बेटा कलेक्टर या तहसीलदार बन गया तो बढ़ जाती है दहेज की डिमांड

- देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह
- 2017-18 और 2018-19 बैच के टॉपर का हुआ सम्मान
- 2017-18 और 2018-19 बैच का संयुक्त दीक्षांत समारोह
- 16 संकाय के 90 विद्यार्थी हुए सम्मानित
- 113 गोल्ड और 22 सिल्वर मैडल से छात्रों का सम्मान
- 133 छात्रों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई

By: Hitendra Sharma

Published: 20 Feb 2021, 08:08 AM IST

इंदौर. देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में अलग-अलग संकाय के होनहार विद्यार्थियों को मैडल से सम्मानित हुए। राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि लड़कियों ने अपनी काबिलियत दिखाकर ये मैडल हासिल किए लेकिन, आज भी समाज में लड़की की शादी में गोल्ड और दहेज की मांग की जाती है। जो लड़के ज्यादा पढ़-लिख जाते हैं यानी कलेक्टर या तहसीलदार बन जाते हैं उनके घरवाले तो और भी ज्यादा दहेज की डिमांड करते हैं।

राज्यपाल ने कहा कि दहेज प्रथा और बाल विवाह पूरी तरह से बंद होना चाहिए। इसके लिए व्यापक स्तर पर आंदोलन चलाने की आवश्यकता है। एमबीबीएस की छात्रा कृति जैन ने सर्वाधिक आठ गोल्ड मैडल हासिल किए। इसके बाद तृप्ति जैन को चार और अंजली रघुवंशी को तीन गोल्ड मैडल से नवाजा गया। दीक्षांत समारोह में इसरो के पूर्व चेयरमैन डॉ. एएस किरण कुमार, उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव, सांसद शंकर लालवानी, मंत्री तुलसी सिलावट और मंत्री उषा ठाकुर भी उपस्थित थे।

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तो ही सफल होगी नई शिक्षा नीति
कुलाधिपति ने समारोह की शुरुआत में सीधी जिले में दुर्घटनाग्रस्त बस के मृतकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने नई शिक्षा नीति पर कहा कि 2030 में 50 फीसदी युवाओं को उच्च शिक्षा से जोडऩे का लक्ष्य रखा गया है लेकिन, ये तभी संभव है जब अभी से ही पहली कक्षा में सौ फीसदी उपस्थिति सुनिश्चित हो। इसके बाद हर कक्षा में पढ़ाई छोडऩे वालों का कारण जानकर उन्हें फिर से शिक्षा से जोडऩे के प्रयास करना जरूरी है। अब तक की प्रणाली में शिक्षा पुराने ढर्रे पर चलती आ रही है। नई नीति में 70 फीसदी सिलेबस केंद्र और बाकी सिलेबस स्थानीय स्तर पर तय होगा। कुलाधिपति ने कहा कि ये शोध का विषय है कि आने वाले 10 से 15 साल में देश कैसे आत्मनिर्भर होगा।

भारत को फिर से बनाना है विश्वगुरु
इसरो के पूर्व चेयरमैन डॉ. कुमार ने डिग्री पूरी करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देने के साथ-साथ इसरो की उपलब्धियां बताई। उन्होंने कहा कि साइंस और टेक्नोलॉजी ने हमें टूल दिए हैं मगर, ये जानना जरूरी है कि इनका सही तरीके से कैसे इस्तेमाल हो सकता है। हमें टेक्नोलॉजी को ऐसे धरातल पर लाना है कि जिससे प्रकृति का नुकसान न हो। शैक्षणिक संस्थानों को अच्छा शिक्षण-प्रशिक्षण देना चाहिए। सदियों पुराने विज्ञान का इस्तेमाल करते हुए भारत को फिर से विश्वगुरु बनाना है।

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नियमित पढ़ाई से मिला सोना
आठ गोल्ड मैडल जीतने वाली डॉ. कृति जैन फिलहाल एमडी इन रेडियोडायज्नोसिस कर रही है। कृति ने बताया कि एमबीबीएस में दाखिला मिलने के बाद भी मैंने वैसे ही नियमित पढ़ाई जारी रखी जैसे दाखिले के लिए की थी। हर दिन मेरे लिए परीक्षा का दिन था। उसी का परिणाम है कि ज्यादातर विषय में मैं टॉप कर पाई हूं। आगे भी ऐसा ही प्रदर्शन जारी रखने की कोशिश रहेगी।

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