बिजली कटौती पर आमने-सामने भाजपा-कांग्रेस, एक-दूसरे पर लगा रहे ये आरोप

बिजली कटौती पर आमने-सामने भाजपा-कांग्रेस, एक-दूसरे पर लगा रहे ये आरोप

Hussain Ali | Publish: Apr, 23 2019 12:27:36 PM (IST) | Updated: Apr, 23 2019 12:27:37 PM (IST) Indore, Indore, Madhya Pradesh, India

बिजली कटौती पर आमने-सामने भाजपा-कांग्रेस, एक-दूसरे पर लगा रहे ये आरोप

सुधीर पंडित @ इंदौर. लोकसभा चुनाव के पहले इंदौर सहित प्रदेश में अघोषित बिजली कटौती कर कांग्रेस सरकार को बदनाम करने का मामला धीरे-धीरे गरमाता जा रहा है। भाजपा सरकार में ऊर्जा मंत्री रहे पारस जैन ने बिजली कटौती को कांग्रेस सरकार द्वारा बड़े-बड़े अधिकारियों के ट्रांसफर कर लेन-देन का परिणाम बताया, वहीं वर्तमान ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह ने कटौती को पूर्व मंत्री के समय हुए भ्रष्टाचार की देन बताया। सिंह ने कहा कि जांच के बाद भाजपा पर निष्ठा रखने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी।

चुनाव हारने का डर, इसलिए कटौती पर कर रहे कार्रवाई: पूर्व ऊर्जा मंत्री पारस जैन

पूर्व ऊर्जा मंत्री पारस जैन ने कहा, जिसकी सरकार होती है उसका अधिकारी होता है। कांग्रेस सरकार से व्यवस्थाएं नहीं संभल रहीं। सरकार पूरी तरह से भ्रष्टाचार में लिप्त है। कर्मचारियों को निलंबित करने से व्यवस्थाएं नहीं सुधरेगी। उन्होंने आरोप लगाया, कांग्रेस ने सरकार बनाते ही बड़े-बड़े लेन-देन कर अधिकारियों को बदला उसी का बिजली कटौती परिणाम है। प्रदेश में व्यवस्थाएं तो बेहतर हैं, उसको अच्छे कमान की जरूरत है। मुख्यमंत्री कमलनाथ तो सीएम हाउस से बाहर तक नहीं निकलते। जब हमारी सरकार आई तो हमने भी उन्हीं अधिकारियों-कर्मचारियों से काम लेकर प्रदेश में अच्छी बिजली व्यवस्था दी। कांग्रेस लोकसभा चुनाव को लेकर डर गई है। बिजली गुल होने पर नुकसान होगा, इसके चलते कार्रवाई कर रही है। हमारे ऊपर जो भी आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए हैं, उससे काम नहीं चलेगा, अब जनता सब कुछ समझती है।

पूर्व मंत्री की नाक के नीचे हो रहा था भ्रष्टाचार: ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह

ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह ने आरोप लगाया, पूर्व मंत्री पारस जैन के साथ मिलकर बिजली कंपनियों में भ्रष्टाचार हो रहा था। उनके जिले के सुसनेर विधायक ने लिखित में शिकायत की, आईपीडीएस योजना में काफी भ्रष्टाचार हुआ है। उज्जैन में पदस्थ कैलाश शिवा व अधीक्षण यंत्री को शिकायत के आधार पर चुनाव अयोग ने हटाया। वैसे भी जैन की उस समय चलती नहीं थी, पूरा काम तो कोई और देखती थीं। इंदौर के भी जिन अफसरों की शिकायत भाजपा की निष्ठा के प्रति मिली है, उनकी जांच कर शीघ्र्र हटाएंगे। हमने कोई लेन-देन कर बड़े अधिकारियों के तबादले नहीं किए। राजनीतिक षड्यंत्र के हमें प्रमाण मिले हैं। सीहोर, उज्जैन, खरगोन, बड़वानी में भाजपा के प्रति निष्ठा साबित होने पर ही कर्मियों पर कार्रवाई हुई।

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