scriptDisappointed members of Bobby's colony... when will justice be served? | बॉबी के कब्जे वाली कॉलोनी के सदस्य मायूस...खड़े सवाले कब मिलेंगा न्याय ? | Patrika News

बॉबी के कब्जे वाली कॉलोनी के सदस्य मायूस...खड़े सवाले कब मिलेंगा न्याय ?

मामल में सहकारिता विभाग की भूमिका संदिग्ध, मुहिम के बावजूद भी नहीं मिले अब तक प्लॉट

इंदौर। जमीन के जालसाज बॉबी छाबड़ा के हस्तक्षेप वाली जागृति गृह निर्माण संस्था के सदस्यों को राजगृही कॉलोनी में प्लॉट मिलने का इंतजार है। उन्हें मालूम है कि मुख्यमंत्री के जमीन के जालसाजों के खिलाफ कड़े रुख और कलेक्टर की सख्ती के चलते अभी प्लॉट मिल गए तो ठीक, नहीं तो कभी नहीं मिल पाएंगे। सहकारिता के साथ प्रशासनिक विभाग के रवैये से भी वे संतुष्ट नहीं हैं। मानना है कि जैसी कार्रवाई होना चाहिए, वैसी नहीं हो रही है।

इंदौर

Published: January 21, 2022 11:21:43 am

तीन दशक से गृह निर्माण संस्थाओं के सदस्य भटक रहे थे, जिन्हें मुख्यमंत्री ने मुहिम चलाकर न्याय दिलाने का प्रयास किया है। कलेक्टर मनीष सिंह ने रणनीति के तहत अयोध्यापुरी, महालक्ष्मी और पुष्प नगर के सैकड़ों सदस्यों को प्लॉट दिला दिए, लेकिन जागृति संस्था की राजगृही कॉलोनी की गुत्थी आज तक सुलझ नहीं पाई। तीन साल से उसकी जांच ही चल रही है। इसके सदस्य बड़े दुखी हैं, क्योंकि उसे ज्यादा उलझी हुई देवी अहिल्या सोसायटी व अन्य संस्थाओं के सदस्यों को प्लॉट मिल गए। वे अभी भी न्याय को भटक रहे हैं। उन्हें समझ में आ रहा है कि अभी प्लॉट
मिल गए तो ठीक, नहीं तो कभी नहीं मिलेंगे। ये काम मनीष सिंह के रहते नहीं हो पाएगा तो दूसरा भी कोई कलेक्टर नहीं करा पाएगा। ऊपर से मुख्यमंत्री की जमीन के जालसाजों के खिलाफ कार्रवाई करने की खुली छूट अलग मिली हुई है। ऐसे में प्लॉट नहीं मिले तो भटकना पड़ेगा।
बॉबी के कब्जे वाली कॉलोनी के सदस्य मायूस...खड़े सवाले कब मिलेंगा न्याय ?
बॉबी के कब्जे वाली कॉलोनी के सदस्य मायूस...खड़े सवाले कब मिलेंगा न्याय ?
भूमिका संदिग्ध
इधर, राजगृही के मामले में सहकारिता विभाग की भूमिका संदिग्ध है। साधारण सभा के लिए विभाग के अफसरों से अनुमति मांगी थी, जो नहीं मिली। बताते हैं कि छाबड़ा के संबंध एक अधिकारी से काफी मधुर हैं। इस व्यवहार के चलते उन्होंने गतिविधियों पर रोक लगा रखी है। वे अनुमति नहीं होने दे रहे हैं। बताते हैं कि एक अफसर तो रिटायर होने जा रहे हैं, उनके जाने का इंतजार हो रहा है। सदस्यों को आशंका है कि मुहिम ठंडी पड़ी या कलेक्टर का प्रमोशन हो गया तो उन्हें न्याय कौन दिलाएगा।
क्यों नहीं हुई जमीन सरेंडर
सहकारिता विभाग तो साधारण सभा की अनुमति नहीं दे रहा है, लेकिन कई और काम भी हैं, जो अब तक नहीं हो सके। देवी अहिल्या व मजदूर पंचायत की जमीनों को फर्जी तरीके से खरीदने वालों से सरेंडर करवा दिया था। शपथ पत्र के बाद में कोर्ट की कार्रवाई भी कराई गई। जो पीछे हटा, उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। अयोध्यापुरी उसका बड़ा उदाहरण है। ऐसे में राजगृही की जमीन खरीदने वाली दीप गणेश और सविता गृह निर्माण संस्था पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
अब तक जमीन सरेंडर नहीं हुई और दोनों ही प्रशासन को झूला रहे हैं। सालभर बाद भी प्रशासन उनकी बातों में आ रहा है जिस पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। कार्रवाई करनी हो तो कहीं से भी गड़बड़ी निकालकर मुकदमा दर्ज कर दिया जाता है, लेकिन सविता के मामले में बताया जा रहा है कि पूर्व में मुकदमा दर्ज हो गया। इधर, फर्जी तरीके से 118 लोगों को जमीन बेच दी गई, जिनको आज तक कब्जा नहीं मिला। वे सदस्य भी न्याय के लिए भटक रहे हैं।

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