सात लाइन लिखवाने में लग गए सात घंटे, रिपोर्ट फिर भी दर्ज नहीं की

अब समझ आया... जनता थाने जाने से क्यों घबराती है...

इंदौर. आम जनता के लिए थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज कराना कितना मुश्किल है, इसका एक उदाहरण गुरुवार को सामने आया। रिपोर्ट के नाम पर महज सात लाइन लिखवाने में फरियादी को सात घंटे लग गए फिर भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की। परेशानी के सात घंटे कुछ यूं गुजरे-
मनोज मेहता
समय : सुबह ८.१५
स्थान : पीपल्याहाना चौराहा
सेहत के लिए साइकिल से जिम जा रहे नरसिंग मोहनवानी (५७) को पीपल्याहाना चौराहे से कृषि कॉलेज की ओर जाते समय एक दोपहिया (एमएच १९ सीजी ०६८४) से रांग साइड आए युवक ने जोरदार टक्कर मार दी। मोहनवानी गिर पड़े और उनके हाथ, कमर व कोहनी में चोट लगी। युवक रांग साइड से ही भाग निकला। मोहनवानी टूटी साइकिल रिक्शा में डालकर घर पहुंचे और फिर जिमखाना क्लब गए और साथियों को घटना बताई। तय हुआ कि युवक को सबक सीखाने के लिए पुलिस में शिकायत की जाए।
सुबह : ९.४०,
स्थान : तिलक नगर थाना
थाने पर मौजूद पुलिसकर्मी ने घटनास्थल पूछा और आजाद नगर थाना क्षेत्र का मामला बताते हुए रवाना कर दिया।
सुबह : ९.५५

स्थान : आजाद नगर थाना
थाने के रिसेप्शन में बैठे पुलिसकर्मी को घटना की जानकारी देकर शिकायत दर्ज करने को कहा। उन्होंने कहा, मैडम दर्ज करेंगी। उनकी ड्यूटी ९ बजे से है, लेकिन अभी आई नहीं है। इंतजार करें।
सुबह- १०.०५ : पुलिसकर्मी ने कहा, अंदर हेड साहब बैठे हैं... उनसे कहकर मैडम को फोन करवा दो। मोहनवानी ने ऐसा ही किया। हेड साहब बोले...मैडम अभी आती ही होंगी।
सुबह १०.१५ बजे : मोहनवानी ने मौजूद पुलिसकर्मी से कहा, सर आप शिकायत दर्ज कर लें। वे बोले, अरे साइन तो मैडम को ही करना पड़ेगा। रुक जाओ... अच्छा हेड साहब से कहो कि पहले मेडिकल करवा दें, तब तक मैडम आ जाएंगी। मोहनवानी हेड साहब के पास गए। करीब १० मिनट इधर-उधर करने के बाद उन्होंने अलमारी से मेडिकल करवाने का फार्म निकाला। फिर थोड़ी देर बाद उनके बीच कार्बन पेपर लगाकर आलपिन लगाई। अपने किसी माहतत को आवाज लगाई। ये फॉर्म भर दो। एक ने मना कर दिया तो रिसेप्शन डेस्क पर बैठे पुलिसकर्मी को इसे भरने को कहा और एक अन्य को मेडिकल के लिए ले जाने को कहा।
सुबह : १०.४० : पुलिसकर्मी को लेकर मोहनवानी अपने साथी की कार से एमवाय अस्पताल के लिए निकल ही रहे थे कि मैडम आ गईं। बोलीं ठीक है बाद में दर्ज कर लेंगे।
सुबह : ११ बजे से दोपहर १ बजे तक : एमवायएच में मेडिकल की प्रक्रिया के लिए मोहनवानी और पुलिसकर्मी भटकते रहे। कभी डॉक्टर का इंतजार किया तो एक एक्सरे मशीन खराब होने का कहकर दूसरी बिल्डिंग में भेजा। वहां से यह कहकर लौटा दिया, यह एक्सरे तो वहीं होगा। फिर लंबे इंतजार के बाद एक्सरे हुआ।
दोपहर १.२० बजे : मोहनवानी आजादनगर थाना पहुंचे और मैडम से रिपोर्ट दर्ज करने का निवेदन किया। मैडम बोलीं... रिपोर्ट करवाना ही है...? मोहनवानी बोले हां, तो फिर कम्प्यूटर में रिपोर्ट लिखने लगीं। नाम, पता, मोबाइल नंबर लेने के बाद जैसे ही टक्कर मारने वाली गाड़ी का नंबर पूछा।, तो महाराष्ट्र को नंबर सुनते ही बोलीं... इसे कैसे पकड़ेंगे। इससे तो रिपोर्ट करवाने पर आप ही परेशान हो जाओगे। फिर साथी पुलिसकर्मी से पूछा, ये नंबर बाहर का बता रहे हैं क्या करें? आरटीओ से पूछता हूं। और दूसरे कमरे में जाकर बैठ गए। कुछ देर इंतजार के बाद मैडम उनके कमरे तक गईं। इस बीच थाने की लाइट चली गई। लाइट आई तो मैडम भी आ गईं और फाइल खोलकर बोंली... अरे मैं सेव करना भूल गई...सब उड़ गया। फिर से रिपोर्ट लिखने की प्रक्रिया शुरू की। इस बीच संभवत: टीआई साहब को भी फोन लगाया होगा, जो शायद उन्होंने नहीं उठाया होगा। थोड़ी देर में मैडम का फोन बजा किसी परिचित का होगा..उनसे बात कर फुरसत हुईं थीं कि फिर फोन घनघना उठा। इस बार शायद टीआई साहब थे...बोली,ं सर एक्सीडेंट की रिपोर्ट लिखाने फरियादी बैठे हुए हैं। टक्कर मारने वाला वाहन महाराष्ट्र का है...क्या करें। टीआई साहब ने उधर से जो भी निर्देश दिया हो... मैडम बोली... हम नंबर की तस्दीक करेंगे उसके बाद रिपोर्ट लिखेंगे। इस वक्त घड़ी को कांटे दोपहर के ढ़ाई बजा रहे थे। यानि कम्प्यूटर पर लिखी महत सात लाइन लिखवाने के लिए फरियादी सुबह ९.३० से दोपहर ढ़ाई बजे यानि पांच घंटे परेशान हुआ और अंत में रिपोर्ट भी नहीं लिखी जा सकी।

क्या अफसर... जवाब देना चाहेंगे?
निराश होकर लौटते मोहनवानी के मन में उस वक्त जो सवाल उठे, वो उन्होंने अपने साथी से साझा करते हुए कहा, यार..घटनास्थल के पास ही तिलकनगर थाना था, वहीं रिपोर्ट दर्ज क्यों नहीं हुई? यहां पर भी सुबह से दोपहर हो गई..नहाना, पूजा...खाना..सब रह गया और रिपोर्ट भी दर्ज नहीं हुई। अगर कोई बड़ी घटना हो जाती... तो क्या ऐसे ही महाराष्ट्र की गाड़ी होने पर पुलिस अपराधी को छोड़ देती? जवाब तो मेरे पास भी नहीं है...शायद...आज पुलिस के आला अधिकारी दे सकें।

अर्जुन रिछारिया Incharge
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