इन 8 तरीकों से कीजिए चेक, कहीं आप भी तो नहीं ‘डिजिटल डिस्ऑर्डर’ के शिकार

इन 8 तरीकों से कीजिए चेक, कहीं आप भी तो नहीं ‘डिजिटल डिस्ऑर्डर’ के शिकार

By: हुसैन अली

Updated: 18 Dec 2018, 04:47 PM IST

इंदौर. डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल आज की जरूरत बन गया है। डिजिटलीकरण ने हमारे कई काम आसान कर दिए हैं। हमारे कई काम बैठे-बैठे कम्प्यूटर या मोबाइल के जरिए आसानी से होने लगे हैं। लेकिन इन सब सुविधाओं के साथ ही डिजिटल सुविधा ने हमारी जिंदगी को डिस्टर्ब भी किया है और डिजिटल डिस्आर्डर का शिकार बना दिया है। बार-बार सेल्फी लेना, फेसबुक, व्हाट्स एप आदि पर अपलोड करना, मेल, सोशल साइट आदि को बार-बार संभालते रहना, दिनभर इन्हीं में उलझे रहना इस डिस्ऑर्डर के संकेत हैं।

1. छूटने का डर : डिजिटल डिस्ऑर्डर का एक रूप है फियर ऑफ मिसिंग आउट। इसमें यह देखने को मिलता है कि व्यक्ति सोशल साइट पर कोई भी पोस्ट सबसे पहले पढऩे, उसे शेयर करने या उस पर कमेंट करने को लेकर काफी उतावला या उत्सुक रहता है।

2. सेल्फी : माना सेल्फी लेना कोई बुरी बात नहीं है लेकिन हर दम इसी धुन में लगे रहना, इसके आदी होने का लक्षण है। आप दिन में पांच छह बार से ज्यादा सेल्फी लेते हैं और उसे सोशल साइट्स पर पोस्ट करते रहते हैं तो आप इस एडिक्शन की श्रेणी में आते हैं।

3. डिजिटल पाउटिंग : यह भी देखा जाता है कि आज के टेक सैवी बच्चे, किशोर या युवा किसी मुद्दे पर विवाद से बचने के लिए, रिपोर्ट कार्ड कमजोर आने पर डांट से बचने के लिए अपने ईयरफोन कान में लगा लेते हैं या गैजेट्स पर गेम खेलने लगते हैं।

4. फेसबुक : फेसबुर पर चिपके रहना भी डिजिटल डिस्ऑर्डर का एक रूप है। इसमें एडिक्शन में अपने फोटो आदि पोस्ट करने की सनक और फिर उन पर आने वाले कमेंट्स का बेसब्री से इंतजार रहता है। हर पल वह इसको टटोलता रहता है।

5. इंटरनेट नशा : माना आज हमारे लिए इंटरनेट का इस्तेमाल जरूरत का हिस्सा बन गया है, लेकिन सुबह बिस्तर से उठकर रात को सोते समय तक इंटरनेट पर बिना जरूरत चीजें सर्च करते रहना और इससे चिपके रहना इंटरनेट एडिक्शन का लक्षण है।

6. गेम एडिक्शन : इंटरनेट के गेम्स में भी आप अगर उलझे रहते हैं। आप उन्हें देखते हैं और बिना खेले आप कुछ बेचैनी सी महसूस करते है तो आप गेम एडिक्शन के शिकार हैं। यूं समझिए कि आप गेम नहीं खेल रहे, बल्कि ये कम्प्यूटर गेम आपके साथ खेल रहे हैं और आपको चला रहे हैं।

7. घंटी का भ्रम : फोन पर चिपके रहना भी एक तरह से इसकी लत का शिकार होना ही है। आपको बार-बार यह लगता है कि आपका फोन बज रहा है या वह वाइब्रेट हो रहा है तो आपको संभल जाना चाहिए। इसके मायने हैं आप फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम नामक डिजिटल डिस्ऑर्डर के शिकार हो चुके हैं।

8. व्हाट्सएप ग्रुप : डिजिटल एडिक्शन का एक रूप व्हाट्स एप के रूप में भी देखने को मिल रहा है। व्हाट्स एप में लोग कई-कई गु्रप से जुड़े होते हैं और ऐसे में उनकी आदत बार-बार व्हाट्स एप को संभालने की हो जाती है। ऐसे में उनकी यह आदत कब एडिक्शन में बदल जाती है, उन्हें अहसास ही नहीं होता। और ऐसे में वे बिना जरूरत भी बार-बार व्हाट्स एप पर जाते हैं और घंटों तक उसको खोलकर बैठे रहते हैं। बिना उसे देखे और पोस्ट डाले उन्हें बेचैनी सी महसूस होती है।

हुसैन अली
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