Dussehra 2021: इस मंदिर में होती है दशानन की पूजा, यहां बच्चों के नाम भी रखे हैं 'मेघनाथ' और 'लंकेश'

- रावण दहन रोकने के लिए कोर्ट की शरण भी ली
- परदेशीपुरा स्थित मंदिर में मोक्ष दिवस के रूप में मनेगा दशहरा, होगी रावण की पूजा

By: Ashtha Awasthi

Published: 14 Oct 2021, 03:56 PM IST

इंदौर। लंकाधिपति रावण को दशहरे पर जलाया जाता है। लेकिन, इंदौर में एक परिवार ऐसा भी है, जो रावण की पूजा करता है। यह परिवार रावण को महान विद्वान मानता है। इतना ही नहीं, इस परिवार को हर वर्ष होने वाले रावण दहन पर भी आपत्ति है। इस आपत्ति के चलते परिवार ने न्यायालय की शरण तक ली और कई महत्वपूर्ण तर्क रखते हुए इस प्रथा पर रोक लगाने की मांग की। यह परिवार रावण को देवतुल्य मानता है और घर में बने मंदिर में रोज पूजन करता है।

परदेशीपुरा निवासी महेश गौहर और उनके परिवार ने अपने घर में रावण का मंदिर बना रखा है। इसमें सुबह शाम आरती होती है। आरती में घर के सभी सदस्य, बच्चे शामिल होते हैं। परिवार में बच्चों के नाम मेघनाथ, लंकेश भी रखे गए हैं। महेश मानते हैं, दशहरा पर्व अच्छाई पर बुराई की जीत का प्रतीक माना जाता है, लेकिन रावण बुरा व्यक्ति नहीं था। समय बलशाली था। इससे रावण से भूल हुई। रावण महान विद्वान व प्रकांड पंडित था। उसे इस रूप को लोग जानना नहीं चाहते। देश की संस्कृति भी रावण के देवतुल्य रूप को सामने नहीं लाती। उसे बुरा व्यक्ति ही माना जाता है। जबकि, हमने हमारे परिवार में बच्चों के नाम मेघनाथ, लंकेश भी रखे गए हैं।

रोजाना लेते हैं रावण का आशीर्वाद

परिवार के बच्चे जब परीक्षा देने जाते हैं तो घर में बने रावण के मंदिर में आशीर्वाद लेते हैं। यह क्रम पिछले 12 साल से चल रहा है। मंदिर में रावण के 10 सिर के ऊपर नागदेव फन फैलाए हुए हैं। रोजाना आरती होती है। पूरे विधान से रावण का पूजन किया जाता है। गौहर बताते हैं, वे इस दिन विशेष हवन करते हैं और मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं। इस साल परिवार राजबाड़ा पर मोक्ष पूजन करेगा।

न्यायालय से भी लगा चुके गुहार

गौहर ने रावण दहन पर रोक लगाने के लिए न्यायालय से भी गुहार लगाई है। हालांकि, उनकी इस याचिका पर कोई निर्णय नहीं हो पाया। लेकिन, फिर भी उनका हौसला बरकरार है।

मोक्ष दिवस के रूप में मनेगा दशहरा

शुक्रवार को गौहर और उनका परिवार दशहरे को मोक्ष दिवस के रूप में मनाएगा। इस उपलक्ष्य में दशग्रीव दशानन रावण की पूजा परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। परदेशीपुरा स्थित लंकेश्वर महादेव मंदिर पर शुक्रवार सुबह 11 बजे पं. बलराम आर्य द्वारा यज्ञ-हवन कर कन्या पूजन किया जाएगा।

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