इ-मैनेजमेंट में फेल हुई यूनिवर्सिटी, यूजीसी को १५ साल बाद ब्याज सहित लौटाना पड़ी ग्रांट

- सेंटर ऑफ पोटेंशियल ऑफ एक्सीलेंस के लिए मिले थे तीन करोड़ रुपए
- बिल्डिंग बनाने की पहली शर्त भी नहीं की पूरी

By: amit mandloi

Published: 24 May 2018, 06:12 AM IST

इंदौर.

देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी प्रबंधन की लाख कोशिशों के बावजूद इ-मैनेजमेंट सेंटर के लिए मिली ग्रांट आखिरकार लौटाना पड़ी है। १५ साल पहले यूजीसी ने देश के पहले सेंटर के लिए डीएवीवी को चुना था। यूनिवर्सिटी ने पौने दो करोड़ रुपए के यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट के साथ बाकी राशि के ब्याज सहित करीब दो करोड़ रुपए लौटाए है। यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट मान्य नहीं हुए तो ये राशि भी ब्याज के लिए चुकाना होगी।


यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन) ने २००२-२००३ में एक्सीलेंस सेंटरों के लिए देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी को ई-मैनेजमेंट के लिए चुना था। इसके लिए तीन करोड़ रुपए सीड मनी दी गई। पहली शर्त ही थी कि इ-मैनेजमेंट सेंटर के लिए अलग से बिल्डिंग बनाई जाएगी। लेकिन, २००८ तक इस राशि का इस्तेमाल ही नहीं किया गया। शिकायत मिलने पर यूजीसी की टीम निरीक्षण के लिए आई तो इ-मैनेजमेंट सेंटर के नाम पर अलग-अलग विभागों में हुई पीएचडी का ब्यौरा रख दिया। इनमें स्कूल ऑफ फ्यूचर स्टडीज, स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, आइएमएस, आइआइपीएस, स्कूल ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स, स्कूल ऑफ कम्प्यूटर साइंस शामिल थे। इन पीएचडी को टीम ने नकार दिया और सेंटर की बिल्डिंग दिखाने के लिए कहा। तब प्रभारी कुलपति डॉ. राजकमल ने हाथ खड़े कर दिए थे। इसके बाद से ही यूजीसी ने सेंटर बंद कर दिया। २००५ में प्रो. गणेश कावडिय़ा ने जब स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के लिए सेंटर फॉर एक्सीलेंस का आवेदन यूजीसी को दिया तो इ-मैनेजमेंट सेंटर के लिए जारी ग्रांट का तकाजा हुआ।

कम्प्यूटर साइंस की बिल्डिंग में लगाया पैसा !
यूजीसी ने पिछले दिनों यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी कर इ-मैनेजमेंट सेंटर की ग्रांट लौटाने को पत्र लिखा था। बाद में इसका ब्याज भी देने का पत्र यूनिवर्सिटी को मिला। इस सख्ती का कारण यूजीसी को हुई एक शिकायत को बताया जा रहा है। दरअसल, यूजीसी को शिकायत हुई थी कि इ-मैनेजमेंट सेंटर के लिए मिली राशि का इस्तेमाल स्कूल ऑफ कम्प्यूटर साइंस की बिल्डिंग बनाने में खर्च कर दिया गया। जबकि जिन खर्च के यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट यूजीसी को दिए वे भी इ-मैनेजमेंट के दायरे में नहीं आते।

इ-मैनेजमेंट सेंटर के लिए ३ करोड़ रुपए मिले थे। कुछ राशि यूटिलाइज हो चुकी है। बाकी राशि बैंक में थी, जिसका ब्याज जमा हो रहा था। ये ही २ करोड़ रुपए यूजीसी को लौटाए है।

- प्रो.नरेंद्र धाकड़, कुलपति

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