विभागों में भी फैकल्टी की संख्या कम है। हर साल इनकी भरपाई गेस्ट फैकल्टी को बुलाकर की जा रही है। अब इससे काम नहीं चलेगा। क्योंकि अगले साल फरवरी में नैक का दौरा प्रस्तावित है। छात्रों की संख्या के लिहाज से परमानेंट फैकल्टी की कमी पाई जाने पर नैक की ग्रेडिंग में यूनिवर्सिटी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। नैक के पिछले दौरे में जब फैकल्टी की कमी का सवाल उठा तो यूनिवर्सिटी ने भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी देकर बचाव किया था। यूनिवर्सिटी की आर्थिक स्थिति इतनी भी मजबूत नहीं है कि इतनी संख्या में नियमित फैकल्टी भर्ती करें। पर्याप्त फंड नहीं होने से दो बार स्थायी भर्ती की प्रक्रिया टाल चुकी है। इसलिए तीन-तीन साल के कांट्रेक्ट पर फैकल्टी रखने का प्रस्ताव तैयार किया है। तीन साल पहले होगा रिन्यूअल कांट्रेक्ट पर रखे गए फैकल्टी की समय-समय पर समीक्षा भी की जाएगी। काम-काज के हिसाब से इनका कांट्रेक्ट तीन साल से पहले ही रिन्यू होगा। जो फैकल्टी कसौटी पर खरे नहीं उतरेंगे उनकी जगह दूसरे फैकल्टी भर्ती किए जाएंगे।

एक पोस्ट पर ५५ हजार महीने की बचत

नियमित फैकल्टी का वेतन ८० हजार से एक लाख रुपए है। जबकि कांट्रेक्ट फैकल्टी के लिए प्रतिमाह ३५ हजार रुपए निर्धारित हुए है। इस लिहाज से सिर्फ एक ही फैकल्टी पर महीने के ५५ हजार और साल के ६ लाख ६० हजार रुपए बचेंगे। १५० फैकल्टी पर वार्षिक अंतर ९ करोड़ ९० लाख रुपए तक पहुंच रहा है। कुलपति प्रो.नरेंद्र धाकड़ ने बताया, कांट्रेक्चुअल फैकल्टी की भर्ती का प्रस्ताव तैयार हो चुका है। सप्ताहभर में इसके आवेदन की घोषणा कर दी जाएगी।
कर्मचारियों की कमी दूर करने की भी योजना तैयार

कर्मचारियों की कमी भी परेशानी बनी हुई है। एक ओर नई भर्ती नहीं हो रही दूसरी ओर हर महीने कर्मचारी रिटायर हो रहे है। इससे दैनिक काम-काज प्रभावित होने लगा है। भर्ती की मंजूरी नहीं मिलने पर यूनिवर्सिटी ने आउटसोर्सिंग पर कर्मचारी रखने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। रजिस्ट्रार डॉ.अजय वर्मा ने बताया, मौजूदा कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ा है। छात्र भी प्रभावित हो रहे है। आउटसोर्सिंग से रखे जाने वाले कर्मचारियों को कलेक्टोरेट दर पर भुगतान किया जाएगा।

अभिषेक वर्मा
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned