पुलिस, सेना व परिवार के 50 फीसदी को पहले से नहीं पता थी डायबिटीज

पुलिस, सेना व परिवार के 50 फीसदी को पहले से नहीं पता थी डायबिटीज

Amit S. Mandloi | Publish: Nov, 14 2017 08:58:31 PM (IST) Indore, Madhya Pradesh, India

विश्व मधुमेह दिवस पर कई आयोजन, शिविर का आयोजन संस्था प्रयास फॉर ऑल डायबिटीज सोसायटी द्वारा किया गया था।

इंदौर. विश्व मधुमेह दिवस पर शहर में जांच व जागरुकता के कई आयोजन हुए। पुलिस, सेना व उनके परिजनों की जांच के लिए चार स्थानों पर शिविर लगाए गए। ७४५ की जांच की गई, इनमें से ६३ को डायबिटीज निकली, इनमें से ५० फीसदी को पहले से जानकारी नहीं थी।डायबिटीज

डॉ. संदीप जुल्का ने अपनी टीमों के साथ डीआरपी लाइन, पलासिया थाना, प्रथम बटालियन और एनसीसी ९वीं बटालियन में जांच शिविर लगाए। डॉ. जुल्का ने बताया, पुलिस व सैन्य कर्मियों के साथ परिवार के लोगों की भी शुगर, बीएमआई, आरबीएस, एलएफटी, बीपी के साथ मोटापे की जांच की गई। कुल ७४५ लोगों की जांच में से ६३ को डायबिटीज की पुष्टी हुई। आधे लोगों को बीमारी के बारे में पहले से जानकारी नहीं थी। शिविर में फार्मास्यूटिकल्स कंपनियों का सहयोग रहा। डीआरपी लाइन में एएसपी डॉ. प्रशांत चौबे व थाना पलासिया परिसर में एएसपुी बिट्टू सहगल उपस्थिति थे। चैकअप की रिपोर्ट के आधार पर उचित उपचार व शरीर को स्वस्थ्य बनाए रखने के संबंध में उचित सलाह दी गई।

यहां भी हुए आयोजन

- चोइथराम सब्जी मंडी में डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ. भरत साबू की अगुवाई में किसानों, मजदूरों, व्यापारियों की नि:शुल्क शुगर जांच की गई। शिविर का आयोजन संस्था प्रयास फॉर ऑल डायबिटीज सोसायटी द्वारा किया गया था। जांच के साथ जागरुकता सामग्री भी बांटी गई। इस दौरान अमर दुबे, अजय जैसवाल, रविन्द्र भदौरिया आदी मौजूद थे।

- जिला अस्पताल में मधुमेह जागरुकता रैली का आयोजन किया गया। रैली को सिविल सर्जन डॉ. एमएस मंडलोई ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान डॉ. दिलीप आचार्य, डॉ. हेमंत द्विवेदी, डॉ. आरके सौनवलिया आदी मौजूद थे।

- दी आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा आयुर्वेदिक शिविर का आयोजन पंचकर्मा सेंटर स्कीम 78 में किया गया। जांच डॉ. दिनेश कुरूप व प्रीति सोनी ने की। डॉ. कुरूप ने बताया, आयुर्वेद के अनुसार 20 तरह के प्रमेह (डाईबीटीसी टाइप) होते हैं। उसका कारण वात, पित, कफ का इम्बैलेंस है। 4 तरह के प्रमेह, वात के, 6 पित और 10 कफ के इमबेलेंस के कारण होते हैं। उनमें से डाईबीटीस टाइप 2 अत्याधिक कफ बढऩे से होती है। आयुर्विक दवाई, पंचकर्मा, शिरोधारा, नियमित व्यायाम, और संतुलित भोजन एवं संयमित जीवन शैली से कफ को कंट्रोल किया जाता है। जैसे ही कफ बैलेंस होता है पैंक्रियास फिर से एक्टिवेट होते है और प्राकृतिक तरीके से इन्सुलिन सीक्रेट करने लगते हैं। जिससे धीरे धीरे दवाई और इनसुलीन से पेशेंट को छुटकारा मिल जाता है और मरीज सामान्य जिंदगी जीने लगता है।

 

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