दिग्विजय सिंह बोले मुझे नहीं बनना था नेता

ओल्ड डेलियंस ने साझा किए हॉफ पैंट, पीटी, प्लेग्राउंड और क्लासरूम के दिलचस्प किस्से

By: हुसैन अली

Published: 03 Mar 2019, 01:03 PM IST

डेली कॉलेज की एलुमनी मीट: प्रदेश के पूर्व सीएम और ओल्ड डेलियन दिग्विजयसिंह ने किया खुलासा...
इंदौर. प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव दिग्विजयङ्क्षसह ने शनिवार को विद्यार्थी जीवन के गुरुकुल डेली कॉलेज में आयोजित सम्मान समारोह में अपने एक्सीडेंटली पॉलिटिशियन बनने का खुलासा किया। डेली कॉलेज के विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं पर वे बोले, मैं राजनीति में स्वेच्छा से नहीं आया। जब मैं इंजीनियरिंग कॉलेज में था, तब वोट करने तक नहीं जाता था। इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री करना चाहता था, लेकिन पिता के देहांत के कारण मुझे घर लौटना पड़ा। राजनीति का कॅरियर भी अनचाहे ही अपनाना पड़ा। डेली कॉलेज के 9पूर्व छात्र इस बार विधायक हैं, जिनमें एक विधानसभा अध्यक्ष, तीन मंत्री हैं। ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी शिक्षण संस्था के इतने अधिक लोगों को प्रतिनिधित्व का मौका मिला है। पूर्व छात्रों के सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि दिग्विजयसिंह रहे। विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति, ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह, कृषि मंत्री सचिन यादव और पर्यटन मंत्री सुरेंद्रसिंह बघेल, विधायक लक्ष्मणसिंह, नागेंद्रसिंह, ब्रजेंद्रप्रताप सिंह, सुदेश राय और राज्यवर्धनसिंह ने भी उपस्थिति दर्ज कराई।
नरसिंहगढ़ विधायक राज्यवर्धनसिंह ने कहा, हमारे पीएम हिंदी में भाषण देते हैं। हमें भी मातृभाषा को आगे बढ़ाने के लिए काम करना चाहिए। आज जितने युवा छात्र हमारे सामने बैठे हैं, इन्हें देखकर महसूस होता है, काश! हमारे वे पल लौट आएं। मेरा स्टूडेंट्स से यही कहना है, संघर्ष करते रहिए सफलता अवश्य मिलेगी। विधायक सुदेश राय ने कहा, हमारी उपलब्धि में अगर किसी का हाथ रहा है तो वह डेली कॉलेज का है। डेली कॉलेज से ही नींव का निर्माण हुआ है।

‘मैं स्वेच्छा से राजनीति में नहीं आया’
दिग्विजयसिंह ने डेली कॉलेज के स्टूडेंट्स की जिज्ञासाओं का समाधान किया। स्टूडेंट्स ने उनके खुद के बारे में, लोगों, राजनीति व खेल सभी क्षेत्रों से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका दिग्विजयसिंह ने जवाब दिया। यहां पेश हैं कुछ चुनिंदा सवाल और उनके जवाब।

प्रश्न: जनता की अपेक्षा में पहले व वर्तमान में कितना अंतर आया है?
उत्तर: पुराने समय में न तो सूचना के इतने संसाधन थ, न जागरूकता। गूगल ने लोगों के ज्ञान के साथ ही उनकी अपेक्षाओं में वृद्धि की, जो पढऩे-लिखने में अच्छे हैं वे अपनी जगह पहुंच जाते हैं और जो बच जाते हैं वे राजनीति में आ जाते हैं।
प्रश्न: हर खेल में सक्रिय रहने के बावजूद कौन सा स्पोट्र्स ज्यादा पसंद करते हैं?
उत्तर: पहले ऑलराउंडर होने की डिमांड होती थी, इसीलिए क्रिकेट, टेनिस और फुटबॉल हर चीज में रुचि थी। लेकिन अब वक्त आ गया है कि किसी एक पर ध्यान केंद्रित कर उसमें मास्टर बना जाए।
प्रश्न: अगर राजनेता नहीं होते तो क्या करते?
उत्तर: मैंने इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री के लिए अप्लाय किया था, लेकिन पिता के देहांत के कारण कर नहीं पाया। मैं कभी राजनीति में नहीं आना चाहता था। जब इंजीनियरिंग कॉलेज में था, तब वोट करने नहीं जाता था। मैं राजनीति में स्वेच्छा से नहीं आया, लेकिन ईश्वर मेरे प्रति दयालु रहा और मैं ८ में से ७ बार चुनाव जीता।
प्रश्न: किस एजेंडा को ध्यान में रखकर लोग वोट करते हैं?
उत्तर: वर्तमान समय में जनता की महत्वाकांक्षाएं अधिक हैं। डेवलपमेंट एजेंडा होता है, लेकिन उसकी आइडियोलॉजी अलग-अलग होती है। मेरे हिसाब से जनता द्वारा चुने व्यक्ति का पहला लक्ष्य हेल्थ, एजुकेशन, लाइवलीहुड के साथ लोगों को ध्यान में रखकर किया गया विकास होता है। मुझे लगता है, लोगों को एम्पॉवर करने की
जरूरत है।

पूर्व छात्रों ने ये कहा...
विधानसभा अध्यक्ष प्रजापति ने कहा, दिग्विजयसिंह उस समय ताजे-ताजे डेलियन बने थे। उनकी फिजिक और बॉडी आकर्षक थी। जब वे हिट करते थे तो पैर झनझना जाते थे। आज दोस्तों से घर के परांठे और अचार मंगवाने के दिन भी याद आ रहे हैं।

विधायक ब्रजेंद्रप्रताप सिंह ने कहा, कहा जाता है, जो कुछ नहीं कर पाता राजनीति में आ जाता है पर मैं ऐसा नहीं मानता। मेरा मानना है, राजनीति में ऐसे लोगों को आना चाहिए जो अच्छे इंस्टिट्यूट से निकलकर राजनीति के क्षेत्र में बेहतर कर सकें।

विधायक प्रियव्रतसिंह ने कहा, मैं एक डे बोर्डर था और जब छुट्टियां खत्म होने पर मुझे वापस आना होता था तो सोचता था, किसी तरह ज्यादा से ज्यादा लेट हो जाऊं, आज हर ओल्ड डेलियन लौटकर आना चाहता है। जो राजनीति में आना चाहते हैं, उन्हें कहना चाहता हूं कि इस फील्ड में कोई जॉब सिक्योरिटी नहीं है।

पर्यटन मंत्री सुरेंद्रसिंह बघेल ने कहा, जब पैरेंट्स को छोडक़र बोर्डिंग स्कूल में आए तो होम सिकनेस हुई, लेकिन बाद में सबकुछ अपना-सा लगने लगा। हमने ड्रेसिंग सेंस, टेबल मैनर और खुद को प्रजेंट करने का तरीका यहीं से सीखा है।

नागोद विधायक नागेंद्रसिंह बोले, मैंने पूरी जिंदगी पढ़ाई अंग्रेजी में की, लेकिन प्रयोग हिंदी भाषा का अधिक किया। आपसी चर्चा में अंग्रेजी में बात करता हूं, लेकिन भाषण हिंदी में ही देता हूं। उन्होंने कहा, आज इस मंच पर कितने विधायक बैठे हैं। उन्हें हाव-भाव और बोलचाल से पता लगाना मुश्किल होगा, हम किस पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये बॉन्डिंग हमें डेली कॉलेज से ही मिली है।

हुसैन अली
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